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कटान की रफ्तार पर लगा ब्रेक, फिर भी दहशत बरकरार

Sat, 22 Sep 2018 12:24 AM IST
Updated Sat, 22 Sep 2018 12:24 AM IST
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कटान की रफ्तार पर लगा ब्रेक, फिर भी दहशत बरकरार
लाटघाट। देवरांचल में घाघरा के कटान की रफ्तार अब धीमी पड़ने लगी है। इसके बाद भी ग्रामीणों में दहशत बरकरार है, क्योंकि आबादी के पास ही कटान हो रही है। वहीं जलस्तर में तेजी से कमी होने के बाद जगह-जगह हुए जल जमाव से उठ रहे दुर्गंध ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। जिसके चलते बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में अब संक्रामक बीमारियां फैलने का भी खतरा उत्पन्न हो गया है। देवरांचल में घाघरा का कहर अभी जारी है। यह अलग बात है कि रफ्तार अब काफी धीमी हो चुकी है। जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है तो वहीं कटान की रफ्तार में भी अब कमी आई है। इसके बाद भी कटान आबादी के नजदीक होने के चलते ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। बीते चौबीस घंटे की बात की जाए तो घाघरा ने लगभग दस बीघा जमीन काट कर नदी में समाहित कर चुकी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि जलस्तर में कमी होते ही प्रशासनिक अमले ने भी अपने हाथ खींच लिए है। अब धीरे-धीरे ही सही घाघरा की जलधारा कृषि योग्य भूमि को काटते हुए आबादी की तरफ बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन का कोई भी अधिकारी अब क्षेत्र में नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन अब कटान से होने वाले नुकसान का मूल्यांकन नहीं कर रहा है, जिसके चलते कई बाढ़ पीड़ितों के समक्ष परेशानी खड़ी हो गई है। क्योंकि एक तरफ उनकी भूमि व मकान घाघरा की जलधारा में समाहित हो रहे है तो वहीं प्रशासन द्वारा मूल्यांकन न किए जाने की स्थिति में मुआवजा भी नहीं मिलेगा।
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जलभराव से उठ रही दुर्गंध, बढ़ा संक्रामक रोग का खतरा
लाटघाट। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब विभिन्न निचले इलाकों में जगह-जगह जल भराव हुआ है। काफी दिनों से भरा पानी सड़ने लगा है और उससे दुर्गंध उठने लगी है। विभिन्न ग्रामों के साथ ही प्राथमिक विद्यालय परसिया के पास स्थित गड्ढे में भी पानी भरा है। भरे पानी से उठ रहे दुर्गंध ने भी लोगों की परेशानी को बढ़ा दिया है। दवा का छिड़काव आदि न होने से जल भराव वाले क्षेत्रों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं प्राथमिक विद्यालय परसिया में पानी भरा है। प्रधानाध्यापक राम दुलारे यादव ने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों की कुल संख्या 65 है। बच्चों को गांव निवासी रामानंद के घर पर पढ़ाया जा रहा है। परिसर में दुर्गंध के चलते कक्षाएं संचालित करना संभव नहीं हो पा रहा है।
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