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बंद होगा 20 फीसदी लेकर मुआवजे के घपले का खेल
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:43 PM IST
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आजमगढ़। भू-माफियाओं की ओर से विभागीय कर्मचारियों संग साठगांठ कर हाइवे की जमीन के फर्जी मालिक खड़ा कर मुआवजे की धनराशि हड़पने का खेल लंबे समय से चल रहा है। सूत्रों की माने तो विभाग के ऐसे दलालों का बोलबाला है जो 10 से 20 फीसदी का लालच देकर फर्जी लोगों को जमीन का मालिक बनाकर खड़ा कर देते हैं और मुआवजे की धनराशि हड़पने की कोशिश शुरू हो जाती है। फिलहाल तीन मामलों में एफआईआर के बाद इनमें हड़कंप मचा हुआ है।
बूढ़नपुर तहसील के भीलमपुर छपरा निवासी सुग्रीव राम पुत्र धनई 30 साल से लापता है। उसके हिस्से की कुछ जमीन आजमगढ़-लखनऊ हाईवे में आई थी। भू-माफियाओं ने राजस्व और तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी सुग्रीव को खड़ा कर दिया। फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाकर प्राइवेट बैंक में खाता खुलवाया गया। जिस दिन विभाग की ओर से मुआवजे की धनराशि 95 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर हुई उसी दिन खाते से 18 लाख कैश निकाल लिए गए, 40 लाख के सोने की खरीदारी की और शेष रुपया दूसरे खातों में किया ट्रांसफर कर दिया। मामला सुर्खियों में आने का बाद खाते को सील करा नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अभी ये मामला ठंडा भी नहीं पड़ा कि भू-माफियाओं की ओर से दो ऐसे लोगों की ओर से फिर मुआवजे के लिए क्लेम के लिए गया है, जो 20 साल से ज्यादा समय से लापता हैं। हालांकि मामला मुआवजा जारी करने से पहले ही पकड़ा में आ गया था। विभाग की ओर से दोनों फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी गई है।
फर्जी लाभार्थियों की आड़ में मुआवजा हड़पने के खेल में कलक्ट्रेट स्थित विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय में दलालों का पूरा सिंडीकेट सक्रिय है। इनके पास ऐसे लोगों को पूरा डाटा होता है जो जिनकी जमीन हाईवे आदि में आ रही है और वो या तो मर चुके हैं या काफी समय से लापता चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इनके पास पूरी फाइल तैयार होती है। बस इन्हें तलाश होती है ऐसे फर्जी आदमी कि जिन्हें ये जमीन का वास्तविक मालिक बनाकर मुआवजे के लिए क्लेम कर सकें बदले में इन्हें मुआवजे में 10 से 20 फीसदी तक हिस्सेदारी दी जाती है।
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फर्जी आदमी खड़ा कर हाईवे में आई जमीन का मुआवजा हड़पने के मामले में जांच की जा रही है। ये भे देखा जा रहा है कि इसमें कोई विभागीय संलिप्तता तो नहीं है। पकड़े जाने पर उसके ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आलोक वर्मा, सीआरओ
आधार से पैन कार्ड बनाने वाले भी शामिल
आजमगढ़। दलालों के इस सिंडिकेट में फर्जी आधार कार्ड और पैन बनाने वाले लोग भी शामिल हैं। ये फर्जी मालिक की फोटो लगाकर वास्तविक मालिक के नाम से आधार और पैन कार्ड खुलवाते हैं। इसके बाद बैंक में इनका सुनियोजित तौर पर खाता खुलवाया जाता है। चूंकि इन्हें पकड़े जाने का पूरा डर होता है, इसलिए खाते में धनराशि ट्रांसफर होते ही इसकी बंदरबांट कर दी जाती है। अब बैंक में खाता खुलवाते वक्ता खाते को वैरीफाई करने वाले खाता धारकों की पहचान कर इन्हें पकड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि इसमें बैंक अधिकारियों की संलिप्तता की बात भी स्वीकारी जा रही है।
कर्मचारियों की मिलीभगत से काम आसान
आजमगढ़। विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के कर्मचारियों की इस सिंडिकेट को पूरी तरह संरक्षण प्राप्त है। मुआवजे के लिए क्लेम करने वाले लाभार्थियों की पहचान आदि का कार्य इसी कार्यालय की ओर से संपन्न किया जाता है। चूंकि कर्मचारियों की इसमें पहले से ही मिलीभगत होती है, इसलिए इनके पकड़े जाने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। वो तो मामले की जानकारी जिसकी जमीन थी उसे पता चल गया और उसने मामले की शिकायत कर दी नहीं तो इनका पकड़ा जाना संभव नहीं है। यदि हाईवे में आज जमीन के अब तक दिए गए मुआवजे की जांच की जाए तो कई ऐसे मामले पकड़ में आ सकते हैं।
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बूढ़नपुर तहसील के भीलमपुर छपरा निवासी सुग्रीव राम पुत्र धनई 30 साल से लापता है। उसके हिस्से की कुछ जमीन आजमगढ़-लखनऊ हाईवे में आई थी। भू-माफियाओं ने राजस्व और तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी सुग्रीव को खड़ा कर दिया। फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाकर प्राइवेट बैंक में खाता खुलवाया गया। जिस दिन विभाग की ओर से मुआवजे की धनराशि 95 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर हुई उसी दिन खाते से 18 लाख कैश निकाल लिए गए, 40 लाख के सोने की खरीदारी की और शेष रुपया दूसरे खातों में किया ट्रांसफर कर दिया। मामला सुर्खियों में आने का बाद खाते को सील करा नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अभी ये मामला ठंडा भी नहीं पड़ा कि भू-माफियाओं की ओर से दो ऐसे लोगों की ओर से फिर मुआवजे के लिए क्लेम के लिए गया है, जो 20 साल से ज्यादा समय से लापता हैं। हालांकि मामला मुआवजा जारी करने से पहले ही पकड़ा में आ गया था। विभाग की ओर से दोनों फर्जी लाभार्थियों के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी गई है।
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फर्जी लाभार्थियों की आड़ में मुआवजा हड़पने के खेल में कलक्ट्रेट स्थित विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय में दलालों का पूरा सिंडीकेट सक्रिय है। इनके पास ऐसे लोगों को पूरा डाटा होता है जो जिनकी जमीन हाईवे आदि में आ रही है और वो या तो मर चुके हैं या काफी समय से लापता चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इनके पास पूरी फाइल तैयार होती है। बस इन्हें तलाश होती है ऐसे फर्जी आदमी कि जिन्हें ये जमीन का वास्तविक मालिक बनाकर मुआवजे के लिए क्लेम कर सकें बदले में इन्हें मुआवजे में 10 से 20 फीसदी तक हिस्सेदारी दी जाती है।
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फर्जी आदमी खड़ा कर हाईवे में आई जमीन का मुआवजा हड़पने के मामले में जांच की जा रही है। ये भे देखा जा रहा है कि इसमें कोई विभागीय संलिप्तता तो नहीं है। पकड़े जाने पर उसके ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आलोक वर्मा, सीआरओ
आधार से पैन कार्ड बनाने वाले भी शामिल
आजमगढ़। दलालों के इस सिंडिकेट में फर्जी आधार कार्ड और पैन बनाने वाले लोग भी शामिल हैं। ये फर्जी मालिक की फोटो लगाकर वास्तविक मालिक के नाम से आधार और पैन कार्ड खुलवाते हैं। इसके बाद बैंक में इनका सुनियोजित तौर पर खाता खुलवाया जाता है। चूंकि इन्हें पकड़े जाने का पूरा डर होता है, इसलिए खाते में धनराशि ट्रांसफर होते ही इसकी बंदरबांट कर दी जाती है। अब बैंक में खाता खुलवाते वक्ता खाते को वैरीफाई करने वाले खाता धारकों की पहचान कर इन्हें पकड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि इसमें बैंक अधिकारियों की संलिप्तता की बात भी स्वीकारी जा रही है।
कर्मचारियों की मिलीभगत से काम आसान
आजमगढ़। विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के कर्मचारियों की इस सिंडिकेट को पूरी तरह संरक्षण प्राप्त है। मुआवजे के लिए क्लेम करने वाले लाभार्थियों की पहचान आदि का कार्य इसी कार्यालय की ओर से संपन्न किया जाता है। चूंकि कर्मचारियों की इसमें पहले से ही मिलीभगत होती है, इसलिए इनके पकड़े जाने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। वो तो मामले की जानकारी जिसकी जमीन थी उसे पता चल गया और उसने मामले की शिकायत कर दी नहीं तो इनका पकड़ा जाना संभव नहीं है। यदि हाईवे में आज जमीन के अब तक दिए गए मुआवजे की जांच की जाए तो कई ऐसे मामले पकड़ में आ सकते हैं।