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रावण अत्याचार से चहुओर मची त्राहि-त्राहि
Updated Thu, 21 Sep 2017 11:35 PM IST
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आजमगढ़। श्रीरामलीला समिति पुरानी कोतवाली के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला के दूसरे दिन बुधवार की रात रावण जन्म और रावण अत्याचार का कलाकारों ने मंचन किया। इस दौरान रावण विवाह का भी मंचन हुआ। श्रीविष्णु जी की झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
पुरानी कोतवाली पर चल रही श्रीरामलीला की शुरुआत भगवान श्रीराम, विष्णु जी और श्रीरामायण की आरती उतार कर की गई। इसके बाद बाबा दरभंगा बिहार के कलाकारों ने रावण जन्म और रावण अत्याचार का मंचन किया। मंचन के क्रम में देवलोक से लेकर पृथ्वी लोक में रावण के अत्याचारों से चारों ओर त्राहि-त्राहि मचने लगी। रावण ने सबसे पहले कुबेर को बंदी बनाकर उनके पूरे साम्राज्य पर कब्जा कर लिया। इसके बाद रावण अपने राक्षसी सेना के साथ जहां भी धार्मिक अनुष्ठान होता उसमें बाधा पहुंचाना, देवताओं को परेशान करना, उसके नित्य का क्रिया कलाप हो गया। देवताओं से लेकर पृथ्वीवासी ऋषि-मुनि रावण के अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। इस दौरान श्रीराम और विष्णु जी की झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। इसके बाद रावण विवाह का मंचन किया गया।
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पुरानी कोतवाली पर चल रही श्रीरामलीला की शुरुआत भगवान श्रीराम, विष्णु जी और श्रीरामायण की आरती उतार कर की गई। इसके बाद बाबा दरभंगा बिहार के कलाकारों ने रावण जन्म और रावण अत्याचार का मंचन किया। मंचन के क्रम में देवलोक से लेकर पृथ्वी लोक में रावण के अत्याचारों से चारों ओर त्राहि-त्राहि मचने लगी। रावण ने सबसे पहले कुबेर को बंदी बनाकर उनके पूरे साम्राज्य पर कब्जा कर लिया। इसके बाद रावण अपने राक्षसी सेना के साथ जहां भी धार्मिक अनुष्ठान होता उसमें बाधा पहुंचाना, देवताओं को परेशान करना, उसके नित्य का क्रिया कलाप हो गया। देवताओं से लेकर पृथ्वीवासी ऋषि-मुनि रावण के अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। इस दौरान श्रीराम और विष्णु जी की झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। इसके बाद रावण विवाह का मंचन किया गया।
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