{"_id":"5cfd4f4abdec2206fd72da89","slug":"156010477012-azamgarh-news135","type":"story","status":"publish","title_hn":"कफन के जरिए भूखमरी और गरीबी के दर्द को किया बयां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कफन के जरिए भूखमरी और गरीबी के दर्द को किया बयां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लाटघाट। कैफी आजमी शताब्दी वर्ष के अवसर पर शनिवार की देर शाम श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा परिसर में मुंशी प्रेमचंद की कहानी सद्गति और कफन का मंचन हुआ। कफन के मंचन में कलाकारों ने भुखमरी और गरीबी के दर्द को बड़ी ही सजीवता से प्रस्तुत किया। मंचन के बाद पुस्तकालय की ओर से नाटक में भाग लेने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया।
कार्यशाला के पहले साप्ताहिक सत्र की जिम्मेदारी दिल्ली के रंगरेज थिएटर ग्रुप को दी गई थी। रंगरेज थिएटर ग्रुप की सलाहकार डॉ. रमा की अनुमति के साथ संस्था के निदेशक कपिल कुमार ने अपने सलाहकार साथी सुजीत और नेहा के साथ मिलकर एक जून से आठ जून तक कार्यशाला प्रदान की। कार्यशाला के अंतिम दिन शनिवार को प्रेमचंद की कहानी कफन और सद्गति का मंचन पुस्तकालय सभागार में किया गया। कफन कहानी में गरीबी का चरम क्या है, भुखमरी क्या है, भुखमरी और गरीबी में मरने के बाद व्यक्ति को कफन के कितनी जद्दोजहद करनी पड़ती है, इसका सजीव प्रदर्शन कलाकारों ने किया। सद्गति में जातिवाद के दंश को उकेरा। कफन में घीसू की भूमिका में अजीत, माधव की भूमिका में प्रभात, बुधिया की भूमिका में ज्योति, जमींदार की भूमिका में प्रशांत और सूत्रधार की भूमिका ममता ने निभाई। वहीं सद्गति कहानी में पंडित की भूमिका में सत्येंद्र, पंडिताइन की भूमिका में ममता, दुखी चमार की भूमिका में शिवकुमार, झुरिया की भूमिका में निकिता, दुखी बेटी की भूमिका में सुरभि और गोड़ की भूमिका में प्रभात नजर आए। सत्यम, नितेश, हेमंत, शिवांगी, आकाश, धर्मराज, अंकुर, अभिमन्यु ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। अंत में विभूति नारायण राय, विकास नारायण राय, प्रियदर्शनी, हरमंदिर पांडेय ने रंग कर्मियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किया। कपिल कुमार, सुजीत व नेहा को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र दिया गया। इस मौके पर संध्या, रामजनम, सुदेश शर्मा, सुशील राय, प्रतिमा, चंद्रजीत, संतोष, शिवनारायण, शेषनाथ राय आदि उपस्थित रहे। डायरेक्टर हिना देसाई ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
कार्यशाला के पहले साप्ताहिक सत्र की जिम्मेदारी दिल्ली के रंगरेज थिएटर ग्रुप को दी गई थी। रंगरेज थिएटर ग्रुप की सलाहकार डॉ. रमा की अनुमति के साथ संस्था के निदेशक कपिल कुमार ने अपने सलाहकार साथी सुजीत और नेहा के साथ मिलकर एक जून से आठ जून तक कार्यशाला प्रदान की। कार्यशाला के अंतिम दिन शनिवार को प्रेमचंद की कहानी कफन और सद्गति का मंचन पुस्तकालय सभागार में किया गया। कफन कहानी में गरीबी का चरम क्या है, भुखमरी क्या है, भुखमरी और गरीबी में मरने के बाद व्यक्ति को कफन के कितनी जद्दोजहद करनी पड़ती है, इसका सजीव प्रदर्शन कलाकारों ने किया। सद्गति में जातिवाद के दंश को उकेरा। कफन में घीसू की भूमिका में अजीत, माधव की भूमिका में प्रभात, बुधिया की भूमिका में ज्योति, जमींदार की भूमिका में प्रशांत और सूत्रधार की भूमिका ममता ने निभाई। वहीं सद्गति कहानी में पंडित की भूमिका में सत्येंद्र, पंडिताइन की भूमिका में ममता, दुखी चमार की भूमिका में शिवकुमार, झुरिया की भूमिका में निकिता, दुखी बेटी की भूमिका में सुरभि और गोड़ की भूमिका में प्रभात नजर आए। सत्यम, नितेश, हेमंत, शिवांगी, आकाश, धर्मराज, अंकुर, अभिमन्यु ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। अंत में विभूति नारायण राय, विकास नारायण राय, प्रियदर्शनी, हरमंदिर पांडेय ने रंग कर्मियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किया। कपिल कुमार, सुजीत व नेहा को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र दिया गया। इस मौके पर संध्या, रामजनम, सुदेश शर्मा, सुशील राय, प्रतिमा, चंद्रजीत, संतोष, शिवनारायण, शेषनाथ राय आदि उपस्थित रहे। डायरेक्टर हिना देसाई ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन