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संगीता ने आगे बढ़ाया गांधी परिवार का दायरा
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आजमगढ़। लालगंज लोकसभा सीट का चुनाव जीतकर सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद ने ना केवल भाजपा की झोली से क्षेत्र का प्रतिधित्व छीन लिया। बल्कि इस सीट पर पुन: पार्टी का झंडा बुलंद कर दिया। इसके अलावा अपने परिवार का भी दायरा बढ़ा दिया। पूर्व की तरह ही अब इस परिवार का जिले में राजनीतिक कद पुन: बढ़ गया।
मेंहनगर तहसील क्षेत्र के पवनी कला गांव निवासी संगीता आजाद के पति आजाद अरिमर्दन वर्तमान समय मेें लालगंज विधान सभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के विधायक हैं। इसके अलावा संगीता आजाद के ससुर गांधी आजाद बसपा के दो बार राज्य सभा सांसद रह चुके हैं। गांधी आजाद की पार्टी में मजबूत पकड़ की वजह से ही उन्होंने अपने छोटे भाई की पत्नी मीरा आजाद को जिला पंचायत सदस्य बना दिया। राजनीति के जानकारों की मानें तो मीरा आजाद को जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट दिलाने में गांधी आजाद को पूरी ताकत झोंक देनी पड़ी। उनका अंदरखाने में विरोध हो रहा था, लेकिन गांधी आजाद की पार्टी में मजबूत पकड़ होने की वजह से कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। गांधी आजाद के बाद परिवार जरुर कमजोर हो गया। जिला पंचायत की सीट भी सपाईयों ने छीन लिया। गांधी आजाद की मौत और जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी जाने से परिवार जरुर कमजोर हो गई थी। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में आजाद अरिमर्दन ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल कर पुन: परिवार का दबदबा कायम कर लिया। लोकसभा चुनाव 2019 में भारी वोटों से भाजपा प्रत्याशी एवं निवर्तमान सांसद नीलम सोनकर को हराकर सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद ने ना केवल पार्टी की झोली में एक सीट डाल दिया, बल्कि अपने परिवार का दायरा भी बढ़ानेे में कामयाब रही।
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मेंहनगर तहसील क्षेत्र के पवनी कला गांव निवासी संगीता आजाद के पति आजाद अरिमर्दन वर्तमान समय मेें लालगंज विधान सभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के विधायक हैं। इसके अलावा संगीता आजाद के ससुर गांधी आजाद बसपा के दो बार राज्य सभा सांसद रह चुके हैं। गांधी आजाद की पार्टी में मजबूत पकड़ की वजह से ही उन्होंने अपने छोटे भाई की पत्नी मीरा आजाद को जिला पंचायत सदस्य बना दिया। राजनीति के जानकारों की मानें तो मीरा आजाद को जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट दिलाने में गांधी आजाद को पूरी ताकत झोंक देनी पड़ी। उनका अंदरखाने में विरोध हो रहा था, लेकिन गांधी आजाद की पार्टी में मजबूत पकड़ होने की वजह से कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। गांधी आजाद के बाद परिवार जरुर कमजोर हो गया। जिला पंचायत की सीट भी सपाईयों ने छीन लिया। गांधी आजाद की मौत और जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी जाने से परिवार जरुर कमजोर हो गई थी। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में आजाद अरिमर्दन ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल कर पुन: परिवार का दबदबा कायम कर लिया। लोकसभा चुनाव 2019 में भारी वोटों से भाजपा प्रत्याशी एवं निवर्तमान सांसद नीलम सोनकर को हराकर सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी संगीता आजाद ने ना केवल पार्टी की झोली में एक सीट डाल दिया, बल्कि अपने परिवार का दायरा भी बढ़ानेे में कामयाब रही।
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