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शिव कल्याण और मंगल के प्रतीक
Updated Thu, 24 May 2018 12:48 AM IST
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अहरौला। तरकुलहा के सिद्ध हनुमान मंदिर पर चल रहे नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ के दूसरे दिन कथावाचक काशी के पंडित शीतल प्रकाश आनंद ने शिव विवाह का वर्णन किया। कहा कि शिव कल्याण और मंगल के देवता हैं, इसीलिए भगवान भोलेनाथ को देवाधिदेव की संज्ञा मिली है। हमेशा जगत कल्याण के लिए कैलाश पर्वत पर अखंड समाधि में लीन रहते हैं। शिव विवाह का वर्णन करते हुए कहा जिस समय शिव की बारात राजा हिमाचल के दरवाजे पहुंचती है, देखने वाले दंग रह जाते हैं। भूत, पिचास की बारात, दूल्हा नंदी बैल पर सवार, सांप और बिच्छू की माला, इसे देख कर माता पार्वती की मां भी विचलित हो जाती हैं। विवाह करने से मना करती हैं। लेकिन देव ऋषि नारद की ओर से देवाधिदेव महादेव का गुण-दोष सुनने के बाद विवाह के लिए तैयार हो जाती हैं। देर रात झांकी निकाली गई। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय में हो गया। पुजारी राधे मोहन दास, करिया सिंह, ओमप्रकाश फौजी आदि लोग रहे।