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शासन में अटका नई टाउन एरिया का प्रस्ताव, नहीं हो पा रहा विकास
Updated Thu, 24 May 2018 11:36 PM IST
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आजमगढ़। जिला प्रशासन की ओर से कई मानकों को पूरा करने वाले रानी की सराय, फरिहां और चांदपट्टी को टाउन एरिया घोषित करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। रिस्पांस नहीं मिलने पर रानी की सराय के लिए रिमाइंडर भी भेजा गया। शासन की ओर से मामले में कोई निष्कर्ष नहीं लेने से इन स्थानों का आपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही अहरौला, बूढ़नपुर समेत कई कस्बे टाउन एरिया के मानकों पर खरा उतरते हैं, लेकिन इनकी सुधि न प्रशासन की ओर से ली जा रही है और न जनप्रतिनिधियों की ओर से। विकास के लिए सूबे की सरकार की ओर से कई स्थानों पर कई प्रावधान और मानक तय किए गए हैं। मानकों के आधार पर गांव, कस्बे और शहर के विकास के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाता है। आबादी, उपलब्ध सुविधाओं आदि के आधार पर जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर शासन गांवों को टाउन एरिया और टाउन एरिया को पालिका आदि में तब्दील करती है। जिला प्रशासन की ओर से दो साल पहले जनपद के रानी की सराय, सगड़ी तहसील के चांदपट्टी बाजार और निजामाबाद तहसील के फरिहां गांव को टाउन एरिया में तब्दी करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी सुहास एलवाई के समय भेजे गए प्रस्ताव में बताया गया था कि रानी की सराय बाजार सर्किट हाउस से नजदीक है। प्रस्तावित क्षेत्र में शहरी गुण, पुलिस थाना, ब्लाक, व्यवसाय केंद्र कई मल्टी नेशन्ल कंपनियों के शोरूम, चेकपोस्ट, अंग्रेजी माध्यम स्कूल और इंटर कालेज, स्वास्थ्य केंद्र, पोस्ट आफिस, बैंक, रेलवे स्टेशन आदि की सुविधाएं विद्यमान हैं। ये भी बताया गया था कि जनसंख्या भी लगभग मानक के करीब है। इसके साथ ही ये सर्किट हाउस के करीब है। सैदवारा क्षेत्र को इसमें शामिल करते हुए इसे नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए। इसी तरह फरिहां और चांदपट्टी बाजार की भी खूबियां बताई गई थीं। शासन से कोई रिस्पांस नहीं मिलने के कारण पूर्व जिलाधिकारी सीबी सिंह के समय में इसके लिए रिमाइंडर भी भेजा गया। इसके बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। टाउन एरिया में तब्दी नहीं होने के कारण इन क्षेत्रों का आपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों की ओर से भी क्षेत्र को टाउन एरिया घोषित ककरने की मांग की गई है। इसके साथ ही बूढ़नपुर, अहरौला आदि क्षेत्र ऐसे हैं जो लगभग टाउन एरिया के सभी मानक पूरे करते हैं। लगातार मांग के बाद भी इन क्षेत्रों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनप्रतिनिधयों की ओर से भी कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।
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