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नाटक ने कुरीतियों के खिलाफ दिया संदेश
Updated Mon, 16 Oct 2017 11:47 PM IST
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आजमगढ़। नाट्य निर्देशक राजकुमार शाह द्वारा निर्देशित नाटक विदाई का सफल मंचन सिधारी स्थित राहुल प्रेक्षागृह में सोमवार को मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ संदेश दिया गया।
रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित विदाई नाटक में दिखाया गया है कि विदाई के साथ समाज में चली आ रही प्राचीन परंपरा को निभाया जरुर है, किंतु विवाह मंडप में दहेज के लिए अड़े अपने पिता से अनुराग का विद्रोह प्रतीकात्मक रुप में युवाओं से इस कुरीति के खिलाफ उठकर खड़े होने का संदेश देती है। रविंद्रनाथ ने बहुत पहले यह जान लिया था कि केवल युवा सोच ही इन कुरीतियों के खिलाफ अचूक अस्त्र है। गुरुदेव रविंद्र नाथ की कहानी के अलावा यथार्थ जीवन की एक कथा का भी मंचन किया गया। दोनों कहानियां समान रुप से एक मोड़ पर आकर रुक सी जाती है। हमे झकझोर कर जगाने का प्रयास कराती है। कहती है कि परंपराओं के नाम पर दहेज रुपी दानव कब तक हमारे समाज को छलता रहेगा। कथा विस्तार एवं नाट्य अनुकूलन राजकुमार शाह और संतोष कुमार ने किया। संवाद एवं गीत संतोष कुमार और कविता रेखा सुथार का और गीत अभिजीत राय, संगीत अर्जुन टंडन ने नाटक में जान डाल देने में सफल रहे।
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रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित विदाई नाटक में दिखाया गया है कि विदाई के साथ समाज में चली आ रही प्राचीन परंपरा को निभाया जरुर है, किंतु विवाह मंडप में दहेज के लिए अड़े अपने पिता से अनुराग का विद्रोह प्रतीकात्मक रुप में युवाओं से इस कुरीति के खिलाफ उठकर खड़े होने का संदेश देती है। रविंद्रनाथ ने बहुत पहले यह जान लिया था कि केवल युवा सोच ही इन कुरीतियों के खिलाफ अचूक अस्त्र है। गुरुदेव रविंद्र नाथ की कहानी के अलावा यथार्थ जीवन की एक कथा का भी मंचन किया गया। दोनों कहानियां समान रुप से एक मोड़ पर आकर रुक सी जाती है। हमे झकझोर कर जगाने का प्रयास कराती है। कहती है कि परंपराओं के नाम पर दहेज रुपी दानव कब तक हमारे समाज को छलता रहेगा। कथा विस्तार एवं नाट्य अनुकूलन राजकुमार शाह और संतोष कुमार ने किया। संवाद एवं गीत संतोष कुमार और कविता रेखा सुथार का और गीत अभिजीत राय, संगीत अर्जुन टंडन ने नाटक में जान डाल देने में सफल रहे।
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