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कृषि क्षेत्र में अवैध रूप से भवन बनाने वालों को लगेगी दोहरी चपत
Updated Sun, 19 Aug 2018 11:24 PM IST
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अंबुज राय
आजमगढ़। अगर आपने कृषि क्षेत्र में जमीन खरीदी है और उस जमीन पर मकान बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो सचेत हो जाइए क्योंकि महायोजना लागू होने पर भी ये क्षेत्र अगर आवासीय घोषित हो गया तो भी मकान बनवाने वालों को उसकी कंवर्जन कास्ट जमा करनी होगी। जो सर्किल रेट का लगभग 100 प्रतिशत हो सकती है। इस प्रकार उन्हें दोहरी चपत लग सकती है।
वर्ष 2011 में जनपद की महायोजना का कार्यकाल पूरा होने के बाद नई महायोजना लागू नहीं हो सकी है। इसके कारण जनपद में पुरानी महायोजना पर ही काम चल रहा है। पुरानी महायोजना में जिन क्षेत्रों को क़ृषि क्षेत्र दर्शाया गया था, उन क्षेत्रों में नियमत: भवनों का निर्माण नहीं हो सकता लेकिन महायोजना में कृषि क्षेत्र को आवासीय क्षेत्र घोषित होने का लाभ मिलने की आशा में कुछ लोगों ने अपनी मर्जी से और कुछ लोगों ने विकास प्राधिकरण की मिलीभगत से भवन का निर्माण करा लिया। उन्हें इस बात की आशा है कि जब नई महायोजना लागू होगी तो जिस इलाके मकान बनाया है, वह कृषि क्षेत्र से आवासीय हो जाएगा। तब वो आसानी से एडीए से अपना मानचित्र पास करा लेंगे। एडीए के कर्मचारियों ने उसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया। प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, जिन लोगों ने कृषि क्षेत्र में जमीन तो ली है, लेकिन भवन का निर्माण नहीं कराया है तो उन्हें इसका लाभ मिलेगा लेकिन जिन लोगों ने जमीन लेने के बाद अवैध रूप से भवन का निर्माण करा लिया है, उन्हें लैंड यूज परिवर्तन की कंवर्जन कास्ट जमा करनी होगी। तभी उनका मानचित्र एडीए से स्वीकृत होगा।
कृषि क्षेत्र में बनी आवासीय कालोनियां
आजमगढ़। पुरानी महायोजना के तहत जनपद के जमीन सिधारी, देवखरी, मुंडा, जाफरपुर, भदुली, करतालपुर, पठखौली आदि जगहों पर कृषि क्षेत्र चिह्नित किए गए थे। आज इन क्षेत्रों में एक से बढ़कर एक आलीशान बिल्डिंगें बन चुकी है। कुछ अवैध बिल्डरों ने कालोनियां भी बसा दी हैं।
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नियमानुसार कृषि क्षेत्र में अवैध रूप से भवन बनाने वालों को मानचित्र पास कराते समय जमीन की कंवर्जन कास्ट जमा करनी पड़ेगी। बिना कंवर्जन कास्ट जमा किए किसी का मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता है। रहीं बात महायोजना की तो शासन स्तर पर मुख्य ग्राम एवं नगर नियोजक लखनऊ द्वारा अटल मिशन योजना के तहत 61 शहरों की महायोजना को जीयो स्टेशनरी बेस्ड सैटेलाइट मानचित्र तैयार करने के लिए एजेंसी को नामित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तीन माह में सैटेलाइट बेस्ड मास्टर प्लान तैयार हो जाएगा। इसके लिए टेंडर का कार्य पूर्ण हो चुका है।
बाबू सिंह, एडीए सचिव।
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आजमगढ़। अगर आपने कृषि क्षेत्र में जमीन खरीदी है और उस जमीन पर मकान बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो सचेत हो जाइए क्योंकि महायोजना लागू होने पर भी ये क्षेत्र अगर आवासीय घोषित हो गया तो भी मकान बनवाने वालों को उसकी कंवर्जन कास्ट जमा करनी होगी। जो सर्किल रेट का लगभग 100 प्रतिशत हो सकती है। इस प्रकार उन्हें दोहरी चपत लग सकती है।
वर्ष 2011 में जनपद की महायोजना का कार्यकाल पूरा होने के बाद नई महायोजना लागू नहीं हो सकी है। इसके कारण जनपद में पुरानी महायोजना पर ही काम चल रहा है। पुरानी महायोजना में जिन क्षेत्रों को क़ृषि क्षेत्र दर्शाया गया था, उन क्षेत्रों में नियमत: भवनों का निर्माण नहीं हो सकता लेकिन महायोजना में कृषि क्षेत्र को आवासीय क्षेत्र घोषित होने का लाभ मिलने की आशा में कुछ लोगों ने अपनी मर्जी से और कुछ लोगों ने विकास प्राधिकरण की मिलीभगत से भवन का निर्माण करा लिया। उन्हें इस बात की आशा है कि जब नई महायोजना लागू होगी तो जिस इलाके मकान बनाया है, वह कृषि क्षेत्र से आवासीय हो जाएगा। तब वो आसानी से एडीए से अपना मानचित्र पास करा लेंगे। एडीए के कर्मचारियों ने उसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया। प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, जिन लोगों ने कृषि क्षेत्र में जमीन तो ली है, लेकिन भवन का निर्माण नहीं कराया है तो उन्हें इसका लाभ मिलेगा लेकिन जिन लोगों ने जमीन लेने के बाद अवैध रूप से भवन का निर्माण करा लिया है, उन्हें लैंड यूज परिवर्तन की कंवर्जन कास्ट जमा करनी होगी। तभी उनका मानचित्र एडीए से स्वीकृत होगा।
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कृषि क्षेत्र में बनी आवासीय कालोनियां
आजमगढ़। पुरानी महायोजना के तहत जनपद के जमीन सिधारी, देवखरी, मुंडा, जाफरपुर, भदुली, करतालपुर, पठखौली आदि जगहों पर कृषि क्षेत्र चिह्नित किए गए थे। आज इन क्षेत्रों में एक से बढ़कर एक आलीशान बिल्डिंगें बन चुकी है। कुछ अवैध बिल्डरों ने कालोनियां भी बसा दी हैं।
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नियमानुसार कृषि क्षेत्र में अवैध रूप से भवन बनाने वालों को मानचित्र पास कराते समय जमीन की कंवर्जन कास्ट जमा करनी पड़ेगी। बिना कंवर्जन कास्ट जमा किए किसी का मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता है। रहीं बात महायोजना की तो शासन स्तर पर मुख्य ग्राम एवं नगर नियोजक लखनऊ द्वारा अटल मिशन योजना के तहत 61 शहरों की महायोजना को जीयो स्टेशनरी बेस्ड सैटेलाइट मानचित्र तैयार करने के लिए एजेंसी को नामित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तीन माह में सैटेलाइट बेस्ड मास्टर प्लान तैयार हो जाएगा। इसके लिए टेंडर का कार्य पूर्ण हो चुका है।
बाबू सिंह, एडीए सचिव।