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फर्जीवाड़े की पुष्टी, चार माह से कार्रवाई दबा बैठे अधिकारी
Updated Thu, 03 May 2018 12:48 AM IST
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आजमगढ़। तहबरपुर ब्लाक के गांव मेहमौनी में गत वर्ष विकास कार्यों और प्रधानमंत्री आवास में करोड़ों रुपये आवास का गबन की शिकायत में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी ने जांच की। जांच में आवंटित 250 से अधिक आवासों में 100 से भी कम मिले, जो मिले वो भी आधे-अधूरे या मानक के विपरीत। कई अपात्रों को आवास देने के मामले सामने आए थे। अनारी नाम से तीन आवास आवंटित किया गया था। इसमें दो अनारी और एक उसके पति नयन के नाम था। एक घर में चार आवास दिए गए थे। पिता, पुत्र, पत्नी सबकों संतृप्त कर दिया गया। मामले की रिपोर्ट आठ दिसंबर को ही तत्कालीन सीडीओ को सौंप दी गई। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा नेताओं की परैवी भी बेकार हो गई। पिछले दिनों जिलाधिकारी ने कार्रवाई के आदेश दिए वो भी डंप हो गए। अब शासन से शिकायत की गई है।
तहबरपुर विकास खंड के गांव मेहमौनी निवासी विवेक कुमार राय पुत्र हरिशचंद्र राय ने गत वर्ष शिकायत की थी कि गांव में पूर्व एवं वर्तमान प्रधान की ओर से मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास और अन्य विकाय योजनाओं में फर्जीवाड़ा किया गया है। जुलाई में हुई शिकायत में तत्काली सीडीओ अभिषेक सिंह ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह और एई आरईएएस ज्ञानेंद्र कुमार को सौंपी। आठ दिसंबर को मामले की जांच कर इसकी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दी गई। अन्य शिकायतों में तो कुछ नहीं निकला, लेकिन शिकायत के बिंदु पांच, जिसमें प्रधानमंत्री आवास में घपले की बात थी, उसमें घोर अनियमितिताएं मिलीं।
जांच में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि पूर्व एवं वर्तमान प्रधान के कार्यकाल में लगभग 250 आवासों का भुगतान किया गया है। जांच में सौ से भी कम आवास मिले। मानक से अपात्र लोगों को आवास का वितरण किया गया है। गांव में अनारी को तीन आवास मिले हैं। इसमें दो अनारी और एक उसके पति नयन के नाम आवंटित हैं। साथ ही इनके दो प पुत्रों के नाम भी आवास का आवंटन किया गया है। इसी प्रकार एक ही घर में पिता और उसके दो अविवाहित पुत्रों को भी आवास दिया गया है। इसमें राजीव पुज्ञ सुभाष (अविवाहित) के घर चार आवास आवंटित हैं। इसमें एक राजीव, दूसरा सुभाष, तीसरा किस्मतिया और चौथा किसी अन्य नाम से है। अधिकांश आवास अपूर्ण और मानक के विपरीत मिले।
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डीएमओ ने भी उल्लेख किया था कि जांच के समय इस संबंध कोई भी अभिलेख प्रधान और सेक्रेटरी की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा था कि सभी आवासों शत प्रतिशत धनराशि रिकवरी करने योग्य है। रिपोर्ट साक्ष्यों के साथ सीडीओ को सौंपी गई थी। चार माह से अधिकारी मामले की रिपोर्ट दबाकर बैठे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। चार अप्रैल को ये मामला जिलाधिकारी के सामने फिर उठाया गया। डीएम ने भी मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
कार्रवाई नहीं होने की शिकात उपायुक्त से की
आजमगढ़। तहबरपुर विकास खंड के गांव मेहमौनी निवासी विवेक कुमार राय पुत्र हरिशचंद्र राय ने जनपद स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर मामले की शिकायत शासन से भी की। इस पर उपायुक्त मनरेगा ने जिलाघिधकारी को पूरे प्रकरण की जांच करा के एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की गई है। अब मामले की शिकायत उपायुक्त मनरेगा से की गई है।
भाजपा नेताओं ने भी की थी पैरवी
आजमगढ़। शिकायतकर्ता की माने तो स्थानीय भाजपा नेता जिसमें जिलाध्यक्ष भी शामिल थे, ने भी मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों से पैरवी की थी, इसके बाद भी पता नहीं किसके दवाव में कार्रवाई नहीं की गई। इससे शासन के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
अब फिर से की जा रही जांच
आजमगढ़। तहबरपुर विकास खंड के गांव मेहमौनी निवासी विवेक कुमार राय की पहली शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वो कार्रवाई के लिए जिले से लेकर शासन तक गुहार लगा रहे हैं। इनकी ओर से जांच बदलने की कोई सिफारिश भी नहीं की गई है, इसके बाद भी प्रशासन की ओर से मामले की नये सिरे जांच शुरू करा दी गई है। अब मनरेगा और विकास कार्यों से जुड़े मामले की जांच सीवीओ वीके सिंह और आवासों की जांच डीडीओ विजय कुमार कर रहे हैं। सीवीओ गुरुवार को जांच के लिए गांव पहुंचें।
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तहबरपुर विकास खंड के गांव मेहमौनी निवासी विवेक कुमार राय पुत्र हरिशचंद्र राय ने गत वर्ष शिकायत की थी कि गांव में पूर्व एवं वर्तमान प्रधान की ओर से मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास और अन्य विकाय योजनाओं में फर्जीवाड़ा किया गया है। जुलाई में हुई शिकायत में तत्काली सीडीओ अभिषेक सिंह ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह और एई आरईएएस ज्ञानेंद्र कुमार को सौंपी। आठ दिसंबर को मामले की जांच कर इसकी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दी गई। अन्य शिकायतों में तो कुछ नहीं निकला, लेकिन शिकायत के बिंदु पांच, जिसमें प्रधानमंत्री आवास में घपले की बात थी, उसमें घोर अनियमितिताएं मिलीं।
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जांच में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि पूर्व एवं वर्तमान प्रधान के कार्यकाल में लगभग 250 आवासों का भुगतान किया गया है। जांच में सौ से भी कम आवास मिले। मानक से अपात्र लोगों को आवास का वितरण किया गया है। गांव में अनारी को तीन आवास मिले हैं। इसमें दो अनारी और एक उसके पति नयन के नाम आवंटित हैं। साथ ही इनके दो प पुत्रों के नाम भी आवास का आवंटन किया गया है। इसी प्रकार एक ही घर में पिता और उसके दो अविवाहित पुत्रों को भी आवास दिया गया है। इसमें राजीव पुज्ञ सुभाष (अविवाहित) के घर चार आवास आवंटित हैं। इसमें एक राजीव, दूसरा सुभाष, तीसरा किस्मतिया और चौथा किसी अन्य नाम से है। अधिकांश आवास अपूर्ण और मानक के विपरीत मिले।
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डीएमओ ने भी उल्लेख किया था कि जांच के समय इस संबंध कोई भी अभिलेख प्रधान और सेक्रेटरी की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा था कि सभी आवासों शत प्रतिशत धनराशि रिकवरी करने योग्य है। रिपोर्ट साक्ष्यों के साथ सीडीओ को सौंपी गई थी। चार माह से अधिकारी मामले की रिपोर्ट दबाकर बैठे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। चार अप्रैल को ये मामला जिलाधिकारी के सामने फिर उठाया गया। डीएम ने भी मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
कार्रवाई नहीं होने की शिकात उपायुक्त से की
आजमगढ़। तहबरपुर विकास खंड के गांव मेहमौनी निवासी विवेक कुमार राय पुत्र हरिशचंद्र राय ने जनपद स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर मामले की शिकायत शासन से भी की। इस पर उपायुक्त मनरेगा ने जिलाघिधकारी को पूरे प्रकरण की जांच करा के एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की गई है। अब मामले की शिकायत उपायुक्त मनरेगा से की गई है।
भाजपा नेताओं ने भी की थी पैरवी
आजमगढ़। शिकायतकर्ता की माने तो स्थानीय भाजपा नेता जिसमें जिलाध्यक्ष भी शामिल थे, ने भी मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों से पैरवी की थी, इसके बाद भी पता नहीं किसके दवाव में कार्रवाई नहीं की गई। इससे शासन के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
अब फिर से की जा रही जांच
आजमगढ़। तहबरपुर विकास खंड के गांव मेहमौनी निवासी विवेक कुमार राय की पहली शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वो कार्रवाई के लिए जिले से लेकर शासन तक गुहार लगा रहे हैं। इनकी ओर से जांच बदलने की कोई सिफारिश भी नहीं की गई है, इसके बाद भी प्रशासन की ओर से मामले की नये सिरे जांच शुरू करा दी गई है। अब मनरेगा और विकास कार्यों से जुड़े मामले की जांच सीवीओ वीके सिंह और आवासों की जांच डीडीओ विजय कुमार कर रहे हैं। सीवीओ गुरुवार को जांच के लिए गांव पहुंचें।