{"_id":"5c363e1bbdec225715599031","slug":"121547058715-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कीट रोग और खरपतवारों के प्रति किसानों को किया आगाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कीट रोग और खरपतवारों के प्रति किसानों को किया आगाह
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। उप निदेशक कृषि रक्षा गोपाल दास ने बताया कि किसान रबी की प्रमुख फसलों में गेहूं, राई-सरसों, आलू में लगने वाले कीट रोग और खरपतवारों से बचाव के लिए नियमित निगरानी करें। कीट रोग के लक्षण मिलने पर तत्काल सुझाव एवं संस्तुतियों को अपनाकर फसल को बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं में प्राय: चैड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपतवारों जैसे गुल्ली डंडा, चटरी-चटरी, बथुआ, कृष्णनील आदि की समस्या देखी जाती है। संकरी पत्ती वाले खरपतवारों (गेहूंसा एवं जंगली जई) के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्ल्यूजी 33 ग्राम (2.5 यूनिट) मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था पर छिड़काव करें। चैड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 20 प्रतिशत डब्ल्यूपी 20 ग्राम मात्रा को लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फ्लैट फैन नाजिल से प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था पर छिड़काव करें। संकरी एवं चैड़ी पत्ती दोनों खरपतवारों के नियंत्रण हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत के साथ मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 5 प्रतिशत डब्ल्यूजी 40 ग्राम (2.5 यूनिट) अथवा मेट्रिब्यून्जीन 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 250-300 ग्राम मात्रा लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से फ्लैट फैन नाजिल से प्रथम सिंचाई के बाद छिड़काव करें। गेंहू की फसल में मकोय नाम खरपतवार के नियंत्रण हेतु कारफेंट्राजोन-इथाइल 40 प्रतिशत डीएफ की 50 ग्राम मात्रा को लगभग 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि बदली के साथ ठण्डक बढ़ने पर राई-सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप होने की सम्भावना होती है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (5 प्रतिशत प्रभावित पौधे) से अधिक हो तो एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 ली0/डाई मेथोएट 30 प्रतिशत ईसी 01 ली0, आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी 01 ली0, में से किसी एक को प्रति हे0 की दर से लगभग 500 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करें।
उन्होंने बताया कि आलू की फसल में अगेती/पछेती झूलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनते हैं तथा तीव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झूलस जाता है। रोग के प्रकोप की स्थिति में कॉपरआक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2.5 किग्रा0 या मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 किग्रा या जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 किग्रा0, में से किसी एक को 600-800 ली0 पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि आलू की फसल में अगेती/पछेती झूलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनते हैं तथा तीव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झूलस जाता है। रोग के प्रकोप की स्थिति में कॉपरआक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2.5 किग्रा0 या मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 किग्रा या जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 किग्रा0, में से किसी एक को 600-800 ली0 पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
विज्ञापन