{"_id":"585ec5064f1c1b774fe3d1e7","slug":"12-billion-in-the-gorakhpur-varanasi-track-bicega","type":"story","status":"publish","title_hn":"12 सौ करोड़ में बिछेगा गोरखपुर-वाराणसी ट्रैक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
12 सौ करोड़ में बिछेगा गोरखपुर-वाराणसी ट्रैक
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 25 Dec 2016 12:27 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर-वाराणसी रेलखंड का पहला सर्वे पूरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी से लालगंज, आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर तक नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए प्रथम चरण में किए जा रहे सर्वे का कार्य पूरा हो गया है। दूसरे चरण का सर्वे कराने के लिए केंद्र सरकार से 90 लाख रुपये की स्वीकृत हुए हैं। जल्द ही वाराणसी और गोरखपुर की तरफ से सर्वे का कार्य शुरू होगा। वाराणसी से गोरखपुर के बीच करीब 500 गांवों से होकर गुजरने वाले इस नई रेल खंड पर परियोजना पर लगभग 12 सौ करोड़ खर्च होने का अनुमान है। संसद के अगले सत्र में निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित होगा।
आजमगढ़ से वाराणसी के लिए रेल मार्ग बिछाने के लिए कालिका प्रोजेक्ट के नाम से वर्ष 1960 में लालगंज पश्चिमी के सांसद रहे कालिका सिंह की पहल पर रेलवे विभाग ने सर्वे करवाया था। बाद में यह मामला दब गया। इसके बाद किसी भी दल के प्रतिनिधि का ध्यान इस तरफ नहीं गया, ना ही इस संबंध में कोई आवाज बुलंद हुई। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में लालगंज लोकसभा क्षेत्र से भाजपा से नीलम सोनकर ने जीत दर्ज कराई। उन्होंने नए रेल खंड की मांग संसद और रेल मंत्री के समक्ष उठाया।
इसके पीछे सांसद नीलम सोनकर का तर्क रहा कि आजादी के बाद से रेलवे जैसी सुविधा से लालगंज का क्षेत्र अछूता है। आवागमन की रेल जैसी व्यवस्था ना होने से आजमगढ़ समेत आसपास के क्षेत्रों के उद्योग पिछड़ गए हैं। इसमें प्रमुख रूप से मुबारकपुर का रेशम उद्योग, निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी उद्योग, रानी की सराय और अतरौलिया क्षेत्र का जूट उद्योग आदि शामिल है। इसके अलावा रेल सुविधा ना होने से लालगंज समेत आसपास क्षेत्र के लोगों को अन्य महानगरों में जाने के लिए वाराणसी और आजमगढ़ की लंबी दूरी तय करके ट्रेन पकडऩी पढ़ती है।
विज्ञापन
क्षेत्र के ज्यादातर गांव देहात में रहने वाले लोगों को ट्रेन देखना भी नसीब नहीं है। सांसद के इस मुद्दे पर विचार करते हुए रेल मंत्री ने वाराणसी से लालगंज आजमगढ़ दोहरीघाट होते हुए गोरखपुर क्षेत्र को रेलवे लाइन से जोड़ने की मंजूरी दे दी। रेल मंत्री से अनुमति मिलने के बाद वाराणसी और गोरखपुर डिविजन की तरफ से सर्वे का पहला चरण जुलाई महीने के अंत में पूरा कर लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ट्रैक वाराणसी से गोरखपुर के बीच करीब 500 गांव से होते हुए गुजरेगी। जिन किसानों की जमीन से होते हुए रेल पटरी गुजरेगी उन्हें नेशनल हाईवे की तर्ज पर ही सर्किल रेट के मुआवजा दिया जाएगा। वाराणसी से लालगंज आजमगढ़ दोहरीघाट होते हुए गोरखपुर तक रेलवे ट्रैक बिछाने मैं करीब 12 सौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
विज्ञापन
आजमगढ़ से वाराणसी के लिए रेल मार्ग बिछाने के लिए कालिका प्रोजेक्ट के नाम से वर्ष 1960 में लालगंज पश्चिमी के सांसद रहे कालिका सिंह की पहल पर रेलवे विभाग ने सर्वे करवाया था। बाद में यह मामला दब गया। इसके बाद किसी भी दल के प्रतिनिधि का ध्यान इस तरफ नहीं गया, ना ही इस संबंध में कोई आवाज बुलंद हुई। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में लालगंज लोकसभा क्षेत्र से भाजपा से नीलम सोनकर ने जीत दर्ज कराई। उन्होंने नए रेल खंड की मांग संसद और रेल मंत्री के समक्ष उठाया।
विज्ञापन
इसके पीछे सांसद नीलम सोनकर का तर्क रहा कि आजादी के बाद से रेलवे जैसी सुविधा से लालगंज का क्षेत्र अछूता है। आवागमन की रेल जैसी व्यवस्था ना होने से आजमगढ़ समेत आसपास के क्षेत्रों के उद्योग पिछड़ गए हैं। इसमें प्रमुख रूप से मुबारकपुर का रेशम उद्योग, निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी उद्योग, रानी की सराय और अतरौलिया क्षेत्र का जूट उद्योग आदि शामिल है। इसके अलावा रेल सुविधा ना होने से लालगंज समेत आसपास क्षेत्र के लोगों को अन्य महानगरों में जाने के लिए वाराणसी और आजमगढ़ की लंबी दूरी तय करके ट्रेन पकडऩी पढ़ती है।
विज्ञापन
क्षेत्र के ज्यादातर गांव देहात में रहने वाले लोगों को ट्रेन देखना भी नसीब नहीं है। सांसद के इस मुद्दे पर विचार करते हुए रेल मंत्री ने वाराणसी से लालगंज आजमगढ़ दोहरीघाट होते हुए गोरखपुर क्षेत्र को रेलवे लाइन से जोड़ने की मंजूरी दे दी। रेल मंत्री से अनुमति मिलने के बाद वाराणसी और गोरखपुर डिविजन की तरफ से सर्वे का पहला चरण जुलाई महीने के अंत में पूरा कर लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ट्रैक वाराणसी से गोरखपुर के बीच करीब 500 गांव से होते हुए गुजरेगी। जिन किसानों की जमीन से होते हुए रेल पटरी गुजरेगी उन्हें नेशनल हाईवे की तर्ज पर ही सर्किल रेट के मुआवजा दिया जाएगा। वाराणसी से लालगंज आजमगढ़ दोहरीघाट होते हुए गोरखपुर तक रेलवे ट्रैक बिछाने मैं करीब 12 सौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।