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बच्चों को कांवेंट स्कूल में भेजेंगे तो करेंगे पश्चाताप
Updated Fri, 30 Mar 2018 11:47 PM IST
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सरायमीर। नगर पंचायत सरायमीर से सटे रहमत कालोनी शेरवां में नहर के पास गुरुवार की रात जलसे का आयोजन किया गया। जलसे का शुभारंभ कारी अबू शहमा आजमी ने कुरान पाक की तिलावत से किया। जिसके बाद शराफत सीतापुरी ने बारगाह रिसालत में नजऱाना अकीदत पेश किया।
जलसे में कैफ ने अपनी मीठी आवाज में नात पाक सुना कर लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना अब्दुर्रशीद और संचालन मौलाना मुस्तक़ीम शेरवानी ने किया। कार्यक्रम में मौलाना सरफराज अहमद मदनी ने कहा कि हमें जागरूक होकर अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यह हमारे भविष्य हैं अगर आज हम उन्हें दीनी तालीम से परिचित नहीं कराएंगे। कांवेंट स्कूल में भेजेंगे तो पश्चाताप करेंगे। जामिया हुसैनिया जौनपुर की शिक्षक मौलाना वसीम अहमद शेरवानी ने कहा कि अगर तुम दुनिया और आखिरत में सफलता चाहते हो तो अपनी जबान और शरमगाह की हिफाजत करो। मुफ्ती राशिद ने कहा कि इस्लाम को न मिटाया जा सकता है और ना ही इसे समाप्त किया जा सकता है। लोगों से नमाज के एहतमाम करने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम का समापन मौलाना अब्दुल रशीद साहब की मुल्क में अमन और अमान कि दुआ के साथ हुआ। इस मौके पर हाफिज यूसुफ, मोहम्मद अमजद, अब्दुल्लाह, सैफूल इस्लाम, जीशान, सैफुल्लाह, अशरफ आदि का सराहनीय योगदान रहा।
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जलसे में कैफ ने अपनी मीठी आवाज में नात पाक सुना कर लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना अब्दुर्रशीद और संचालन मौलाना मुस्तक़ीम शेरवानी ने किया। कार्यक्रम में मौलाना सरफराज अहमद मदनी ने कहा कि हमें जागरूक होकर अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यह हमारे भविष्य हैं अगर आज हम उन्हें दीनी तालीम से परिचित नहीं कराएंगे। कांवेंट स्कूल में भेजेंगे तो पश्चाताप करेंगे। जामिया हुसैनिया जौनपुर की शिक्षक मौलाना वसीम अहमद शेरवानी ने कहा कि अगर तुम दुनिया और आखिरत में सफलता चाहते हो तो अपनी जबान और शरमगाह की हिफाजत करो। मुफ्ती राशिद ने कहा कि इस्लाम को न मिटाया जा सकता है और ना ही इसे समाप्त किया जा सकता है। लोगों से नमाज के एहतमाम करने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम का समापन मौलाना अब्दुल रशीद साहब की मुल्क में अमन और अमान कि दुआ के साथ हुआ। इस मौके पर हाफिज यूसुफ, मोहम्मद अमजद, अब्दुल्लाह, सैफूल इस्लाम, जीशान, सैफुल्लाह, अशरफ आदि का सराहनीय योगदान रहा।
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