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चरमराई जिले की बिजली व्यवस्था, फाल्ट ने किया बेहाल
Updated Sun, 27 May 2018 12:25 AM IST
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आजमगढ़। शहर ही नहीं पूरे जिले की बिजली व्यवस्था इन दिनों चरमरा गई है। अघोषित कटौती से इस भीषण गर्मी में लोग बिलबिला उठे है। शासन-प्रशासन का जिला मुख्यालय पर 24 घंटे बिजली सप्लाई का दावा पूरी तरह से हवा-हवाई साबित हो रहा है।
एक तो आसमान से आग बरस रही है तो वहीं बिजली की अघोषित कटौती ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। सरकार भले ही जिला मुख्यालय पर 24, तहसील मुख्यालय पर 20 और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रही हो लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर में 14 से 16 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 8 घंटे बमुश्किल बिजली की सप्लाई मिल रही है। इसमें भी लोकल फाल्ट ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। शनिवार को पारा 44 डिग्री सेंटीग्रेट से ऊपर रहा तो वहीं बिजली विभाग की व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई नजर आ रही है। एक सप्ताह की बात की जाए तो शायद ही कोई इलाका रहा हो जहां शेड्यूल के अनुरूप बिजली की सप्लाई हुई हो। चार दिन पूर्व शहर के सब्जीमंडी चौराहे पर लगा ट्रांसफार्मर जल गया तो वहीं इसके एक दिन पहले लालडिग्गी का टांसफार्मर फूंक गया था। गुरुवार की रात पालीटेक्निक सब स्टेशन पर इनकमिंग केबल के जल जाने से आधे शहर की बत्ती 16 घंटे से अधिक समय तक गुल रही। शुक्रवार की रात सिधारी हाइडिल के सामने लगा ट्रांसफार्मर जल गया। अंडर ग्रांउड केबिल ब्लास्ट, तार का टूटना आदि तो आम बात हो गई है।
मांग से ज्यादा की खपत और आसमान से बरसती आग ने बिजली व्यवस्था को कुछ हद तक प्रभावित किया है। गर्मी के चलते ट्रांसफार्मर हीट होकर जल जा रहे है तो वहीं गर्मी के कारण ही अंडर ग्राउंड केबिल आदि में भी फॉल्ट आ जा रहा है। सामान्य तौर पर जिले को 130 से 140 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में 175 से 180 मेगा वाट बिजली खर्च हो रही है। यह सब भीषण गर्मी के चलते है, फिर भी विभाग शेड्यूल के अनुरुप बिजली की व्यवस्था बाहल रखने का पूरा प्रयास कर रही है।
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चंद्रेश कुमार उपाध्याय, अधिक्षण अभियंता, विद्युत वितरण खंड प्रथम, आजमगढ़।
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मात्र छह से आठ घंटे मिल रही बिजली
सगड़ी। तहसील क्षेत्र में बिजली सप्लाई की व्यवस्था अत्यंत खराब हाल में पहुंच चुकी है। बिजली न होने से जहां कई जगहों पर पानी की किल्लत हो गई है तो वहीं बिजली से चलने वाले व्यवसायिक कार्य भी ठप हो गये है। कई स्थानों पर आटा चक्की आदि कई दिनों से बंद पड़े है। वहीं लाइट न होने से किसानों की खेती का कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित है। सिंचाई के अभाव में सब्जी की फसल जहां सूख रही है तो वहीं धान का बेगा भी अभी तक नहीं पड़ सका है।
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बिजली के अभाव में बंद पड़े है पावरलूम
मुबारकपुर। रेशमी नगरी के नाम से विख्यात मुबारकपुर कस्बे में भी बिजली व्यवस्था का बुरा हाल है। यहां का मुख्य कारोबार बुनकरी का काम है जो बिजली पर ही आश्रित है। अघोषित कटौती के चलते कस्बे में लगे पावर लूम इन दिनों बंद प्राय: ही चल रहे है, जिसके चलते बुनकरों के समक्ष मजदूरी की किल्लत हो गई है। वहीं भीषण गर्मी में बिजली की कटौती ने क्षेत्र में पानी की समस्या भी खड़ी कर दी है। बिजली न होने से नपा प्रशासन रेगुलर तरीके से पानी की सप्लाई नहीं कर पा रहा है।
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तीन माह से जला पड़ा है ट्रांसफार्मर
मेजवां। फूलपुर तहसील क्षेत्र के जौमा गांव में लगा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर तीन माह से जला पड़ा है। जिसके चलते तीन माह से गांव की बिजली आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। वर्तमान में भीषण गर्मी पड़ रही है तो वहीं रमजान माह भी चल रहा है। जिसके चलते रोजेदारों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत यह ट्रांसफार्मर लगाया गया था। सौ से अधिक परिवारों को इस ट्रांसफार्मर से बिजली की सप्लाई होती है, जब से ट्रांसफार्मर जला है तब से इन परिवारों की बत्ती गुल है। ग्रामीणों से ट्रांसफार्मर बदलने के लिए उच्चाधिकारियों से गुहार लगाने के साथ ही मुख्यमंत्री को भी पत्रक भेजा लेकिन अब तक ट्रांसफार्मर बदलने की कवायद नहीं की गई। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
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अघोषित कटौती ने बढ़ायी परेशानी
जहानागंज। ब्लाक क्षेत्र में बिजली कटौती का बुरा हाल हो गया है। बिजली विभाग मनमाने तरीके से बिजली की काटौती कर रहा है। शेड्यूल के हिसाब से बिजली की सप्लाई काफी दिनों से नहीं की जा रही है। जिससे उपभोक्ताओं में आक्रोश व्याप्त है। भीषण गर्मी में अघोषित कटौती से लोग बेहाल हो गये है। लोगों में इतना आक्रोश भरा है कि वे कभी भी बिजली विभाग के खिलाफ सड़क पर उतर सकते है।
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एक तो आसमान से आग बरस रही है तो वहीं बिजली की अघोषित कटौती ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। सरकार भले ही जिला मुख्यालय पर 24, तहसील मुख्यालय पर 20 और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रही हो लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर में 14 से 16 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 8 घंटे बमुश्किल बिजली की सप्लाई मिल रही है। इसमें भी लोकल फाल्ट ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। शनिवार को पारा 44 डिग्री सेंटीग्रेट से ऊपर रहा तो वहीं बिजली विभाग की व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई नजर आ रही है। एक सप्ताह की बात की जाए तो शायद ही कोई इलाका रहा हो जहां शेड्यूल के अनुरूप बिजली की सप्लाई हुई हो। चार दिन पूर्व शहर के सब्जीमंडी चौराहे पर लगा ट्रांसफार्मर जल गया तो वहीं इसके एक दिन पहले लालडिग्गी का टांसफार्मर फूंक गया था। गुरुवार की रात पालीटेक्निक सब स्टेशन पर इनकमिंग केबल के जल जाने से आधे शहर की बत्ती 16 घंटे से अधिक समय तक गुल रही। शुक्रवार की रात सिधारी हाइडिल के सामने लगा ट्रांसफार्मर जल गया। अंडर ग्रांउड केबिल ब्लास्ट, तार का टूटना आदि तो आम बात हो गई है।
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मांग से ज्यादा की खपत और आसमान से बरसती आग ने बिजली व्यवस्था को कुछ हद तक प्रभावित किया है। गर्मी के चलते ट्रांसफार्मर हीट होकर जल जा रहे है तो वहीं गर्मी के कारण ही अंडर ग्राउंड केबिल आदि में भी फॉल्ट आ जा रहा है। सामान्य तौर पर जिले को 130 से 140 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में 175 से 180 मेगा वाट बिजली खर्च हो रही है। यह सब भीषण गर्मी के चलते है, फिर भी विभाग शेड्यूल के अनुरुप बिजली की व्यवस्था बाहल रखने का पूरा प्रयास कर रही है।
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चंद्रेश कुमार उपाध्याय, अधिक्षण अभियंता, विद्युत वितरण खंड प्रथम, आजमगढ़।
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मात्र छह से आठ घंटे मिल रही बिजली
सगड़ी। तहसील क्षेत्र में बिजली सप्लाई की व्यवस्था अत्यंत खराब हाल में पहुंच चुकी है। बिजली न होने से जहां कई जगहों पर पानी की किल्लत हो गई है तो वहीं बिजली से चलने वाले व्यवसायिक कार्य भी ठप हो गये है। कई स्थानों पर आटा चक्की आदि कई दिनों से बंद पड़े है। वहीं लाइट न होने से किसानों की खेती का कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित है। सिंचाई के अभाव में सब्जी की फसल जहां सूख रही है तो वहीं धान का बेगा भी अभी तक नहीं पड़ सका है।
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बिजली के अभाव में बंद पड़े है पावरलूम
मुबारकपुर। रेशमी नगरी के नाम से विख्यात मुबारकपुर कस्बे में भी बिजली व्यवस्था का बुरा हाल है। यहां का मुख्य कारोबार बुनकरी का काम है जो बिजली पर ही आश्रित है। अघोषित कटौती के चलते कस्बे में लगे पावर लूम इन दिनों बंद प्राय: ही चल रहे है, जिसके चलते बुनकरों के समक्ष मजदूरी की किल्लत हो गई है। वहीं भीषण गर्मी में बिजली की कटौती ने क्षेत्र में पानी की समस्या भी खड़ी कर दी है। बिजली न होने से नपा प्रशासन रेगुलर तरीके से पानी की सप्लाई नहीं कर पा रहा है।
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तीन माह से जला पड़ा है ट्रांसफार्मर
मेजवां। फूलपुर तहसील क्षेत्र के जौमा गांव में लगा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर तीन माह से जला पड़ा है। जिसके चलते तीन माह से गांव की बिजली आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। वर्तमान में भीषण गर्मी पड़ रही है तो वहीं रमजान माह भी चल रहा है। जिसके चलते रोजेदारों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत यह ट्रांसफार्मर लगाया गया था। सौ से अधिक परिवारों को इस ट्रांसफार्मर से बिजली की सप्लाई होती है, जब से ट्रांसफार्मर जला है तब से इन परिवारों की बत्ती गुल है। ग्रामीणों से ट्रांसफार्मर बदलने के लिए उच्चाधिकारियों से गुहार लगाने के साथ ही मुख्यमंत्री को भी पत्रक भेजा लेकिन अब तक ट्रांसफार्मर बदलने की कवायद नहीं की गई। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
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अघोषित कटौती ने बढ़ायी परेशानी
जहानागंज। ब्लाक क्षेत्र में बिजली कटौती का बुरा हाल हो गया है। बिजली विभाग मनमाने तरीके से बिजली की काटौती कर रहा है। शेड्यूल के हिसाब से बिजली की सप्लाई काफी दिनों से नहीं की जा रही है। जिससे उपभोक्ताओं में आक्रोश व्याप्त है। भीषण गर्मी में अघोषित कटौती से लोग बेहाल हो गये है। लोगों में इतना आक्रोश भरा है कि वे कभी भी बिजली विभाग के खिलाफ सड़क पर उतर सकते है।
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