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तत्काल चिह्नित करें डंपिंग ग्राउंड, डीएम प्रत्येक माह करेंगे कूड़ा निस्तारण की समीक्षा
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आजमगढ़। एनजीटी की सख्ती के बाद नगर विकास विभाग की ओर से सभी निकायों पर शिकंजा कस दिया गया है। शासन की ओर से दस अक्तूबर 2017 को ही सभी निकायों में कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि की व्यवस्था करने और डीएम को इसकी समीक्षा कर शासन को अवगत कराने के निर्देश दिए गए थे। दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक अतरौलिया, महाराजगंज और माहुल नगर पंचायत में डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं है। शासन की ओर से तुरंत डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था करने के साथ ही डीएम को हर महीने कूड़ा निस्तारण की समीक्षा कर शासन को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के क्रम में शासन की ओर से वर्ष 2016 में ही सभी जनपदों को अपने समस्त निकायों में अवस्थापना सुविधाएं दो वर्ष में विकसित करने के निर्देश दिए गए थे। इसमें प्रत्येक निकाय में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आवश्यक जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी की ओर से कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। शासन की ओर से अक्तूबर 2017 में भी इस बारे में समुचित निर्देश हुए देते जिलाधिकारी को प्रत्येक तीन माह पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कर शासन को अवगत कराने के कहा गया था। इसके बाद भी निर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है।
जनपद की तीन नगर पंचायतों में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। अतरौलिया नगर पंचायत में अभी तक डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं हो सकी है। यहां नगर पंचायत के बहल में चेयरंमैन सुभाष जायसवाल की निजी जमीन में कूड़ा फेंका जा रहा है। माहुल नगर पंचायत के गौसपुर मोड़ के पास निजी जमीन कूड़ा फेंका जा रहा है। यहां कूड़ा फेंकने को लेकर विवाद भी हो चुका है। महाराजगंज नगर पंचायत में भी डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं है। यहां भी तभी छोटी सरयु के किनारे तो कभी सड़कों के किनारे कूड़ा गिराने का मामला सामने आता रहता है। फिलहाल करमहां में कूड़ा डंप किया जा रहा है।
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शासन की ओर से अब जिलाधिकारी को जहां डंपिंग ग्राउंड नहीं है वहां तत्काल भूमि के चिह्निकरण और उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक माह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करने साथ ही इसकी रिपोर्ट प्रत्येक माह की 10 तारीख तक राज्य मिशन निदेश को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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शासन के निर्देश के क्रम में सभी निकायों को ठोस अपिशष्ट प्रबंधन के लिए जमीन के प्रंबंध जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां गलने वाले कूड़े से खाद आदि बनाने की व्यवस्था की जाएगी। - नरेंद्र सिंह, प्रभारी अधिकारी नगरी निकाय
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एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के क्रम में शासन की ओर से वर्ष 2016 में ही सभी जनपदों को अपने समस्त निकायों में अवस्थापना सुविधाएं दो वर्ष में विकसित करने के निर्देश दिए गए थे। इसमें प्रत्येक निकाय में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आवश्यक जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी की ओर से कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। शासन की ओर से अक्तूबर 2017 में भी इस बारे में समुचित निर्देश हुए देते जिलाधिकारी को प्रत्येक तीन माह पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कर शासन को अवगत कराने के कहा गया था। इसके बाद भी निर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है।
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जनपद की तीन नगर पंचायतों में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। अतरौलिया नगर पंचायत में अभी तक डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं हो सकी है। यहां नगर पंचायत के बहल में चेयरंमैन सुभाष जायसवाल की निजी जमीन में कूड़ा फेंका जा रहा है। माहुल नगर पंचायत के गौसपुर मोड़ के पास निजी जमीन कूड़ा फेंका जा रहा है। यहां कूड़ा फेंकने को लेकर विवाद भी हो चुका है। महाराजगंज नगर पंचायत में भी डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं है। यहां भी तभी छोटी सरयु के किनारे तो कभी सड़कों के किनारे कूड़ा गिराने का मामला सामने आता रहता है। फिलहाल करमहां में कूड़ा डंप किया जा रहा है।
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शासन की ओर से अब जिलाधिकारी को जहां डंपिंग ग्राउंड नहीं है वहां तत्काल भूमि के चिह्निकरण और उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक माह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करने साथ ही इसकी रिपोर्ट प्रत्येक माह की 10 तारीख तक राज्य मिशन निदेश को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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शासन के निर्देश के क्रम में सभी निकायों को ठोस अपिशष्ट प्रबंधन के लिए जमीन के प्रंबंध जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां गलने वाले कूड़े से खाद आदि बनाने की व्यवस्था की जाएगी। - नरेंद्र सिंह, प्रभारी अधिकारी नगरी निकाय