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बड़े तालों में तलाशी जाएंगी बिजली उत्पादन की सभावनाएं

Mon, 05 Mar 2018 11:52 PM IST
Updated Mon, 05 Mar 2018 11:52 PM IST
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बड़े तालों में तलाशी जाएंगी बिजली उत्पादन की सभावनाएं
जिले के तीन तालों में अब बिजली उत्पादन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। जिलाधिकारी ने यहां पर माइक्रो हाइड्रो पावर प्लांट लगाने के लिए पीओ नेडा को सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। पीओ नेडा से जल्द रिपोर्ट तलब की गई है। यदि ताल प्रोजेक्ट लगाने के लिए उपयुक्त मिलता है तो जिले के विकास में अहम पड़ाव होगा।
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जनपद के अजमतगढ़ ब्लाक में फैला ताल सलोना, ठेकमा ब्लाक का ताल जमुआवा और गंभीरबन बड़े ताल हैं। ताल सलोना से पहले तो पंप कैनाल के माध्यम से कई हेक्टेयर जमीन की सिंचाई भी होती थी। विभागीय देखरेख के अभाव में इन तालों का कभी विकास नहीं हो सका। नतीजा ये रहा कि ये ताल घास, फूस और झाड़ी आदि से पटते जा रहे हैं।
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जिलाधिकारी ने हमेशा पानी से आच्छादित रहने वाले इन तालों में बिजली उत्पादन शुरू करने की कोशिश शुरू की है। हालांकि अभी योजना प्रारंभिक दौर में हैं। अभी माइक्रो हाइड्रो पावर प्लांट लगाने के लिए पीओ नेडा को सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। यदि ताल प्रोजेक्ट लगाने के लिए उपयुक्त मिलता है और उसके अनुसार यहां हमेशा पानी उपलब्ध रहता है तो इसकी योजना बना केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद वहां से आकर टीम सर्वे करेगी।
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घाघरा से जुड़ा है ताल सलोना
आजमगढ़। अजमतगढ़ के ताल सलोना इन तीन तालों में सबसे बड़ा है। यहां 12 महीने पानी रहता है। ताल एक तरफ घाघरा और दूसरी किसी और नदी से जुड़ा है। पानी कम होने से नदियों का पानी इसमें आता भी है। पहले पंप कैनाल के माध्यम से सिंचाई भी होती थी। वहीं, ठेकमा ब्लाक का जमुआवा ताल बेसो और गांगी नदी से जुड़ा है। जौनपुर की तरफ से बरसात का पानी इसमें आता है। यहां पानी इन दोनों नदियों में निकलता है। हालांकि इस ताल का अधिकतर हिस्सा भीषण गर्मी में सूख भी जाता है।
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पांच मेगावाट तक होगा माइक्रो प्लांट
आजमगढ़। पीओ नेडा ने बताया कि यदि साल में 12 महीने ताल में पर्याप्त पानी रहता है और हेड सही होता है तो एक से पांच मेगावाट तक का प्लांट लगाया जा सकता है। मैदानी क्षेत्र में भी कई प्लांट चल रहे हैं, लेकिन यहां सर्वे के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जल्द ही तालों का सर्वे किया जाएगा।यदि यहां प्लांट लगाने का स्कोप होगा तो इससे हेट र्क्वाटर को अवगत कराया जाएगा। वहां से टीम आकर फिर निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही डीपीआर तैयार होगा।
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जनपद के ताल उपयुक्त मिलते हैं तो यहां माइक्रो हाइड्रो पावर प्लांट लगवाने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में प्रोजेक्ट आफीसर नेडा को सर्वे कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। संभावनाएं मिलती हैं तो प्रोजेक्ट लगवाने के लिए पूरी कोशिश की जाएगी।
सीबी सिंह, जिलाधिकारी
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लौट सकती है ताल की रौनक
आजमगढ़। अजमतगढ़ क्षेत्र में फैला ताल सलोना धीरे-धीरे अस्तित्व खो रहा है। पूर्व में छोटी सरयू नदी (घाघरा) इसमें आकर मिलती थी। धीरे-धीरे नदी का दायरा सिमटता गया और उसका पानी इस ताल में कम आने लगा। अगर प्रशासन की नजर पड़ जाए और टेकनपुर के पास छोटी सरयू की सफाई करा दी जाए तो ताल की पुरानी रौनक लौट आएगी।

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बन सकता है पर्यटन स्थल
आजमगढ़। काशी से लुंबिनी जाने वाले रास्ते में ये ताल है। ठंड के मौसम में बड़ी संख्या में यहां विदेशी पक्षी आते हैं। पर्यटन स्थल बनने पर इस क्षेत्र की स्थिति में काफी सुधार आ सकता है। वर्ष 1999 से 2008-09 के बीच वन विभाग की ओर से कई बार शासन को इस बाबत प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई। 2003-04 में प्रदेश सरकार के पर्यावरण मंत्री रहे रामप्यारे सिंह ने भी इसे विकसित करने का मन बनाया, लेकिन किन्ही कारणों से ऐसा हो नहीं सका।
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