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मुजफ्फरनगर दंगा मामले में आजम को मिली राहत
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 23 Oct 2013 12:09 AM IST
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मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण और निलंबन को लेकर मुश्किल में आई सरकार और कैबिनेट मंत्री आजम खान को थोड़ी राहत मिली है।
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दंगे से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई स्वयं करने संबंधी सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यहां चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है।
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हाईकोर्ट ने पंकज कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में मुजफ्फरनगर में तैनात सात पुलिसकर्मियों के तबादले पर रोक लगा दी थी। सरकार और आजम खान को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने इस याचिका को सुप्रीमकोर्ट में स्थानांतरित करने की अर्जी दी थी। जिस पर सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी।
प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएमए काजमी और मुख्य स्थायी अधिवक्ता द्वितीय कमरुल हसन ने मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की कोर्ट में उपस्थित होकर इस आदेश से उन्हें अवगत कराया।
आदेश की जानकारी होने पर कोर्ट ने याचिका की सुनवाई पर रोक लगा दी है। इसके बाद प्रदेश सरकार और आजम खान को हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने या अधिवक्ता के जरिये उपस्थिति की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दंगे के हर मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीमकोर्ट में
हाईकोर्ट में मंगलवार को अधिवक्ता एसएमए काजमी ने सुप्रीमकोर्ट के सोमवार के आदेश की प्रति प्रस्तुत करते हुए बताया कि 19 सितंबर को दिए निर्णय में ही सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया था कि दंगे से संबंधित मुकदमों की सुनवाई सिर्फ वही करेगा।
27 अगस्त को मुजफ्फरनगर और उसके आसपास हुई घटनाओं के पीड़ित सिर्फ सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि इस आदेश के बाद हाईकोर्ट याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकता है। सुप्रीमकोर्ट ने रजिस्ट्री को 19 सितंबर के आदेश की प्रति हाईकोर्ट के महानिबंधक और लखनऊ बेंच को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
यथावत रहेगा हाईकोर्ट का आदेश
याचियों के अधिवक्ता विजय गौतम के मुताबिक सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट में चल रही याचिका की सुनवाई पर रोक लगाई है। हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश यथावत रहेगा। चूंकि प्रदेश सरकार ने याचिका स्थानांतरित करने की अर्जी दी थी उसने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए स्थानांतरण पर रोक लगाने संबंधी आदेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।