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ध्वजारोहण के साथ राम मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूरी : डॉ. भागवत

Tue, 25 Nov 2025 11:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 11:16 PM IST
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With the hoisting of the flag, the classical process of construction of Ram temple is complete: Dr. Bhagwat
56-ध्वज को नमन करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत,  राज्यपाल आनंदी  बेन पटेल
अयोध्या। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज राम मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूरी हो गई। मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण भी हो गया। यह एक ऐतिहासिक और पूर्णत्व का क्षण है। आज का दिन कृतार्थता का दिवस है। आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जिसे हमारे पूर्वजों ने हमें दिया है।
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सरसंघचालक मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज के आरोहण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। कितने ही लोगों ने जो सपना देखा, कितने ही लोगों ने जो प्रयास किए, अपने प्राण अर्पित किए, आज उनकी स्वर्गस्थ आत्मा तृप्त हुई होगी।
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आज वास्तव में अशोक सिंघल को शांति मिली होगी। महंत रामचंद्र दास परमहंस महाराज व विष्णु हरि डालमिया समेत कितने ही संत, गृहस्थ और विद्यार्थियों ने प्राणार्पण किया, पसीना बहाया। आंदोलन में जो पीछे रहे, वे भी यही इच्छा व्यक्त करते थे कि राम मंदिर बनेगा, जो अब बन गया है।
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डॉ. भागवत ने कहा कि रामराज का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख-शांति प्रदान करता था, वह ध्वज आज फिर से नीचे से ऊपर चढ़कर शिखर पर विराजमान हो चुका है। इसे हमने अपनी आंखों से इसी जन्म में देखा है। ध्वज धर्म का प्रतीक होता है। इतना ऊंचा ध्वज चढ़ाने में भी समय लगा, ठीक ऐसे ही मंदिर बनाने में भी समय लगा। 500 साल छोड़ें तो भी 30 साल तो लगे ही। उस मंदिर के रूप में हमने उन तत्वों को ऊपर पहुंचाया है, जिनसे संपूर्ण विश्व का जीवन ठीक चलेगा। उसी धर्म का प्रतीक भगवा रंग इस धर्म ध्वज का रंग है।


धर्मध्वज पर कोविदार का प्रतीक रघुकुल की परंपरा से जुड़ा

संघ प्रमुख ने कहा कि धर्मध्वज पर कोविदार का प्रतीक रघुकुल की परंपरा से जुड़ा हुआ है। यह कचनार जैसा लगता है। मदार और पारिजात दोनों वृक्षों के गुणों का संयुक्त रूप है। वृक्ष स्वयं धूप में खड़े रहकर सबको छाया देते हैं, फल स्वयं उगाते हैं और दूसरों को बांट देते हैं। कचनार के औषधीय गुण हैं। सब प्रकार से उपयोगी यह प्रतीक धर्म जीवन का पर्याय है।
सूर्य भगवान धर्म के तेज और संकल्प के प्रतीक हैं। उनके रथ का चक्र एक है। रास्ता नहीं है। सात घोड़े हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सर्प की लगाम है। सारथी के पैर नहीं हैं। क्या ऐसी गाड़ी चल सकती है? फिर भी वे बिना थके प्रतिदिन पूरब से पश्चिम जाते और आते हैं। कार्य की सिद्धि स्वयं के भरोसे होती है।

विपरीत परिस्थितियों में हमें एकजुट होकर काम करना होगा

डॉ. भागवत के अनुसार हिंदू समाज ने लगातार 500 वर्षों और बाद के दीर्घ आंदोलन में अपने इस स्वत्व को सिद्ध किया। रामलला आ गए, मंदिर बन गया। यही बात सत्य पर आधारित धर्म को लेकर भी है। धर्म, ज्ञान, छाया व सुफल संपूर्ण दुनिया में बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा करने का काम शुरू हो गया है। सभी विपरीत परिस्थितियों में हमें एकजुट होकर सतत् काम करना होगा।
राम मंदिर हमारे हृदय में तप का सृजन करे, यही कामना

सरसंघचालक ने कहा कि भारत में जन्मे लोग ऐसा जीवन जिएं कि दुनिया उनसे प्रेरणा लें। पृथ्वी के समस्त मानव भारतवासियों के चरित्र से जीवन की विद्या सीखें। परम वैभव संपन्न, सबके लिए खुशी और शांति बांटने वाला और विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है। यही विश्व की अपेक्षा और हमारा कर्तव्य भी है।

रामदास स्वामी के श्लोक का जिक्र करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि जैसा सपना उन्होंने देखा था, उससे भी अधिक भव्य और सुंदर राम मंदिर आज बन गया है। सभी सनातन धर्मावलंबियों और नागरिकों को शुभकामनाएं। राम मंदिर हमारे हृदय में तप का सृजन करे, यही कामना है।
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