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UP: महंत शशिकांत दास ने महिपाल सिंह के आरोपों को बताया मनगढंत, बोले- राम मंदिर को बदनाम करने की साजिश

Tue, 04 Aug 2026 08:02 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 04 Aug 2026 08:02 PM IST
सार

महंत शशिकांत दास ने कहा कि महिपाल सिंह के आरोप पूरी तरह असत्य, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे हैं। राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र को विवादों में घसीटने और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

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UP: Mahant Shashikant Das dismisses Mahipal Singh's allegations as fabricated
महंंत शशिकांत दास। - फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह की ओर से रामकोट स्थित मंदिर के बाहर बनाए गए एल्यूमिनियम और शीशे के केबिनों के भुगतान को लेकर लगाए गए आरोपों पर महंत शशिकांत दास ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और राम मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश करार दिया।

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महिपाल सिंह ने एसआईटी को भेजे अपने ई-मेल में आरोप लगाया था कि करीब तीन लाख रुपये लागत वाले तीन एल्यूमिनियम और शीशे के केबिनों के लिए 17 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। उनका यह भी आरोप था कि यह कार्यालय शशिकांत दास को ऑब्लाइज करने के लिए बनाया गया, जबकि जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर और रंगमहल में ट्रस्ट को निशुल्क कार्यालय उपलब्ध था।
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इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत शशिकांत दास ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह असत्य, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे हैं। राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र को विवादों में घसीटने और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने जिस समय जहां आवश्यकता महसूस की, वहीं कार्यालय संचालित किया। किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने या खुश करने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया। ट्रस्ट कार्यालय के लिए कहीं जगह नहीं मिल रही थी।

एक मंदिर ने तो उनसे कार्यालय स्थापित करने के लिए मोटी रकम भी मांगी थी। जब उन्हें पता चला कि कार्यालय के लिए ट्रस्ट को कहीं जगह नहीं मिल रही है तो उन्होंने राम कचहरी मंदिर के आगे का हिस्सा निशुल्क कार्यालय के लिए दिया था। जिस व्यक्ति ने आरोप लगाए हैं, वह पहले संबंधित संस्थाओं के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करे। बिना प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना केवल सनसनी फैलाने की कोशिश है। महंत शशिकांत दास ने कहा कि महिपाल सिंह की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में व्यक्तिगत आरोपों के जरिये उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महिपाल ने एसआईटी को भेजी रिपोर्ट में लगाए हैं कई गंभीर आरोप

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने मंडलायुक्त लखनऊ को भेजे ई-मेल में आरोप लगाया है कि राम मंदिर में दान, चढ़ावे और आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि एक मुकुट गायब हो गया था, लेकिन संदिग्ध लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया और कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई। महिपाल ने आरोप लगाया कि रामलला के लिए 150 किलो चांदी भेजकर झूला बनवाया गया, लेकिन तैयार झूला केवल 85 किलो का आया।

भरतकुटी में बिना रसीद प्राप्त निधि संग्रह की राशि चोरी होने का भी आरोप लगाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गणना के दौरान बैंक में कम राशि का वाउचर भरवाकर धन का गबन किया जाता था तथा इसकी जानकारी देने पर उन्हें गणना कार्य से हटा दिया गया।

ट्रस्ट की निधि के दुरुपयोग और फर्जी मानदेय भुगतान का भी आरोप उन्होंने लगाया है। दावा किया कि निर्माण करने वाली फर्मों के भुगतान रोके गए, बाद में बिल बढ़वाकर भुगतान किए गए तथा कुछ असत्यापित बिलों का भी भुगतान हुआ। निशुल्क उपलब्ध पत्थरों के बजाय कम गुणवत्ता वाले पत्थर ऊंचे दाम पर खरीदे गए।

विवादित मठ-मंदिर और संपत्तियां ऐसे लोगों से खरीदी गईं जिनका वैध कब्जा नहीं था, जिससे ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। महिपाल ने दावा किया कि ट्रस्ट गठन के समय मंदिर निर्माण का अनुमानित बजट 800 करोड़ रुपये था, जबकि अब 2200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। वीआईपी दर्शन, वाहनों की एंट्री, प्रसाद और शृंगार के खर्चों में भी अनियमितताएं हुईं। शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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