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Ayodhya News: 48 फीट पीछे खिसकाई गई दो मंजिला इमारत
Tue, 23 Jun 2026 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:06 AM IST
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16-अमानीगंज में आधुनिक तकनीक से खिसकाया जा रहा मकान- संवाद
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अमानीगंज। तकनीक इस कदर बढ़ गई कि अब घर भी चलने लगें हैं। क्षेत्र के महुआ पूरे भक्तिन गांव में एक दो मंजिला इमारत को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर तीन महीने में सड़क से 48 फीट पीछे खिसकाया गया। भवन को अभी 30 फीट और खिसकाया जाना है।
भवन मालिक डॉ. अली हसन ने बताया कि सड़क से सटी करीब चार हजार वर्ग फीट में बनी उनकी दो मंजिला इमारत चौरासी कोसी परिक्रमा पथ की जद में आ रही थी। इससे भवन को नुकसान की आशंका थी। ऐसे में उन्होंने मकान शिफ्टिंग करने वाली हरियाना की न्यूटन ग्रुप कंपनी से संपर्क किया। कंपनी के इंजीनियरों ने अप्रैल में शिफ्टिंग का काम शुरू किया। बाइस जून तक लगभग 48 फीट तक खिसका दिया। काम कर रहे इंजीनियर ने बताया कि अभी 30 फीट और खिसकाना है जिसमें एक महीने तक का समय लग सकता है। शिफ्टिंग का काम करा रहे मुकेश कुमार ने बताया कि इमारत को शिफ्ट करने के लिए बीम के नीचे से कटिंग कर उसे विशेष हाइड्रोलिक जैक के सहारे उठाया जाता है।
इन जैक में पहिये लगे होते हैं, जिनकी मदद से पूरी बिल्डिंग धीरे-धीरे पीछे धकेली जाती है। इस प्रक्रिया में 20 मजदूर सक्रिय रहते हैं। बीम के नीचे कटिंग करने, जैक लगाने आदि तकनीकी तैयारी में अधिक समय लगता है। एक बार में तकरीबन छह से सात फीट तक खिसकाया जाता है। भवन स्वामी ने बताया कि भवन शिफ्ट करने के लिए प्रति वर्ग फीट चार सौ रुपये में ठेका दिया गया है। इमारत की शिफ्टिंग से संबंधित पूरी जिम्मेदारी कंपनी की है इसके लिए बाकायदा भवन मालिक से अनुबंध भी किया गया है। चार हजार स्क्वायर फीट में बने भवन को 80 फीट की दूरी पर शिफ्टिंग करने में लगभग सोलह लाख रुपये का खर्च आएगा।
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भवन मालिक डॉ. अली हसन ने बताया कि सड़क से सटी करीब चार हजार वर्ग फीट में बनी उनकी दो मंजिला इमारत चौरासी कोसी परिक्रमा पथ की जद में आ रही थी। इससे भवन को नुकसान की आशंका थी। ऐसे में उन्होंने मकान शिफ्टिंग करने वाली हरियाना की न्यूटन ग्रुप कंपनी से संपर्क किया। कंपनी के इंजीनियरों ने अप्रैल में शिफ्टिंग का काम शुरू किया। बाइस जून तक लगभग 48 फीट तक खिसका दिया। काम कर रहे इंजीनियर ने बताया कि अभी 30 फीट और खिसकाना है जिसमें एक महीने तक का समय लग सकता है। शिफ्टिंग का काम करा रहे मुकेश कुमार ने बताया कि इमारत को शिफ्ट करने के लिए बीम के नीचे से कटिंग कर उसे विशेष हाइड्रोलिक जैक के सहारे उठाया जाता है।
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इन जैक में पहिये लगे होते हैं, जिनकी मदद से पूरी बिल्डिंग धीरे-धीरे पीछे धकेली जाती है। इस प्रक्रिया में 20 मजदूर सक्रिय रहते हैं। बीम के नीचे कटिंग करने, जैक लगाने आदि तकनीकी तैयारी में अधिक समय लगता है। एक बार में तकरीबन छह से सात फीट तक खिसकाया जाता है। भवन स्वामी ने बताया कि भवन शिफ्ट करने के लिए प्रति वर्ग फीट चार सौ रुपये में ठेका दिया गया है। इमारत की शिफ्टिंग से संबंधित पूरी जिम्मेदारी कंपनी की है इसके लिए बाकायदा भवन मालिक से अनुबंध भी किया गया है। चार हजार स्क्वायर फीट में बने भवन को 80 फीट की दूरी पर शिफ्टिंग करने में लगभग सोलह लाख रुपये का खर्च आएगा।
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