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Ayodhya News: दवा की ओवरडोज लेकर आई महिला की बचाई जान
Sun, 08 Mar 2026 08:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 08 Mar 2026 08:41 PM IST
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2-स्वस्थ होने के बाद चिकित्सकों के साथ मौजूद मरीज।-मेडिकल कॉलेज
अयोध्या। फेनोबार्बिटोन टैबलेट की ओवरडोज लेकर मरणासन्न हालत में आई महिला की मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने जान बचा ली। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा की टीम ने लगभग एक सप्ताह के जटिल इलाज के बाद शनिवार को उसे डिस्चार्ज किया है। परिजनों ने पूरी टीम के प्रति आभार जताया है।
मूलरूप से कासगंज निवासी 26 साल की एक महिला का 25 फरवरी को पति से विवाद हो गया था। 26 फरवरी की दोपहर लगभग 12:50 बजे परिजन उसे बेहोशी की हालत में लेकर मेडिकल कॉलेज दर्शननगर आए। परिजनों के अनुसार महिला ने 25 फरवरी की रात लगभग आठ बजे मिर्गी का दौरा पड़ने पर दी जाने वाली दवा फेनोबार्बिटोन के लगभग 70-80 टैबलेट खा लिए थे। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा की टीम ने मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कराकर नली लगाई।
एक्टिवेटेड चारकोल से पेट की सफाई करके लगातार तीन दिन तक दो बार कार्बोनेट देकर जबरन मूत्रवर्धक क्रिया तेज कराई गई। इस प्रक्रिया में मरीज को चार से पांच लीटर पेशाब कराई गई, जिससे उसकी हालत में सुधार होने लगा तो हीमोडायलिसिस प्लान किया गया। 28 फरवरी को पहली डायलिसिस के बाद मरीज में और सुधार होने पर एक मार्च को दूसरी बार हीमोडायलिसिस की गई तो मरीज पूरी तरह होश में आ गयाश
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दूसरी डायलिसिस के बाद मरीज को होश आ गया तो दो मार्च को उसकी सांस नली हटाई गई। इसके बाद मरीज के लक्षण बेहतर नजर आने पर शनिवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि अब मरीज की हालत बेहतर और खतरे से बाहर है। इलाज करने वाली टीम में उनके अलावा डॉ. शशि कुमार वर्मा, डॉ. शशिकांत शुक्ला, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. शुभम प्रकाश, डॉ. सक्षम भाटिया की टीम शामिल थी।
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मूलरूप से कासगंज निवासी 26 साल की एक महिला का 25 फरवरी को पति से विवाद हो गया था। 26 फरवरी की दोपहर लगभग 12:50 बजे परिजन उसे बेहोशी की हालत में लेकर मेडिकल कॉलेज दर्शननगर आए। परिजनों के अनुसार महिला ने 25 फरवरी की रात लगभग आठ बजे मिर्गी का दौरा पड़ने पर दी जाने वाली दवा फेनोबार्बिटोन के लगभग 70-80 टैबलेट खा लिए थे। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा की टीम ने मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कराकर नली लगाई।
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एक्टिवेटेड चारकोल से पेट की सफाई करके लगातार तीन दिन तक दो बार कार्बोनेट देकर जबरन मूत्रवर्धक क्रिया तेज कराई गई। इस प्रक्रिया में मरीज को चार से पांच लीटर पेशाब कराई गई, जिससे उसकी हालत में सुधार होने लगा तो हीमोडायलिसिस प्लान किया गया। 28 फरवरी को पहली डायलिसिस के बाद मरीज में और सुधार होने पर एक मार्च को दूसरी बार हीमोडायलिसिस की गई तो मरीज पूरी तरह होश में आ गयाश
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दूसरी डायलिसिस के बाद मरीज को होश आ गया तो दो मार्च को उसकी सांस नली हटाई गई। इसके बाद मरीज के लक्षण बेहतर नजर आने पर शनिवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि अब मरीज की हालत बेहतर और खतरे से बाहर है। इलाज करने वाली टीम में उनके अलावा डॉ. शशि कुमार वर्मा, डॉ. शशिकांत शुक्ला, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. शुभम प्रकाश, डॉ. सक्षम भाटिया की टीम शामिल थी।