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Ayodhya News: अनुसंधान से दूर होगी कृषि की चुनौतियां
Mon, 06 Oct 2025 10:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 06 Oct 2025 10:41 PM IST
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29- कृषि विश्वविद्यालय में जल भरो से पूर्व छात्र सम्मेलन का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि व कुलपति
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कुमारगंज। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डाॅ. बसंत राम ने कहा कि पूर्व छात्र संगठन और विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलकर प्रगति के बारे में अपना अनुभव साझा करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के मध्य सशक्त समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
पूर्व कुलपति सोमवार को पूर्व छात्र सम्मेलन के अवसर पर विश्वविद्यालय के एग्री बिजनेस मैनेजमेंट के प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मेलन के दौरान जलवायु-स्मार्ट कृषि : 2047 तक खाद्य व पोषण सुरक्षा के मार्ग विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति डाॅ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान ने सदैव देश की कृषि उन्नति में योगदान दिया है। उन्होंने ‘सरयू-52’ धान किस्म के विकास की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के हित में उत्कृष्ट काम किए हैं।
विशिष्ट अतिथि पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंबरीश सिंह ने कहा कि यह बैठक न केवल विश्वविद्यालय की स्मृतियों को जीवंत करती है, बल्कि विकसित भारत 2047 जैसे दूरदर्शी लक्ष्य पर चिंतन-मनन का भी मंच प्रदान करती है। पूर्व अधिष्ठाता डाॅ. आरके पाठक ने भी विचार प्रस्तुत किए।
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इस दौरान पूर्व छात्रों ने भारत में मीठे पानी की मछलियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, कृषि अनुसंधान में बौद्धिक संपदा व उसका प्रबंधन, आजादी का अमृत महोत्सव मनाने में वैज्ञानिक बिरादरी की भूमिका और प्राकृतिक व जैविक खेती विषय पर चर्चा की। इस दौरान बीज व प्रक्षेत्र के संयुक्त निदेशक डाॅ. एससी विमल, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. डीके सिंह, डाॅ. शंभू प्रसाद व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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पूर्व कुलपति सोमवार को पूर्व छात्र सम्मेलन के अवसर पर विश्वविद्यालय के एग्री बिजनेस मैनेजमेंट के प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मेलन के दौरान जलवायु-स्मार्ट कृषि : 2047 तक खाद्य व पोषण सुरक्षा के मार्ग विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति डाॅ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान ने सदैव देश की कृषि उन्नति में योगदान दिया है। उन्होंने ‘सरयू-52’ धान किस्म के विकास की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के हित में उत्कृष्ट काम किए हैं।
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विशिष्ट अतिथि पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंबरीश सिंह ने कहा कि यह बैठक न केवल विश्वविद्यालय की स्मृतियों को जीवंत करती है, बल्कि विकसित भारत 2047 जैसे दूरदर्शी लक्ष्य पर चिंतन-मनन का भी मंच प्रदान करती है। पूर्व अधिष्ठाता डाॅ. आरके पाठक ने भी विचार प्रस्तुत किए।
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इस दौरान पूर्व छात्रों ने भारत में मीठे पानी की मछलियों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, कृषि अनुसंधान में बौद्धिक संपदा व उसका प्रबंधन, आजादी का अमृत महोत्सव मनाने में वैज्ञानिक बिरादरी की भूमिका और प्राकृतिक व जैविक खेती विषय पर चर्चा की। इस दौरान बीज व प्रक्षेत्र के संयुक्त निदेशक डाॅ. एससी विमल, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. डीके सिंह, डाॅ. शंभू प्रसाद व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।