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Ayodhya News: दो बार नहीं चेता रामकुमार, तीसरी बार स्वाहा हो गया परिवार
Fri, 10 Oct 2025 09:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 10 Oct 2025 09:28 PM IST
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31-पगलाभारी गांव में बचाव कार्य में जुटे पुलिस कर्मी व अन्य लोग।-संवाद
सतीश पाठक
अयोध्या। मौत ने रामकुमार गुप्ता को दो-दो बार चेतने का मौका दिया, लेकिन उसने सबक नहीं लिया। लिहाजा इस बार उसका पूरा परिवार स्वाहा हो गया। उसकी चिता को अग्नि देने वाला परिवार में कोई नहीं बचा तो साले ने अंतिम संस्कार किया। वहीं, नम आंखों से तीनों मासूम बच्चों को सरयू तट पर दफनाया गया।
मूलरूप से बस्ती के रहने वाले लाल बहादुर लगभग पांच दशक पूर्व पूराकलंदर के पगलाभारी में रहने लगे थे। ग्रामीणों के अनुसार वह सीधे और सरल थे। लगभग छह साल पहले उनकी मौत हो गई थी। उनका इकलौता बेटा रामकुमार आटा चक्की चलाता था और आतिशबाजी का सामान बेचता था।
वर्ष 2023 में दीपावली से संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में आग लगी थी, जिसमें उसकी मां शिवपता लगभग 60% जल गई थीं। परिवार के अन्य लोग बाल-बाल बच गए थे। ग्रामीणों के अनुसार उस समय भी पटाखा बनाते समय हादसा हुआ था। इस घटना से उसने सबक नहीं लिया। इसके बाद 13 अप्रैल, 2024 को हुए धमाके में पूरा मकान गिर गया था। इस हादसे में चक्की पर आटा लेने आई गांव के रामकुमार कोरी की बेटी प्रियंका (19) की मौके पर मौत हो गई। धमाके में घायल मां शिवपता (65) की अगले दिन और छठवें दिन उसकी पत्नी बिंदु की मौत हो गई थी। इस घटना में गंभीर रूप से झुलसा रामकुमार लंबे इलाज के बाद अपने तीनों बच्चों को लेकर वापस लौटा तो अपनी रिश्तेदारी में चला गया। वहां से लौटने पर ग्रामीणों ने गांव के अंदर मकान बनाने का विरोध किया तो उसने गांव के बाहर सड़क पर ही जमीन खरीदकर घर बनवाया। उसी में वह बच्चों संग रहने लगा। अपनी आदतों में सुधार न करने से इस बार भी वह विस्फोट का शिकार हुआ, जिसमें उसका पूरा परिवार समाप्त हो गया।
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नवंबर-दिसंबर तक वंदना के शादी की थी तैयारी
-रामकुमार की पहली पत्नी बिंदु की मौत के बाद मायके वालों ने उसकी साली वंदना को तीनों बच्चों की देखरेख के लिए भेज दिया। वह मां की तरह बच्चों की देखभाल करती थी। बाद में परिजनों की राय पर वह रामकुमार से शादी करने को राजी हो गई थी। वंदना के भाई आलोक ने बताया कि नवंबर-दिसंबर तक उनकी शादी कराने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही सब कुछ बर्बाद हो गया।
साले ने लगाई चिता में आग
जमथरा श्मशान घाट पर रामकुमार और वंदना का अंतिम संस्कार किया गया। रामकुमार के साले आलोक ने ही दोनों की चिता में आग लगाई। आलोक ने बताया कि रामकुमार का क्रिया-कर्म अब उनके पट्टीदार करेंगे। जबकि, वंदना के सभी कर्मकांड सुल्तानपुर स्थित उनके आवास से संपन्न होंगे।
राम सजीवन के आने का पता नहीं चला कारण
बीकापुर के लुत्फाबाद बछौली निवासी मृतक राम सजीवन मजदूरी करते थे। खासतौर से राजगीर के साथ बतौर हेल्पर वह काम करते थे, लेकिन वह बीते चार दिन से घटनास्थल पर कौन सा काम करने आते थे, यह स्पष्ट नहीं हो सका।
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अयोध्या। मौत ने रामकुमार गुप्ता को दो-दो बार चेतने का मौका दिया, लेकिन उसने सबक नहीं लिया। लिहाजा इस बार उसका पूरा परिवार स्वाहा हो गया। उसकी चिता को अग्नि देने वाला परिवार में कोई नहीं बचा तो साले ने अंतिम संस्कार किया। वहीं, नम आंखों से तीनों मासूम बच्चों को सरयू तट पर दफनाया गया।
मूलरूप से बस्ती के रहने वाले लाल बहादुर लगभग पांच दशक पूर्व पूराकलंदर के पगलाभारी में रहने लगे थे। ग्रामीणों के अनुसार वह सीधे और सरल थे। लगभग छह साल पहले उनकी मौत हो गई थी। उनका इकलौता बेटा रामकुमार आटा चक्की चलाता था और आतिशबाजी का सामान बेचता था।
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वर्ष 2023 में दीपावली से संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर में आग लगी थी, जिसमें उसकी मां शिवपता लगभग 60% जल गई थीं। परिवार के अन्य लोग बाल-बाल बच गए थे। ग्रामीणों के अनुसार उस समय भी पटाखा बनाते समय हादसा हुआ था। इस घटना से उसने सबक नहीं लिया। इसके बाद 13 अप्रैल, 2024 को हुए धमाके में पूरा मकान गिर गया था। इस हादसे में चक्की पर आटा लेने आई गांव के रामकुमार कोरी की बेटी प्रियंका (19) की मौके पर मौत हो गई। धमाके में घायल मां शिवपता (65) की अगले दिन और छठवें दिन उसकी पत्नी बिंदु की मौत हो गई थी। इस घटना में गंभीर रूप से झुलसा रामकुमार लंबे इलाज के बाद अपने तीनों बच्चों को लेकर वापस लौटा तो अपनी रिश्तेदारी में चला गया। वहां से लौटने पर ग्रामीणों ने गांव के अंदर मकान बनाने का विरोध किया तो उसने गांव के बाहर सड़क पर ही जमीन खरीदकर घर बनवाया। उसी में वह बच्चों संग रहने लगा। अपनी आदतों में सुधार न करने से इस बार भी वह विस्फोट का शिकार हुआ, जिसमें उसका पूरा परिवार समाप्त हो गया।
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नवंबर-दिसंबर तक वंदना के शादी की थी तैयारी
-रामकुमार की पहली पत्नी बिंदु की मौत के बाद मायके वालों ने उसकी साली वंदना को तीनों बच्चों की देखरेख के लिए भेज दिया। वह मां की तरह बच्चों की देखभाल करती थी। बाद में परिजनों की राय पर वह रामकुमार से शादी करने को राजी हो गई थी। वंदना के भाई आलोक ने बताया कि नवंबर-दिसंबर तक उनकी शादी कराने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही सब कुछ बर्बाद हो गया।
साले ने लगाई चिता में आग
जमथरा श्मशान घाट पर रामकुमार और वंदना का अंतिम संस्कार किया गया। रामकुमार के साले आलोक ने ही दोनों की चिता में आग लगाई। आलोक ने बताया कि रामकुमार का क्रिया-कर्म अब उनके पट्टीदार करेंगे। जबकि, वंदना के सभी कर्मकांड सुल्तानपुर स्थित उनके आवास से संपन्न होंगे।
राम सजीवन के आने का पता नहीं चला कारण
बीकापुर के लुत्फाबाद बछौली निवासी मृतक राम सजीवन मजदूरी करते थे। खासतौर से राजगीर के साथ बतौर हेल्पर वह काम करते थे, लेकिन वह बीते चार दिन से घटनास्थल पर कौन सा काम करने आते थे, यह स्पष्ट नहीं हो सका।

31-पगलाभारी गांव में बचाव कार्य में जुटे पुलिस कर्मी व अन्य लोग।-संवाद