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Ayodhya News: राम भक्त ले चला रे राम की निशानी...राम मंदिर में गूंजी धुन

Sun, 22 Feb 2026 10:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sun, 22 Feb 2026 10:51 PM IST
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Ram devotee took away Ram's sign...the tune echoed in the Ram temple
38- राम मंदिर परिसर में घोष वादन करते संघ के स्वयंसेवक- ट्रस्ट
अयोध्या। रामनगरी में रविवार को भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीरामार्चनम् कार्यक्रम के अंतर्गत राम की पैड़ी से प्रारंभ हुआ पथ संचलन राम मंदिर पहुंचकर समाप्त हुआ। राम मंदिर में पहली बार घोष वादन “श्रीरामार्चनम्” प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा, समर्पण एवं राष्ट्रभावना को समर्पित रहा। इस घोष वादन का समापन रामायण की धुन राम भक्त ले चला रे राम की निशानी...से हुआ।
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लता चौक से सफेद गणवेश में सुसज्जित दिल्ली प्रांत से आए 108 स्वयंसेवक अनुशासित पंक्तियों में घोष वाद्य बजाते हुए आगे बढ़े। पथ संचलन विभिन्न मार्गों से होता हुआ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचा। मंदिर परिसर में घोष वादन की विशेष प्रस्तुति दी गई। ताल और स्वर के संगम ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कई श्रद्धालु मोबाइल में इस ऐतिहासिक क्षण को कैद करते नजर आए, तो कई भक्ति में लीन होकर जयघोष करते रहे। घोष दल ने राम मंदिर परिसर के ग्रीन हाउस मैदान के सामने रामलला को “श्रीरामार्चनम्” की प्रस्तुति दी। इसके बाद परकोटे के सिंह द्वार पर घोष शाखा लगाई गई। लगभग 45 मिनट की शाखा में विभिन्न रचनाओं के वादन के बाद शाखा समाप्त हुई।
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समान वेश में घोष वादकों की थाप पर एक साथ पूरे तालमेल से उठते कदम, साथ में भारतीय रागों पर आधारित स्वरलहरी संपूर्ण वातावरण को अलौकिक बनाती रही। अयोध्यावासियों ने एक तारतम्य में ऐसा अनूठा संचलन संभवतः पहली बार देखा और सजीव प्रसारण के माध्यम से पूरा संसार संघ के अनुशासन का अनूठा दृश्य देखता रहा। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, डॉक्टर चंद्रगोपाल पांडेय, शैलेंद्र शुक्ल, सुबोध मिश्र सहित करीब 300 की संख्या में स्वयं सेवक शामिल रहे।
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इनसेट



गूंजी चार प्रमुख गीतों की घोष रचनाएं



संघ के घोष वादक पारंपरिक वाद्यों से भारतीय सांगीतिक परंपरा की गरिमा सजीव करते दिखाई दिए। वाद्यों में शंख (बिगुल), शृंग (तूर्य) एवं वेणु (बांसुरी) की मनोहारी रचनाएं (स्वर) और आनक (छोटा ड्रम) की ओजस्वी एवं उत्साहवर्धक प्रस्तुतियां जीवंत होती रहीं। कार्यक्रम में चार प्रमुख गीतों की घोष रचनाएं वीर सावरकर रचित “जयस्तुते”, “राम स्तुति”, “राम भक्त ले चला रे राम की निशानी” व “श्रीराम चंद्रकृपालु भजमन” वातावरण को प्रेरणादायी व भक्तिमय बनाता रहा।


बलिदानी कारसेवकों को दी स्वरांजलि
रागों के भाव बदले वीणा चौक पर आकर। यहां बलिदानी कारसेवकों और स्वरसाम्राज्ञी लता जी को स्वरांजलि समर्पित किया। यहां से संचलन करते हनुमानगढ़ी पहुंचे घोष दल ने पवन पुत्र का अभिनंदन किया। इससे आगे रामपथ पर लगभग 10 मिनट रुक कर स्थिरवाद किया गया। संपूर्ण संचलन में वादक दल जहां से निकला उस मार्ग के दुकानदार व राहगीर अपने स्थान पर खड़े होकर मानो वादकों का अभिनंदन कर रहे हों। सभी टकटकी लगाए एक लय और धुन में वाद्य बजा रहे घोष दल को निहारते रहे।
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