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Ayodhya News: अभिभावकों और विद्यार्थियों की अब नहीं कर सकेंगे अनदेखी
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में अब अफसर और कर्मचारी अभिभावकों व विद्यार्थियों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। विश्वविद्यालय में काम से आने वालों की समस्या का समाधान हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। इतना ही नहीं मोबाइल से भी संपर्क करने पर निस्तारण की प्रकिया शुरू करनी होगी।
विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 700 महाविद्यालय अयोध्या के साथ ही अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा और बहराइच में संचालित हैं। ऐसे में विभिन्न कार्यों के लिए छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को लंबी दूरी तय करते हुए विश्वविद्यालय आना पड़ता है। कई बार अफसर और कर्मचारी मिलते नहीं हैं और यदि मिलते भी हैं तो समस्याओं के निस्तारण के प्रति गंभीर नहीं होते हैं। ऐसे में भागदौड़ करने के बाद उन्हें निराश होकर वापस जाना पड़ता है और दोबारा आने के लिए विवश होना पड़ता है।
पिछले कई दिनों से कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं। कुलपति ने इसे गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव विनय कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से इस प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए अफसरों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने की अपेक्षा की। इसके बाद कुलसचिव की ओर से सभी अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्रधान सहायकों और कर्मचारियों के लिए आदेश जारी किया गया है।
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कुलसचिव की ओर से तत्काल प्रभाव से लागू किए गए आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय आने वाले और मोबाइल से संपर्क करने वाले सभी अभिभावकाें और छात्र-छात्राओं की समस्याओं को सहानुभूतिपूर्वक सुनते हुए उनका निस्तारण तत्परता से किया जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस बारे में कुलसचिव ने अमर उजाला को बताया कि कुलपति की मंशा है कि अभिभावकाें और छात्र-छात्राओं को किसी भी सूरत में अपने काम के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि किसी अफसर या कर्मचारी से इस तरह की समस्या होती है तो अभिभावक व विद्यार्थी सीधे उनसे संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 700 महाविद्यालय अयोध्या के साथ ही अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा और बहराइच में संचालित हैं। ऐसे में विभिन्न कार्यों के लिए छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को लंबी दूरी तय करते हुए विश्वविद्यालय आना पड़ता है। कई बार अफसर और कर्मचारी मिलते नहीं हैं और यदि मिलते भी हैं तो समस्याओं के निस्तारण के प्रति गंभीर नहीं होते हैं। ऐसे में भागदौड़ करने के बाद उन्हें निराश होकर वापस जाना पड़ता है और दोबारा आने के लिए विवश होना पड़ता है।
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पिछले कई दिनों से कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं। कुलपति ने इसे गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव विनय कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से इस प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए अफसरों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने की अपेक्षा की। इसके बाद कुलसचिव की ओर से सभी अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्रधान सहायकों और कर्मचारियों के लिए आदेश जारी किया गया है।
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कुलसचिव की ओर से तत्काल प्रभाव से लागू किए गए आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय आने वाले और मोबाइल से संपर्क करने वाले सभी अभिभावकाें और छात्र-छात्राओं की समस्याओं को सहानुभूतिपूर्वक सुनते हुए उनका निस्तारण तत्परता से किया जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस बारे में कुलसचिव ने अमर उजाला को बताया कि कुलपति की मंशा है कि अभिभावकाें और छात्र-छात्राओं को किसी भी सूरत में अपने काम के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि किसी अफसर या कर्मचारी से इस तरह की समस्या होती है तो अभिभावक व विद्यार्थी सीधे उनसे संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।