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Ayodhya News: रावत मंदिर के महंत की संदिग्ध हालात में मौत
Sun, 12 Oct 2025 08:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 12 Oct 2025 08:40 PM IST
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15- मृतक महंत राम मिलन दास
अयोध्या। कोतवाली अयोध्या अंतर्गत रामघाट चौराहा स्थित रावत मंदिर के महंत राम मिलन दास (48) की शनिवार की देर शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई। खाना खाने के बाद अचानक उनके मुंह से झाग निकलने लगा। शिष्य उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना में जहर देकर महंत की हत्या करने की चर्चा हो रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ह्रदयगति रुकने से मौत की पुष्टि हुई है।
महंत भोजन आदि बनाने के लिए लवकुशनगर निवासी शकुंतला (38) को सेविका के रूप में रखा था। वह 12 साल से उनकी सेवा कर रही थी। सेविका व एक अन्य शिष्य को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। महंत राम मिलन के एक शिष्य ने बताया कि शनिवार की शाम करीब 7:30 बजे मंदिर में आरती में शामिल हुए, तब तक वह ठीक थे। उन्होंने भगवान को लगा भोग ग्रहण किया। इसके बाद सेविका बाहर निकली और चिल्लाते हुए बताया कि महंत जी की तबीयत खराब हो गई है, मुंह से झाग निकल रहा है व हाथ काला हो गया। आनन-फानन में शिष्य उन्हें श्रीराम अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, एसएसपी डॉ़ गौरव ग्रोवर, एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी अस्पताल व मंदिर पहुंचे और घटना के संबंध में पूछताछ की। बावन मंदिर के महंत वैदेही बल्लभ शरण, दिगंबर अखाड़ा के महंत रामलखन दास, महंत सुदर्शन दास भी श्रीराम अस्पताल पहुंचे थे। सभी संतों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। कोतवाली प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि कोई तहरीर नहीं मिली है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ह्रदयगति रुकने से मौत की बात सामने आई है।
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2013 में बने थे मंदिर के महंत
स्वर्गीय महंत कुशीनगर जिले के बड़हरा गांव के रहने वाले थे। वह बाल्यकाल में ही अयोध्या आ गए थे। वर्ष 2013 में मंदिर के पूर्व महंत रामदास कोकिल की मृत्यु के बाद उन्हें महंत बनाया गया था। मंदिर में उनके अलावा उनके भाई कपिल देव यादव, तीन भतीजे पवन यादव, अमन यादव और सुनील यादव, एक पुजारी व कुछ शिष्य रहते थे।
10 बिस्वे में मंदिर, 30 कमरे की धर्मशाला
-रामघाट चौराहा स्थित यह मंदिर करीब 10 बिस्वे में बना है। इसके विशाल प्रांगण में मंदिर के अलावा करीब 30 कमरे का एक धर्मशाला भी बना हुआ है। रामघाट कार्यशाला के ठीक सामने स्थित होने के कारण यहां श्रद्धालु खूब आते हैं और धर्मशाला से अच्छी आय होती है। मंदिर के नाम हाईवे पर सूर्या पैलेस के बगल करीब 10 बीघे जमीन है, दो वर्ष पूर्व इसमें से कुछ जमीन उन्होंने करीब सात करोड़ रुपये में बेची थी। हाली ही में भी कुछ जमीन बेचने की बात सामने आ रही है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
मंदिर आंदोलन से जुड़े थे महंत के गुरु
मृतक महंत राम मिलन दास के गुरु व मंदिर के पूर्वाचार्य रामदास कोकिल का राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान था। वह रामचरित मानस के विख्यात प्रवक्ता भी थे। सीएम योगी आदित्यनाथ भी कई बार उनके दर्शन करने के लिए रावत मंदिर पहुंचे थे। बताया जाता है कि रावत मंदिर को गोरखपुर के रावत भीटी गांव के लोगों ने बनवाया था। इसलिए, इसका नाम रावत मंदिर पड़ा था।
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महंत भोजन आदि बनाने के लिए लवकुशनगर निवासी शकुंतला (38) को सेविका के रूप में रखा था। वह 12 साल से उनकी सेवा कर रही थी। सेविका व एक अन्य शिष्य को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। महंत राम मिलन के एक शिष्य ने बताया कि शनिवार की शाम करीब 7:30 बजे मंदिर में आरती में शामिल हुए, तब तक वह ठीक थे। उन्होंने भगवान को लगा भोग ग्रहण किया। इसके बाद सेविका बाहर निकली और चिल्लाते हुए बताया कि महंत जी की तबीयत खराब हो गई है, मुंह से झाग निकल रहा है व हाथ काला हो गया। आनन-फानन में शिष्य उन्हें श्रीराम अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे, एसएसपी डॉ़ गौरव ग्रोवर, एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी अस्पताल व मंदिर पहुंचे और घटना के संबंध में पूछताछ की। बावन मंदिर के महंत वैदेही बल्लभ शरण, दिगंबर अखाड़ा के महंत रामलखन दास, महंत सुदर्शन दास भी श्रीराम अस्पताल पहुंचे थे। सभी संतों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। कोतवाली प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि कोई तहरीर नहीं मिली है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ह्रदयगति रुकने से मौत की बात सामने आई है।
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2013 में बने थे मंदिर के महंत
स्वर्गीय महंत कुशीनगर जिले के बड़हरा गांव के रहने वाले थे। वह बाल्यकाल में ही अयोध्या आ गए थे। वर्ष 2013 में मंदिर के पूर्व महंत रामदास कोकिल की मृत्यु के बाद उन्हें महंत बनाया गया था। मंदिर में उनके अलावा उनके भाई कपिल देव यादव, तीन भतीजे पवन यादव, अमन यादव और सुनील यादव, एक पुजारी व कुछ शिष्य रहते थे।
10 बिस्वे में मंदिर, 30 कमरे की धर्मशाला
-रामघाट चौराहा स्थित यह मंदिर करीब 10 बिस्वे में बना है। इसके विशाल प्रांगण में मंदिर के अलावा करीब 30 कमरे का एक धर्मशाला भी बना हुआ है। रामघाट कार्यशाला के ठीक सामने स्थित होने के कारण यहां श्रद्धालु खूब आते हैं और धर्मशाला से अच्छी आय होती है। मंदिर के नाम हाईवे पर सूर्या पैलेस के बगल करीब 10 बीघे जमीन है, दो वर्ष पूर्व इसमें से कुछ जमीन उन्होंने करीब सात करोड़ रुपये में बेची थी। हाली ही में भी कुछ जमीन बेचने की बात सामने आ रही है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
मंदिर आंदोलन से जुड़े थे महंत के गुरु
मृतक महंत राम मिलन दास के गुरु व मंदिर के पूर्वाचार्य रामदास कोकिल का राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान था। वह रामचरित मानस के विख्यात प्रवक्ता भी थे। सीएम योगी आदित्यनाथ भी कई बार उनके दर्शन करने के लिए रावत मंदिर पहुंचे थे। बताया जाता है कि रावत मंदिर को गोरखपुर के रावत भीटी गांव के लोगों ने बनवाया था। इसलिए, इसका नाम रावत मंदिर पड़ा था।

15- मृतक महंत राम मिलन दास