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Ayodhya News: श्रीराम के 1000 वर्षों की वंश परंपरा पर होगा गहन शोध
Tue, 11 Feb 2025 09:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 11 Feb 2025 09:45 PM IST
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अयोध्या। रामनगरी में भगवान राम की वंश परंपरा पर शोध की तैयारी हो रही है। अयोध्या में महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जो भारतीय संस्कृति, रामायण साहित्य और वैदिक शिक्षा के अध्ययन को नया आयाम देगा। यह विश्वविद्यालय न केवल भगवान राम के जीवन और उनकी 1000 वर्षों की वंश परंपरा पर शोध करेगा, बल्कि पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा को भी साथ लेकर चलेगा। मार्च 2025 से शोध का काम शुरू हो जाएगा।
21 एकड़ में फैले रामायण विश्वविद्यालय का परिसर भव्य और अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें रघुकुल भवन (प्रशासनिक भवन), वशिष्ठ भवन (लाइब्रेरी), शोध केंद्र और कई अन्य संरचनाएं होंगी। प्रवेश द्वारों के नाम तुलसी द्वार और वाल्मीकि द्वार रखे गए हैं। राम भवन, लक्ष्मण भवन, भारत भवन और शत्रुघ्न भवन बनाए जा रहे हैं। यहां आधुनिक क्लास रूम, सेमिनार हॉल और शोध सुविधाएं उपलब्ध होंगी। छात्रावासों को जानकी निवास और हनुमत निवास नाम दिया गया है। इसके अलावा एक विशाल सभागार भी बनाया जा रहा है, जहां शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
वर्तमान में श्रीराम के जीवन के केवल 100 वर्षों की कहानी से परिचित हैं, लेकिन इस विश्वविद्यालय के माध्यम से उनकी वंश परंपरा और उनके प्रभाव की गहरी समझ को उजागर करने का प्रयास होगा। भगवान राम के 1000 वर्षों के जीवन काल का अध्ययन भारतीय समाज को एक नया दृष्टिकोण देगा। महर्षि महेश योगी के इस सपने के साकार होने से अयोध्या विशेष ज्ञान का केंद्र बनेगा।
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21 एकड़ में फैले रामायण विश्वविद्यालय का परिसर भव्य और अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें रघुकुल भवन (प्रशासनिक भवन), वशिष्ठ भवन (लाइब्रेरी), शोध केंद्र और कई अन्य संरचनाएं होंगी। प्रवेश द्वारों के नाम तुलसी द्वार और वाल्मीकि द्वार रखे गए हैं। राम भवन, लक्ष्मण भवन, भारत भवन और शत्रुघ्न भवन बनाए जा रहे हैं। यहां आधुनिक क्लास रूम, सेमिनार हॉल और शोध सुविधाएं उपलब्ध होंगी। छात्रावासों को जानकी निवास और हनुमत निवास नाम दिया गया है। इसके अलावा एक विशाल सभागार भी बनाया जा रहा है, जहां शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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वर्तमान में श्रीराम के जीवन के केवल 100 वर्षों की कहानी से परिचित हैं, लेकिन इस विश्वविद्यालय के माध्यम से उनकी वंश परंपरा और उनके प्रभाव की गहरी समझ को उजागर करने का प्रयास होगा। भगवान राम के 1000 वर्षों के जीवन काल का अध्ययन भारतीय समाज को एक नया दृष्टिकोण देगा। महर्षि महेश योगी के इस सपने के साकार होने से अयोध्या विशेष ज्ञान का केंद्र बनेगा।
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