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समृद्ध और विविध विरासत है भारतीय ज्ञान परंपरा : कुलपति

Mon, 08 Dec 2025 10:04 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Dec 2025 10:04 PM IST
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Indian knowledge tradition is a rich and diverse heritage: Vice Chancellor
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक समृद्ध और विविध विरासत है, जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। यह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि विज्ञान, कला, सामाजिक व्यवस्था और जीवन दर्शन के सभी पहलुओं को समाहित करती है। यह परंपरा केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं देती, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, आत्मविश्वास, अनुशासन और चरित्र निर्माण पर विशेष बल देती है।
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कुलपति विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में इंटरनेशनल साइंस कम्युनिटी एसोसिएशन की ओर से भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन सोमवार को बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का लक्ष्य केवल व्यक्तिगत विकास नहीं, बल्कि समस्त मानवता का कल्याण है। यह सह अस्तित्व सबके साथ रहने और सर्वे भवंतु सुखिनः के भाव पर आधारित है। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आज के विज्ञान से कहीं ज्यादा समृद्ध और उन्नत थी। पूरे ब्रह्मांड का गूढ़ ज्ञान हमारे धर्म ग्रंथों में छिपा है।
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बोत्सवाना विश्वविद्यालय के शिक्षाविद् प्रो. गिरजा शंकर सिंह ने कहा कि विज्ञान, तकनीक, व कृषि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख हिस्सा रहा है। महान शिक्षाविद पं. महामना मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना इसी उद्देश्य को लेकर की थी, जो आज वैश्विक पटल पर स्वयं को सिद्ध कर रहा है। नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय की प्रो. सुशीला देवी श्रेष्ठ ने भी विचार व्यक्त किए।
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इस अवसर पर मिजोरम के रिसर्चर प्रो. दयानंद, गुजरात विश्वविद्यालय की प्रो. संगीता शर्मा, महाराष्ट्र की डॉ. कविता गौर, आरा विश्वविद्यालय, बिहार के प्रो. विनय मिश्र व उत्तराखंड की डॉ. स्तुति गुप्ता को विशिष्ट शैक्षिक उपलब्धि के लिए इंटरनेशनल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कॉन्फ्रेंस की सोविनियर व एक पुस्तक का विमोचन किया गया। दो दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन 20 तकनीकी सत्रों में किया जाएगा। इस कांफ्रेंस में 230 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं।
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