{"_id":"6a662ceb3fac0261b00dc22c","slug":"fraudulent-land-leases-exposed-in-rudauli-rti-reveals-no-record-of-allotment-in-tehsil-files-ayodhya-news-c-97-1-lu11030-154818-2026-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: रुदौली में फर्जी पट्टों का खुलासा, आरटीआई से तहसील रिकॉर्ड में नहीं मिला आवंटन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: रुदौली में फर्जी पट्टों का खुलासा, आरटीआई से तहसील रिकॉर्ड में नहीं मिला आवंटन
Sun, 26 Jul 2026 09:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 26 Jul 2026 09:21 PM IST
विज्ञापन
भेलसर। रुदौली तहसील में सरकारी आवासीय पट्टों से जुड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। तहसील प्रशासन ने अपने अभिलेखों में कुछ लोगों के नाम आवंटन से इनकार किया है। आरोप है कि उन्हीं के नाम से फर्जी पट्टे की पत्रावली और सनद सिविल न्यायालय में दाखिल किए गए हैं।
ग्राम पूरे लोहरास निवासी साजिद अली ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उन्हें गाटा संख्या 530 पर आवासीय पट्टा आवंटित किया गया था। राजस्व विभाग ने सीमांकन कर उन्हें कब्जा भी दिलाया था। इसके बावजूद कुछ लोगों ने फर्जी सनद और सरकारी दस्तावेज तैयार किए। उन्होंने अधिकारियों और तत्कालीन ग्राम प्रधान के जाली हस्ताक्षर भी बनाए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिविल न्यायालय में वाद दायर कर वास्तविक अभिलेखों को चुनौती दी गई। साजिद अली का आरोप है कि यह सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की सुनियोजित साजिश है।
अधिवक्ता रामभोला तिवारी की ओर से मांगी गई सूचना में तहसील प्रशासन ने बताया कि वर्ष 2002 के अभिलेखों में गाटा संख्या 530 पर कुछ व्यक्तियों के नाम किसी भी आवासीय पट्टे का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस आधिकारिक उत्तर के बाद फर्जी पत्रावली का मामला और गंभीर हो गया है। तहसीलदार विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रकरण की जांच नायब तहसीलदार शेखर शुक्ला को सौंपी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्राम पूरे लोहरास निवासी साजिद अली ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उन्हें गाटा संख्या 530 पर आवासीय पट्टा आवंटित किया गया था। राजस्व विभाग ने सीमांकन कर उन्हें कब्जा भी दिलाया था। इसके बावजूद कुछ लोगों ने फर्जी सनद और सरकारी दस्तावेज तैयार किए। उन्होंने अधिकारियों और तत्कालीन ग्राम प्रधान के जाली हस्ताक्षर भी बनाए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिविल न्यायालय में वाद दायर कर वास्तविक अभिलेखों को चुनौती दी गई। साजिद अली का आरोप है कि यह सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की सुनियोजित साजिश है।
विज्ञापन
अधिवक्ता रामभोला तिवारी की ओर से मांगी गई सूचना में तहसील प्रशासन ने बताया कि वर्ष 2002 के अभिलेखों में गाटा संख्या 530 पर कुछ व्यक्तियों के नाम किसी भी आवासीय पट्टे का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस आधिकारिक उत्तर के बाद फर्जी पत्रावली का मामला और गंभीर हो गया है। तहसीलदार विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रकरण की जांच नायब तहसीलदार शेखर शुक्ला को सौंपी गई है।
विज्ञापन