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Ayodhya News: जैन मंदिर में भगवान भरत के 101 पुत्रों के मंदिर के खुले कपाट
Sun, 19 Jul 2026 09:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 19 Jul 2026 09:20 PM IST
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रायगंज जैन मंदिर में स्थापित भगवान भरत के पुत्रों का मंदिर।
अयोध्या। रायगंज स्थित जैन मंदिर परिसर में भगवान भरत के 101 पुत्रों को समर्पित मंदिर में अब श्रद्धालुओं के लिए नियमित दर्शन शुरू हो गए हैं। मंदिर के कपाट खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। इस मंदिर का लोकार्पण हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।
मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश रविंद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि भगवान भरत, प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र और चक्रवर्ती सम्राट थे। उनके 101 पुत्रों का उल्लेख जैन आगमों और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान भरत के पुत्रों ने धर्म, तप, त्याग और आत्मकल्याण के मार्ग को अपनाकर समाज को आदर्श जीवन का संदेश दिया। इसी गौरवशाली परंपरा को सहेजने के उद्देश्य से इस अद्वितीय मंदिर का निर्माण कराया गया है।
स्वामी रविंद्रकीर्ति ने कहा कि यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि जैन इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान भरत के वंश और उनके आदर्शों से परिचित होंगे तथा धर्म के प्रति उनकी आस्था और मजबूत होगी।
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मंदिर की भव्य स्थापत्य कला और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इससे पहले मंदिर में स्थापित भगवान ऋषभदेव और भरत की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया। प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में विधिविधान पूर्वक अभिषेक हुआ और आरती उतारी गई।
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मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश रविंद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि भगवान भरत, प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र और चक्रवर्ती सम्राट थे। उनके 101 पुत्रों का उल्लेख जैन आगमों और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान भरत के पुत्रों ने धर्म, तप, त्याग और आत्मकल्याण के मार्ग को अपनाकर समाज को आदर्श जीवन का संदेश दिया। इसी गौरवशाली परंपरा को सहेजने के उद्देश्य से इस अद्वितीय मंदिर का निर्माण कराया गया है।
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स्वामी रविंद्रकीर्ति ने कहा कि यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि जैन इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान भरत के वंश और उनके आदर्शों से परिचित होंगे तथा धर्म के प्रति उनकी आस्था और मजबूत होगी।
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मंदिर की भव्य स्थापत्य कला और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इससे पहले मंदिर में स्थापित भगवान ऋषभदेव और भरत की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया। प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में विधिविधान पूर्वक अभिषेक हुआ और आरती उतारी गई।