{"_id":"6a47c38be92bfbed7f0b611d","slug":"coaching-in-basements-banned-safety-standards-must-be-met-within-30-days-ayodhya-news-c-97-1-lu11030-153162-2026-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: बेसमेंट में कोचिंग पर रोक, 30 दिन में पूरे करने होंगे सुरक्षा मानक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: बेसमेंट में कोचिंग पर रोक, 30 दिन में पूरे करने होंगे सुरक्षा मानक
Fri, 03 Jul 2026 07:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 03 Jul 2026 07:43 PM IST
विज्ञापन
अयोध्या विकास प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित बैठक में मौजूद विधायक वेदप्रकाश, महापौर गिरीशपति त्
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने व्यावसायिक भवनों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। प्राधिकरण ने सभी संचालकों को निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए 30 दिन का समय दिया है। बेसमेंट में कोचिंग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। भवनों में संरचनात्मक बदलाव के लिए संचालकों को कुछ छूट दी गई है।
लोगों की सुविधा के लिए एक हेल्पडेस्क भी स्थापित की जाएगी।
इसके बाद प्राधिकरण मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थान, शॉपिंग मॉल और सरकारी भवनों सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सुरक्षा मानकों की जांच करेगा। एक कार्यबल निरीक्षण करेगा। आवश्यक प्रमाण पत्र परिसर में रखने होंगे, अन्यथा सीलिंग की कार्रवाई होगी। विधायक वेदप्रकाश गुप्ता ने कहा कि नियम पहले भी थे लेकिन लोग इसको हल्के में ले रहे थे। लखनऊ की घटना के बाद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो। उन्होंने बताया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय दिया गया है। एडीए उपाध्यक्ष अनुराज जैन ने कहा कि जिन भवनों में सभी मानक पूरे नहीं हो सकते, उन्हें अन्य स्थान तलाशने की मोहलत दी गई है। संरचनात्मक बदलावों के लिए कुछ दिनों की थोड़ी अतिरिक्त छूट दी गई है।
महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी प्रतिष्ठानों को सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। बैठक में सचिव राजेश कुमार मिश्रा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी एम.पी. सिंह, डीआईओएस डॉ. पवन तिवारी समेत करीब 150 लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था होगी अनिवार्य
सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्मोक और हीट डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकासी मार्ग, एग्जिट संकेत और प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य होगी। प्रत्येक 200 वर्गमीटर क्षेत्र पर अग्निशमन यंत्र रखना होगा। जहां लागू हो वहां 25 हजार लीटर क्षमता की जल टंकी की व्यवस्था करनी होगी। निकासी द्वार अंदर से बिना चाबी के बाहर खुलें और उनपर निकास संकेत हो।
ऊंची इमारतों पर विशेष नियम
15 मीटर से ऊंचे भवनों के लिए अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य है। 24 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों के लिए विशेष राष्ट्रीय भवन संहिता प्रावधान लागू होंगे। भवनों में खुला स्थान, वायु संचार और अग्निशमन वाहनों की पहुंच भी सुनिश्चित करनी होगी।
बिजली सुरक्षा पर भी फोकस
आईएसआई और बीआईएस प्रमाणित तार व फिटिंग का उपयोग अनिवार्य होगा। खुली वायरिंग प्रतिबंधित रहेगी। एसी के लिए अलग सर्किट, वार्षिक सर्विसिंग और बिजली ऑडिट का रिकॉर्ड रखना होगा।
शपथ पत्र के साथ देना होगा विवरण
भवन स्वामियों को स्वामित्व प्रमाण, भवन विवरण, नक्शे के अनुरूप निर्माण और एनओसी संबंधी जानकारी 100 रुपये के गैर न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र के साथ जमा करनी होगी।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई तय
नियमों का उल्लंघन मिलने पर पहले नोटिस जारी होगा और 7 से 15 दिन में जवाब देना होगा। इसके बाद भी कमियां दूर नहीं होने पर सीलिंग समेत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। अवैध एनओसी जारी करने वालों पर भी कार्रवाई होगी।
कोचिंग संस्थानों के लिए अलग व्यवस्था
नौ मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी। आवासीय भवनों में चल रहे संस्थानों को ‘चेंज ऑफ यूज’ की अनुमति लेनी होगी। छात्र क्षमता निर्धारित कर प्रदर्शित करनी होगी और मासिक अग्निशमन अभ्यास का रिकॉर्ड रखना होगा।
विज्ञापन
लोगों की सुविधा के लिए एक हेल्पडेस्क भी स्थापित की जाएगी।
इसके बाद प्राधिकरण मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थान, शॉपिंग मॉल और सरकारी भवनों सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सुरक्षा मानकों की जांच करेगा। एक कार्यबल निरीक्षण करेगा। आवश्यक प्रमाण पत्र परिसर में रखने होंगे, अन्यथा सीलिंग की कार्रवाई होगी। विधायक वेदप्रकाश गुप्ता ने कहा कि नियम पहले भी थे लेकिन लोग इसको हल्के में ले रहे थे। लखनऊ की घटना के बाद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो। उन्होंने बताया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय दिया गया है। एडीए उपाध्यक्ष अनुराज जैन ने कहा कि जिन भवनों में सभी मानक पूरे नहीं हो सकते, उन्हें अन्य स्थान तलाशने की मोहलत दी गई है। संरचनात्मक बदलावों के लिए कुछ दिनों की थोड़ी अतिरिक्त छूट दी गई है।
विज्ञापन
महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी प्रतिष्ठानों को सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। बैठक में सचिव राजेश कुमार मिश्रा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी एम.पी. सिंह, डीआईओएस डॉ. पवन तिवारी समेत करीब 150 लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था होगी अनिवार्य
सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्मोक और हीट डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकासी मार्ग, एग्जिट संकेत और प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य होगी। प्रत्येक 200 वर्गमीटर क्षेत्र पर अग्निशमन यंत्र रखना होगा। जहां लागू हो वहां 25 हजार लीटर क्षमता की जल टंकी की व्यवस्था करनी होगी। निकासी द्वार अंदर से बिना चाबी के बाहर खुलें और उनपर निकास संकेत हो।
ऊंची इमारतों पर विशेष नियम
15 मीटर से ऊंचे भवनों के लिए अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य है। 24 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों के लिए विशेष राष्ट्रीय भवन संहिता प्रावधान लागू होंगे। भवनों में खुला स्थान, वायु संचार और अग्निशमन वाहनों की पहुंच भी सुनिश्चित करनी होगी।
बिजली सुरक्षा पर भी फोकस
आईएसआई और बीआईएस प्रमाणित तार व फिटिंग का उपयोग अनिवार्य होगा। खुली वायरिंग प्रतिबंधित रहेगी। एसी के लिए अलग सर्किट, वार्षिक सर्विसिंग और बिजली ऑडिट का रिकॉर्ड रखना होगा।
शपथ पत्र के साथ देना होगा विवरण
भवन स्वामियों को स्वामित्व प्रमाण, भवन विवरण, नक्शे के अनुरूप निर्माण और एनओसी संबंधी जानकारी 100 रुपये के गैर न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र के साथ जमा करनी होगी।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई तय
नियमों का उल्लंघन मिलने पर पहले नोटिस जारी होगा और 7 से 15 दिन में जवाब देना होगा। इसके बाद भी कमियां दूर नहीं होने पर सीलिंग समेत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। अवैध एनओसी जारी करने वालों पर भी कार्रवाई होगी।
कोचिंग संस्थानों के लिए अलग व्यवस्था
नौ मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी। आवासीय भवनों में चल रहे संस्थानों को ‘चेंज ऑफ यूज’ की अनुमति लेनी होगी। छात्र क्षमता निर्धारित कर प्रदर्शित करनी होगी और मासिक अग्निशमन अभ्यास का रिकॉर्ड रखना होगा।