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Ayodhya News: कुलसचिव के खिलाफ जांच करने से एडीएम ने खड़े किए हाथ

Fri, 11 Apr 2025 09:22 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Apr 2025 09:22 PM IST
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ADM refused to investigate against the Registrar
अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक उमानाथ के खिलाफ अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच करने से एडीएम प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए हैं। तत्कालीन कुलपति के भी आरोपों के घेरे में होने के चलते डीएम ने शासन से उच्च स्तरीय जांच अधिकारी नियुक्त करने की सिफारिश की है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री के निर्देश के दो महीने बीतने के बाद भी जांच अधर में लटकी है। वह भी तब जब इस प्रकरण की आंच पीएमओ तक पहुंच चुकी है।
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प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग के विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी की ओर से 30 जनवरी को डीएम चंद्र विजय सिंह को पत्र भेजा गया था। इसमें आगरा के दयालबाग निवासी डॉ. अरुण कुमार दीक्षित की ओर से विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक उमानाथ पर अनियमितता और भ्रष्टाचार किए जाने की शिकायतों की जांच कर 15 दिनों के भीतर आख्या उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई थी। यह जांच आख्या शासन को अब तक भी नहीं मिल सकी है।
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जबकि जांच के लिए तय 15 दिनों की अवधि 14 फरवरी को ही पूरी हो गई थी। विशेष सचिव ने 27 मार्च को डीएम को लिखे गए अनुस्मारक पत्र में एक बार फिर से कहा कि शासन की ओर से 30 जनवरी को संदर्भित पत्र को संज्ञान में लेते हुए आख्या शीघ्र उपलब्ध कराएं। इतना ही नहीं भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ जांच में की जा रही देरी की शिकायत की है।
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इस बारे में अमर उजाला ने जब डीएम चंद्र विजय सिंह से कुलसचिव के खिलाफ जांच में किए जा रहे विलंब के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि एडीएम प्रशासन को शासन के निर्देश पर जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। एडीएम ने इस जांच को यह कहते हुए वापस कर दिया है कि आरोपी वरिष्ठ अधिकारी हैं। ऐसे में वह उनके खिलाफ जांच करने के लिए खुद को सक्षम नहीं मान रहे हैं।


जांच अधिकारी के अनुसार तत्कालीन कुलपति पर भी आरोप हैं। ऐसे में जांच अधिकारी का दायित्व किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाए। इसके बाद डीएम ने विशेष सचिव उच्च शिक्षा को पत्र लिखकर कहा है कि इस मामले में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लोग आरोपी हैं। इसलिए उनके पद के अनुरूप उनसे वरिष्ठ अफसर को जांच अधिकारी बनाया जाए। अब गेंद एक बार फिर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के पाले में है। ऐसे में कुलसचिव के खिलाफ जांच अभी तक लंबित है। जबकि 30 अप्रैल को आरोपी कुलसचिव रिटायर हो रहे हैं।
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