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Ayodhya News: अवध विवि के नवीन परिसर में स्थापित किया जाएगा पुस्तकालय
Mon, 08 Jun 2026 09:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 08 Jun 2026 09:31 PM IST
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा है कि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में भी पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। ताकि परिसर संचालित पाठ्यक्रम के छात्रों के शैक्षिक ज्ञान संवर्धन में सहायक हो सके। वह श्रीराम शोध पीठ संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन पर सोमवार को बोल रहे थे। कार्यशाला ''सार्वजनिक पुस्तकालयों में अवसंरचना प्रबंधन'' विषय पर केंद्रित है।
कुलपति ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी संस्था के सूचना केंद्र होते हैं। शोध कार्यों को पूरा करने में इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक पुस्तकालय किसी भी जीवंत समाज की चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक होते हैं। ये समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी ज्ञान का द्वार खोलते हैं। विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में 23500 ई-पुस्तकें और 13500 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल उपलब्ध हैं। यहां दो लाख से अधिक पाठ्यपुस्तकें भी मौजूद हैं।
कार्यशाला के संयोजक सिद्धार्थ शुक्ला ने बताया कि 21वीं सदी में पुस्तकालयों की परिभाषा बदल गई है। अब पुस्तकालय सामुदायिक ज्ञान केंद्र बन चुके हैं। ई-पुस्तकें, तीव्र गति इंटरनेट और क्लाउड आधारित पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली आज की बुनियादी जरूरतें हैं। पीएम उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय को अनुदान मिला है। इस योजना से पुस्तकालयों का उन्नयन किया जाएगा। कार्यशाला के पहले दिन कुल 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. सीके मिश्रा, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. फर्रूख जमाल, प्रो. गंगाराम मिश्र, प्रो. विनोद श्रीवास्तव, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. विनोद चौधरी, डॉ. अनिल सिंह, डॉ. अवनीश सिंह, योगेश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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कुलपति ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी संस्था के सूचना केंद्र होते हैं। शोध कार्यों को पूरा करने में इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक पुस्तकालय किसी भी जीवंत समाज की चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक होते हैं। ये समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी ज्ञान का द्वार खोलते हैं। विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में 23500 ई-पुस्तकें और 13500 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल उपलब्ध हैं। यहां दो लाख से अधिक पाठ्यपुस्तकें भी मौजूद हैं।
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कार्यशाला के संयोजक सिद्धार्थ शुक्ला ने बताया कि 21वीं सदी में पुस्तकालयों की परिभाषा बदल गई है। अब पुस्तकालय सामुदायिक ज्ञान केंद्र बन चुके हैं। ई-पुस्तकें, तीव्र गति इंटरनेट और क्लाउड आधारित पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली आज की बुनियादी जरूरतें हैं। पीएम उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय को अनुदान मिला है। इस योजना से पुस्तकालयों का उन्नयन किया जाएगा। कार्यशाला के पहले दिन कुल 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. सीके मिश्रा, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. फर्रूख जमाल, प्रो. गंगाराम मिश्र, प्रो. विनोद श्रीवास्तव, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. विनोद चौधरी, डॉ. अनिल सिंह, डॉ. अवनीश सिंह, योगेश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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