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Ayodhya News: राम मंदिर के पुरावशेष बताएंगे सदियों पुरानी निर्माण गाथा

Fri, 18 Sep 2026 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Fri, 18 Sep 2026 12:11 AM IST
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They deployed the government boat but forgot to provide fuel
रामकथा संग्रहालय।
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के दौरान मिले प्राचीन पुरावशेष अब शोध और अध्ययन का आधार बनेंगे। रामकथा संग्रहालय में इन पुरावशेषों को अलग गैलरी में संरक्षित और प्रदर्शित करने की तैयारी है। विस्तृत अध्ययन के बाद प्रत्येक महत्वपूर्ण पुरावशेष के संभावित कालखंड, स्थापत्य विशेषता और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
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मंदिर निर्माण के लिए परिसर के समतलीकरण और खुदाई के दौरान काले कसौटी पत्थर के सात स्तंभ, लाल बलुआ पत्थर के छह स्तंभ, प्राचीन शिवलिंग, नक्काशीदार पत्थर और देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों के अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई थी। पत्थरों पर पुष्प, कमल और कलश सहित मंदिर स्थापत्य से जुड़े अलंकरण बताए गए हैं। अब पत्थरों की प्रकृति, निर्माण तकनीक, नक्काशी और शैली के आधार पर इनके कालखंड का अध्ययन किया जा रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि किसी पुरावशेष का काल केवल उसकी आकृति से निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्माण शैली, नक्काशी, पत्थर और अन्य पुरावशेषों के साथ उसके संबंध का अध्ययन जरूरी है। अध्ययन पूरा होने के बाद महत्वपूर्ण अवशेषों के साथ उनका संभावित कालखंड, विशेषता और ऐतिहासिक महत्व दर्ज किया जाएगा।
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एएसआई की खुदाई के निष्कर्ष भी होंगे महत्वपूर्ण
डॉ. संजीव के अनुसार, इन पुरावशेषों के अध्ययन में वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे। एएसआई की रिपोर्ट में परिसर में कुषाण, गुप्त, उत्तर-गुप्त-राजपूत और मध्यकालीन चरणों के प्रमाण मिलने का उल्लेख है। रिपोर्ट में 11वीं-12वीं शताब्दी में करीब 50 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी विशाल संरचना तथा करीब 50 स्तंभ-आधार मिलने की बात कही गई है।


विष्णुहरि शिलालेख का नए सिरे से अध्ययन
डॉ. संजीव ने बताया कि 12वीं शताब्दी के विष्णुहरि शिलालेख का भी नए सिरे से अध्ययन किया जा रहा है। उनके अनुसार, शिलालेख की भाषा, लिपि और ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर किए गए अध्ययनों में इसे 12वीं शताब्दी से जोड़ा गया है। इसमें विष्णु को समर्पित मंदिर निर्माण का उल्लेख बताया गया है। शिलालेख में राम के अवतार का भी उल्लेख है, हालांकि इसमें सीधे ‘राम जन्मभूमि मंदिर’ शब्द नहीं हैं।
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