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Ayodhya News: रामलला के कोठारी और भंडारी भी पीतांबरी में आएंगे नजर

Fri, 18 Sep 2026 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Fri, 18 Sep 2026 12:14 AM IST
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Kothari and Bhandari will also be seen clad in Pitambari
रामलला का भव्य विग्रह।
अयोध्या। राममंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ ही सेवा से जुड़े कर्मचारियों के आचरण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। पुजारियों के साथ अब कोठारी और भंडारी के लिए भी नई आचार संहिता लागू की गई है। मंदिर की नई नियमावली तिरुपति बालाजी मॉडल के आधार पर तैयार की गई है।
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रामलला का भोग-प्रसाद तैयार करने और उससे जुड़ी सामग्री की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कोठारी और भंडारी भी अब पुजारियों की तरह निर्धारित नियमों का पालन करेंगे। राममंदिर में चार भंडारी और दो कोठारी तैनात हैं। इनकी ड्यूटी सुबह चार बजे से रात 10 बजे के बीच दो पालियों में लगती है। नई व्यवस्था के तहत पुजारी, कोठारी और भंडारी के लिए मंदिर में निर्धारित ड्रेसकोड अनिवार्य किया गया है। सभी को बिना जेब वाली पीतांबरी पोशाक में ही मंदिर में प्रवेश करना होगा। बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू, मद्यपान सहित किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करने पर तत्काल सेवा से हटाने का प्रावधान है।
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ड्यूटी के दौरान शौच के लिए जाने के बाद पुजारी, कोठारी या भंडारी बिना स्नान किए गर्भगृह, रसोई अथवा कोठार में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करने पर ही दोबारा सेवा में आ सकेंगे। भोग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी कोठारी की निगरानी में ही निकाली जाएगी। इससे सामग्री की शुद्धता के साथ उसकी निगरानी और हिसाब-किताब की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
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राजस्थान के देसी घी से तैयार होगा रामलला का भोग
रामलला के भोग की शुद्धता को लेकर भी ट्रस्ट ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब तक भोग तैयार करने के लिए बाहर की दुकान से घी और तेल मंगाया जाता था। नई व्यवस्था के तहत राजस्थान से गिर गाय का देसी घी मंगाया गया है। इसके साथ ही ट्रस्ट की ओर से सरसों का तेल भी तैयार कराया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि रामलला बाल स्वरूप में हैं। इसलिए उनकी सेवा में शास्त्रीय शुद्धता के साथ व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से भोग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद, रखरखाव और उपयोग की व्यवस्था को भी अधिक नियंत्रित किया जा रहा है।
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