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चुनावी जंग का केंद्र एक बार फिर अयोध्या!
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 06 Jul 2013 12:10 PM IST
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अयोध्या भाजपा और कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव की रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनता दिख रहा है।
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गुजरात से लाए गए भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह शनिवार को अयोध्या पहुंच रहे हैं। वह कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।
कांटे से कांटा निकालने की तैयारी
शाह के अयोध्या से प्रस्थान के दो दिन बाद गुजरात से ही लाए गए कांग्रेस के रणनीतिकार मधुसूदन मिस्त्री अयोध्या पहुंचेंगे। साफ है कि भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे से कांटा निकालने की रणनीति पर इस बार संघर्ष की तैयारी है।
'हिंदुत्व' को भुनाने की कोशिश
शाह अगर अयोध्या में बैठक करके यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि मंदिर व हिंदुत्व भाजपा के एजेंडे में शामिल है, तो कांग्रेस मिस्त्री के जरिये इस संदेश का असर कम करने की कोशिश करेगी।
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न मंदिर से परहेज न राम से
मिस्त्री के माध्यम से उसकी कोशिश राम की धरती पर यह साफ करने की होगी कि न तो उसे अयोध्या से परहेज है और न मंदिर से। उसे परहेज सिर्फ आस्था के मुद्दे पर भाजपा की राजनीति से है।
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जन्मभूमि दर्शन से शुरू होगा शाह का दौरा
अयोध्या में राम मंदिर बनाने के आंदोलन के जरिए राजनीति में शून्य से शिखर तक सफर तय करने वाली भाजपा फिर से दो दशक पुरानी हैसियत के लिए शनिवार को रामनगरी में गुरुमंत्र लेगी।
आक्रामक छवि पाने की कोशिश
अवध प्रांत के 14 जिलों से आ रहे नेताओं का मन हिंदुत्व और मंदिर मुद्दे पर फिर से आक्रामक छवि का तलबगार है। सबकी निगाहें मिशन 2014 की कमान संभाल रहे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सिपहसालार अमित शाह से 16 सीटों वाले इस इलाके में आक्रामकता तलाश रही हैं।
साधु-संतों को मनाएंगे
शाह शनिवार को अयोध्या में अवध क्षेत्र के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से मिलेंगे। सुबह लखनऊ से अयोध्या पहुंच कर वह श्रीराम जन्मभूमि और हनुमान गढ़ी के दर्शन के साथ अपना काम शुरू करेंगे। इसके बाद वह अयोध्या के कुछ प्रमुख साधु-संतों से मिलेंगे।
कारसेवकपुरम में भी होगी बैठक
इसके बाद वह कारसेवकपुरम में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। बैठक के बाद वह गोरखपुर चले जाएंगे। वहां रात्रिनिवास करने के बाद वह सुबह गोरक्षपीठ जाकर दर्शन करेंगे।