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औरैयाः जस्ता और एल्युमीनियम के बर्तन होटलों में प्रतिबंधित
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औरैया। खानपान की चीजों को पकाने या भंडारण करने में बरती गई असावधानी अक्सर फूड प्वॉयजनिंग की वजह बन जाती है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने होटलों और जलपान गृहों में भोजन पकाने में जस्ता व एल्युमीनियम के बर्तनों का प्रयोग प्रतिबंधित किया है।
जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जस्ता और एल्युमीनियम के बर्तनों में कोई भी वस्तु पकाने पर उसमें इन धातुओं का अंश आ जाता है। ये दोनों धातुएं वातावरण की हवा के प्रति संवेदनशील है, जिससे उनके संपर्क में आने वाली वस्तुएं आक्सीजन की प्रक्रिया से दूषित हो जाती हैं।
विभाग की ओर से खाद्य कारोबारियों को जागरूक करने के लिए जारी 20 पृष्ठ की निर्देश पुस्तिका में कहा गया है कि जस्ता और एल्युमीनियम के बर्तनों में दूध नहीं उबालना चाहिए। लोग अधिकतर इन बर्तनों का उपयोग दूध उबालने, चाय बनाने, पानी गर्म करने आदि में किया जाता है।
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ऐसे बर्तनों में पकाई गई चीजों के सेवन करने से मेटाबॉलिक और न्यूरो से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। निरीक्षण के दौरान खाद्य दुकानों में कमी मिलने पर अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई होगी। जिले में बड़े होटल ज्यादा नहीं है पर राजमार्गों के किनारे करीब 50 ढाबे और शहर में करीब 20 से अधिक रेस्टोरेंट है। इसके अतिरिक्त जिले में 100 से अधिक चाय की दुकानें होने का अनुमान है।
इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य
1. प्रयोग किए गए खाद्य तेल को दो बार से अधिक किसी भी दशा में गर्म कर इस्तेमाल न किया जाएं।
2. शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ फ्रिज में अलग-अलग स्थानों पर रखे होने चाहिए।
3. खाद्य पदार्थ रखने और लाने और ले जाने में रंगीन पॉलिथीन का प्रयोग न किया जाए।
4. रसोई में धूप और हवा के निकास (क्रास वेंटिलेशन) की व्यवस्था होनी चाहिए।
5. पैकेज्ड पानी की बोतल का दोबारा इस्तेमाल न किया जाए, क्योंकि प्लास्टिक से पानी में मिले हानिकारक तत्व पाचन तंत्र और लिवर खराब कर सकते हैं।
6. एक बार चाय बनाने में प्रयोग की गई पत्ती दोबारा न उबालें और चाय को बार-बार गर्म न करें, क्योंकि इससे विषैले तत्व बढ़ते हैं।
7. पुराने अखबार या छपे हुए कागज का खाद्य पदार्थ को ढकने, रोटी लपेटने या खाद्य सामग्री परोसने में प्रयोग करने से बचें। क्योंकि स्याही में लेड और टाइटेनियम आक्साइड जैसे तत्व कैंसर और अल्सर पैदा कर सकते है।
वर्जन
विभाग से मिले निर्देश के अनुसार, खाद्य कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। खाद्य दुकानों में कमी मिलने पर अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई होगी। -स्वतंत्र कुमार श्रीवास्तव, मुख्य खाद्य अधिकारी औरैया
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जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जस्ता और एल्युमीनियम के बर्तनों में कोई भी वस्तु पकाने पर उसमें इन धातुओं का अंश आ जाता है। ये दोनों धातुएं वातावरण की हवा के प्रति संवेदनशील है, जिससे उनके संपर्क में आने वाली वस्तुएं आक्सीजन की प्रक्रिया से दूषित हो जाती हैं।
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विभाग की ओर से खाद्य कारोबारियों को जागरूक करने के लिए जारी 20 पृष्ठ की निर्देश पुस्तिका में कहा गया है कि जस्ता और एल्युमीनियम के बर्तनों में दूध नहीं उबालना चाहिए। लोग अधिकतर इन बर्तनों का उपयोग दूध उबालने, चाय बनाने, पानी गर्म करने आदि में किया जाता है।
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ऐसे बर्तनों में पकाई गई चीजों के सेवन करने से मेटाबॉलिक और न्यूरो से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। निरीक्षण के दौरान खाद्य दुकानों में कमी मिलने पर अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई होगी। जिले में बड़े होटल ज्यादा नहीं है पर राजमार्गों के किनारे करीब 50 ढाबे और शहर में करीब 20 से अधिक रेस्टोरेंट है। इसके अतिरिक्त जिले में 100 से अधिक चाय की दुकानें होने का अनुमान है।
इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य
1. प्रयोग किए गए खाद्य तेल को दो बार से अधिक किसी भी दशा में गर्म कर इस्तेमाल न किया जाएं।
2. शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ फ्रिज में अलग-अलग स्थानों पर रखे होने चाहिए।
3. खाद्य पदार्थ रखने और लाने और ले जाने में रंगीन पॉलिथीन का प्रयोग न किया जाए।
4. रसोई में धूप और हवा के निकास (क्रास वेंटिलेशन) की व्यवस्था होनी चाहिए।
5. पैकेज्ड पानी की बोतल का दोबारा इस्तेमाल न किया जाए, क्योंकि प्लास्टिक से पानी में मिले हानिकारक तत्व पाचन तंत्र और लिवर खराब कर सकते हैं।
6. एक बार चाय बनाने में प्रयोग की गई पत्ती दोबारा न उबालें और चाय को बार-बार गर्म न करें, क्योंकि इससे विषैले तत्व बढ़ते हैं।
7. पुराने अखबार या छपे हुए कागज का खाद्य पदार्थ को ढकने, रोटी लपेटने या खाद्य सामग्री परोसने में प्रयोग करने से बचें। क्योंकि स्याही में लेड और टाइटेनियम आक्साइड जैसे तत्व कैंसर और अल्सर पैदा कर सकते है।
वर्जन
विभाग से मिले निर्देश के अनुसार, खाद्य कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। खाद्य दुकानों में कमी मिलने पर अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई होगी। -स्वतंत्र कुमार श्रीवास्तव, मुख्य खाद्य अधिकारी औरैया