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Auraiya News: 24 घंटे में दो मीटर घटा यमुना का जलस्तर, गंदगी और सीलन से मुश्किलें और बढ़ीं
Sun, 03 Aug 2025 11:42 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 03 Aug 2025 11:42 PM IST
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जलस्तर घटने के बाद यमुना नदी का दृश्य।
- फोटो : मृतक जगदीश की फाइल फोटो। स्त्रोत : स्वजन
अजीतमल (औरैया)। कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से विकराल रूप धारण करने वाली यमुना नदी का पानी घट रहा है। 24 घंटे के अंदर यमुना जलस्तर में दो मीटर की कमी दर्ज की गई है।
वहीं, पानी घटने से बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन दलदल में बदल गई सड़कों, जलभराव और कीचड़ से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सिकरोड़ी में सीलन व पानी से घर गिरने का खतरा बढ़ने से लोगों को लौटने की इजाजत नहीं दी गई। वहीं गौहानी कलां मार्ग अभी भी बंद है। रपटा पुल से एक किमी. तक पानी भरने से यहां लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं।
बैराज से छोड़े गए पानी से यमुना का जलस्तर 119 मीटर तक चला गया था। हालांकि शनिवार से जलस्तर गिरना शुरू हो गया है। रविवार को जलस्तर शाम छह बजे के करीब 114.6 मीटर रह गया। जोकि खतरे के निशान 113 मीटर से अभी भी एक मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि कुछ हद तक सिकरोड़ी, बड़ैरा व गौहानी कलां गांव के बंद रास्ते खुलने शुरू हो गए हैं।
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वहीं गौहानी कलां गांव के रास्ते पर अभी पानी बह रहा है। सिकरोड़ी गांव के अंदर भरा पानी निकल गया है। अब सिर्फ यमुना के किनारे पानी रह गया है, लेकिन गांव से विस्थापित कर बाढ़ राहत चौकी क्षेत्र में बसाए गए 110 परिवारों को अभी गांव के अंदर अपने घरों में जाने के आदेश नहीं दिए गए हैं।
प्रशासन का मानना कि घरों में पहुंचे पानी के चलते दीवारों में सीलन है। अंदर भी पानी गया होगा, तो घर गिरने का खतरा हो सकता है। इसके चलते लोगों को दो दिन बाद ही घर जाने की अनुमति दी जाएगी। गांव में यमुना के पानी के साथ आई गंदगी को साफ कराया जा रहा है। गलियों में अभी भी कीचड़ भरा है।
उपजिलाधिकारी अजीतमल निखिल राजपूत ने बताया कि यमुना का जलस्तर गिर रहा है। गौहानी कलां को छोड़कर सभी रास्ते खुल गए हैं। सिकरोड़ी से भी पानी उतर गया, लेकिन अभी विस्थापित लोगों को दो दिन के बाद ही अपने अपने घरों में पहुंचने के लिए कहा गया है। गांव की साफ सफाई की जा रही है।
गलियों का कीचड़ साफ कराया
बड़ेरा गांव से पानी निकलने के बाद लोग गांव पहुंचे। लोगों ने अपने-अपने घरों की हालत देखी, लोग कीचड़ और बर्बाद हो चुके सामान को देखकर दुखी हुए। उधर, गलियों में भरे कीचड़ और गंदगी को साफ-सफाई कराई गई। प्रशासन द्वारा अभी घरों पर न पहुंचने की हिदायत के चलते लोगों ने आपस में चर्चा की।
लोग बोले-अबकी चार दिन में ही उतर गया पानी
ग्रामीणों के अनुसार इस बार बाढ़ का पानी साल 2021 के मुकाबले कम रहा है। पानी अबकी चार दिन में ही वापस हो गया। ग्रामीण सतानंद ने बताया कि पानी उनके घर के अंदर तक पहुंच गया था। पिछली बार आई बाढ़ में उनकी दीवार चटक गई थीं। इस बार अभी कोई घर में नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन अभी प्रशासन ने घर में रहने से मना किया है।
ग्रामीण दयावती ने बताया कि उनके घर में कोई नहीं है। उनका इकलौता बेटा दिल्ली में रहता है। जिसके चलते वह घर छोड़कर नहीं गई थीं। पानी अबकी उनके घर के बाहर ही पहुंचा था। प्रशासन से खाना आदि मिलता रहा। ग्रामीण जयप्रकाश ने बताया कि हर तीन साल में यमुना दरवाजे तक आती है। इस बार कम रही। उनका मकान ऊंचाई पर है। इसके चलते वह अपने घर पर ही रहे।
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वहीं, पानी घटने से बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन दलदल में बदल गई सड़कों, जलभराव और कीचड़ से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सिकरोड़ी में सीलन व पानी से घर गिरने का खतरा बढ़ने से लोगों को लौटने की इजाजत नहीं दी गई। वहीं गौहानी कलां मार्ग अभी भी बंद है। रपटा पुल से एक किमी. तक पानी भरने से यहां लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं।
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बैराज से छोड़े गए पानी से यमुना का जलस्तर 119 मीटर तक चला गया था। हालांकि शनिवार से जलस्तर गिरना शुरू हो गया है। रविवार को जलस्तर शाम छह बजे के करीब 114.6 मीटर रह गया। जोकि खतरे के निशान 113 मीटर से अभी भी एक मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि कुछ हद तक सिकरोड़ी, बड़ैरा व गौहानी कलां गांव के बंद रास्ते खुलने शुरू हो गए हैं।
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वहीं गौहानी कलां गांव के रास्ते पर अभी पानी बह रहा है। सिकरोड़ी गांव के अंदर भरा पानी निकल गया है। अब सिर्फ यमुना के किनारे पानी रह गया है, लेकिन गांव से विस्थापित कर बाढ़ राहत चौकी क्षेत्र में बसाए गए 110 परिवारों को अभी गांव के अंदर अपने घरों में जाने के आदेश नहीं दिए गए हैं।
प्रशासन का मानना कि घरों में पहुंचे पानी के चलते दीवारों में सीलन है। अंदर भी पानी गया होगा, तो घर गिरने का खतरा हो सकता है। इसके चलते लोगों को दो दिन बाद ही घर जाने की अनुमति दी जाएगी। गांव में यमुना के पानी के साथ आई गंदगी को साफ कराया जा रहा है। गलियों में अभी भी कीचड़ भरा है।
उपजिलाधिकारी अजीतमल निखिल राजपूत ने बताया कि यमुना का जलस्तर गिर रहा है। गौहानी कलां को छोड़कर सभी रास्ते खुल गए हैं। सिकरोड़ी से भी पानी उतर गया, लेकिन अभी विस्थापित लोगों को दो दिन के बाद ही अपने अपने घरों में पहुंचने के लिए कहा गया है। गांव की साफ सफाई की जा रही है।
गलियों का कीचड़ साफ कराया
बड़ेरा गांव से पानी निकलने के बाद लोग गांव पहुंचे। लोगों ने अपने-अपने घरों की हालत देखी, लोग कीचड़ और बर्बाद हो चुके सामान को देखकर दुखी हुए। उधर, गलियों में भरे कीचड़ और गंदगी को साफ-सफाई कराई गई। प्रशासन द्वारा अभी घरों पर न पहुंचने की हिदायत के चलते लोगों ने आपस में चर्चा की।
लोग बोले-अबकी चार दिन में ही उतर गया पानी
ग्रामीणों के अनुसार इस बार बाढ़ का पानी साल 2021 के मुकाबले कम रहा है। पानी अबकी चार दिन में ही वापस हो गया। ग्रामीण सतानंद ने बताया कि पानी उनके घर के अंदर तक पहुंच गया था। पिछली बार आई बाढ़ में उनकी दीवार चटक गई थीं। इस बार अभी कोई घर में नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन अभी प्रशासन ने घर में रहने से मना किया है।
ग्रामीण दयावती ने बताया कि उनके घर में कोई नहीं है। उनका इकलौता बेटा दिल्ली में रहता है। जिसके चलते वह घर छोड़कर नहीं गई थीं। पानी अबकी उनके घर के बाहर ही पहुंचा था। प्रशासन से खाना आदि मिलता रहा। ग्रामीण जयप्रकाश ने बताया कि हर तीन साल में यमुना दरवाजे तक आती है। इस बार कम रही। उनका मकान ऊंचाई पर है। इसके चलते वह अपने घर पर ही रहे।