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Auraiya News: इकौरापुर की महिलाओं ने पति को रोजगार, गांव को दी कनेक्टिविटी

Mon, 01 Dec 2025 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Dec 2025 11:42 PM IST
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Women of Ikaurapur provided employment to husband, connectivity to village
औरैया। जिले के इकौरापुर गांव की 18 महिलाओं ने वह कर दिखाया है जिसकी मिसाल पूरे क्षेत्र में दी जा रही है। कभी आर्थिक मजबूरियों से जूझ रहीं ये महिलाएं आज न सिर्फ अपने घर की रीढ़ बन गई हैं बल्कि पूरे गांव के विकास की वजह भी बनी हैं। स्वयं सहायता समूह से लिए गए ऋण ने इनके जीवन की दिशा बदल दी।
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पहले इन महिलाओं के घरों में आय का एकमात्र साधन मजदूरी थी। रोज कमाओ–रोज खाओ जैसी स्थिति के बीच घर का खर्च पूरा करना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में गांव की ही समूह सखी करुणा भारती ने आगे आकर महिलाओं का हाथ थामा। उन्होंने एनएलआरएम के तहत मिलने वाली योजनाओं की जानकारी दी और समूह के माध्यम से ऋण दिलवाने में मदद की। ऋण मिलने के बाद महिलाओं ने अपने पतियों को ऑटो खरीदकर दिए। आज वही ऑटो औरैया–दिबियापुर रोड पर दौड़ाकर सभी परिवार स्थायी आमदनी जुटा रहे हैं। हर महीने ऋण की किस्त जमा करने के बाद भी पर्याप्त बचत हो रही है जिससे घर की रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।
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इकौरापुर गांव की सबसे बड़ी समस्या परिवहन की थी। गांव में एक भी ऑटो नहीं मिलता था। बमरीपुर और आगे की सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को ढाई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्गों और मरीजों तक, सभी के लिए यह सफर बड़ी परेशानी बन जाता था। अब 18 ऑटो शुरू होने के बाद गांव में एक तरह से लाइफलाइन बन गई है। गांव से बाजार, अस्पताल, स्कूल और दफ्तरों तक आने–जाने में लोगों को अब राहत मिल रही है। कनेक्टिविटी बढ़ने से पूरे क्षेत्र में आवाजाही आसान हुई और समय की भी बचत होने लगी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं की इस सोच ने न सिर्फ उनके घरों की दशा सुधारी है, बल्कि पूरे गांव की जिंदगी आसान कर दी है। युवाओं को रोजगार मिला, बुजुर्गों को सुविधाएं मिलीं और गांव के बच्चों के लिए स्कूल का रास्ता आसान हो गया।

इकौरापुर की समूह सखी करुणा भारती ने महिलाओं को इसके लिए प्रेरित किया। गांव की 18 महिलाओं ने अपनी जरूरत के हिसाब से समूह ऋण लिया। रोजगार मिलने से उनकी जिंदगी में सुधार आया है। महिलाएं समय से किस्त जमा कर रही हैं।
- मुशीर अहमद, ब्लॉक मिशन मैनेजर, एनएलआरएम
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