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अंतिम यात्रा में नम आंखों से दी सैनिक को विदाई

Tue, 10 Apr 2018 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Tue, 10 Apr 2018 10:32 PM IST
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Farewell to the soldier with humble eyes in the last trip
सत्यम का तिरंगे पर लिपटा हुआ शव घर आने पर रोते परिजन। - फोटो : amarujala

बिधूना/एरवाकटरा (औरैया)। औरैया के लाल सत्यम आर्या का पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ तिरंगे में लपेटकर मंगलवार को बेलाझाली गांव लाया गया। कानपुर से एयरफोर्स के जवान उसके शव के साथ गांव पहुंचे। गांव के लोग उसके घर पर उमड़ पड़े। शव देखते ही मां बेसुध हो गई। बहन के आंसू थम नहीं रहे। अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। मुखाग्नि बड़े भाई शुभम ने दी। एयरफोर्स के जवानों ने सलामी दी। अंतिम विदाई पर पूरा गांव रो पड़ा।

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 ऐरवाकटरा थाना क्षेत्र के ग्राम बेलाझाली निवासी सत्यम राठौर की रविवार को इलाहाबाद संगम तट में नहाते समय डूबकर मौत हो गई थी। 18 माह पूर्व उसका एयरफोर्स में सैनिक पद पर चयन हुआ था। उसकी ट्रेनिंग बंगलूरू में चल रही थी। वह 10 दिन के प्रशिक्षण के लिए इलाहाबाद आया था। वहीं यह दर्दनाक हादसा हो गया।
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 मंगलवार को कानपुर के एयरफोर्स सार्जेंट रामबाबू, दीपक कुमार और अश्वनी समेत वायुसेना कर्मी सत्यम का शव लेकर बेलाझाली गांव पहुंचे। पिता उदय प्रताप जिनकी ऐरवाकटरा में बर्तन की दुकान है वह शव देखते ही बिलख पड़े। मां ऊषा देवी भी सत्यम से जुड़ीं यादों को याद करके फफक पड़ीं।
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बड़ा भाई शुभम और बहन शालिनी भी भाई के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोई। सत्यम की अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। अत्येंष्टि स्थल पर 25 वायुसैनिकों ने अंतिम सलामी दी। बड़े भाई शुभम ने चिता को मुखागिभन दी।
ऐरवाकटरा के थाना इंचार्ज राजदेव प्रजापति सूचना पाकर सोमवार शाम से ही पुलिस फोर्स समेत बेलाझाली पहुंच गए थे। उन्होंने सैनिक के परिजनों और रिश्तेदारों को इस दुख की घड़ी में संयम रखने का ढांढस बंधाया।

होनहार और मिलनसार था सत्यम
सत्यम के शिक्षक मुकुटपुर निवासी राजवीर शाक्य ने बताया कि सत्यम बड़ा होनहार और मिलनसार था, सत्यम में देश सेवा का जज्बा पढ़ाई के दौरान से ही था। बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियो ने पहुंचकर देश के सपूत के अंतिम दर्शन कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।


भाई ने अधूरे सपने को पूरा करने की जताई इच्छा
सत्यम के बड़े भाई शुभम ने बताया कि वह कानपुर में रहकर बीटीसी की तैयारी कर रहा है। मां ऊषा देवी भी उसके साथ थीं। पिछले शुक्रवार को मां के पास सत्यम का फोन आया था कि वह सोमवार को घर आएगा। पर वह नहीं आया। और उसका पार्थिव शरीर ही आया। भाई शुभम ने कहा कि वह अपने भाई के अधूरे सपने को पूरा करेगा। इसके लिए वह देश सेवा के लिए तत्पर है।


 

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