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Auraiya News: ओवरलोड से पिघल रहे तार, फुंक रहे ट्रांसफार्मर, कटौती से हाहाकार
Mon, 12 Jun 2023 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 12 Jun 2023 11:37 PM IST
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औरैया। गर्मी बढ़ते ही बिजली कटौती की समस्या बढ़ी है। ओवर लोड से पिघल रहे तार और फुंक रहे ट्रांसफार्मरों के कारण हर घंटे बिजली गुल हो रही है। शहरी क्षेत्र में जहां ट्रिपिंग की समस्या बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में रात रात भर बिजली गुल हो रही है। इससे जहां लोगों का गर्मी से बुरा हाल है, वहीं पानी की समस्या बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के कारण प्रतिदिन 24 से 26 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हो रही है।
शहरी क्षेत्र में 24 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे आपूर्ति के दावे हवाहवाई साबित हो रहे है। इसके पीछे जिम्मेदारों की अनदेखी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक रिवैंप योजना के तहत बिजली सुधार की करीब साल भर से योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों ने दावा किया था इस साल गर्मी से पहले काफी हद तक बिजली में सुधार होगा। मगर यह दावे कागजी साबित हुई। हालात यह है कि शहर में बंच केबिल सभी इलाकों में न पड़ने से जर्जर तार ओवर लोड होकर पिघलने के साथ टूट रहे है।
लोड बढ़ा तो ट्रांसफार्मर भी दगा देने लगे हैं। 24 घंटे में शहरी क्षेत्र में 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही उसमें ट्रिपिंग ने रुला रखा है। बिधूना, ऐरवाकटरा, कंचौसी, केशमपुर, रुरुगंज इलाके के कई गांवों में रात-रात भर बिजली गुल रह रही है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कटौती और गर्मी से हाहाकार मचा है।
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शहर के जालौन चौराहे पर रखा ट्रांसफार्मर शनिवार रात फुंक गया। इससे कई इलाकों की बिजली रात भर गुल रही। सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को पीने के पानी के लिए उठानी पड़ी। जेई सुभाष ने बताया कि शहर में कई जगहों पर जर्जर तार टूटने से फाल्ट की समस्या हो रही है। इस कारण से ठीक करने व शटडाउन लेने के लिए कटौती की जा रही है। जालौन चौराहे पर फुंका ट्रांसफार्मर बदलवा दिया गया है।
जिले में 132 करोड़ की लागत से स्वीकृत रिवैंप योजना से बिजली व्यवस्था बेहतर की जानी है। इसमें जर्जर तार, खंभे, ट्रांसफार्मर बदलने के साथ कई कार्य शामिल है। इसके लिए आगरा की कार्यदायी संस्था ल्यूमिनो को टेंडर मिला है। कंपनी ने फरवरी माह में जिले के साथ-साथ शहर की जर्जर केबिल, ओवरलोड ट्रासंफार्मर समेत अन्य बिजली समस्याओं को लेकर सर्वे का काम पूरा किया था। मगर अभी तक केबिल नहीं पड़ी। इधर गर्मी बढ़ने और लोड अधिक होने के कारण जर्जर तार टूट रहे हैं।
मई माह से बढ़ी बिजली की खपत
जून माह में झुलसा देने वाली गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। वर्तमान समय में तेज धूप के साथ गर्म हवा के थपेड़े जन-जीवन को अस्त-व्यस्त किए हुए हैं। गर्मी से राहत के लिए लोगों ने पंखा, कूलर, फ्रिज और एसी आदि को चलाना शुरू कर दिया। विद्युत चलित उपकरणों का प्रयोग बढ़ने से बिजली की खपत में उछाल आया है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च के अंत तक 27 विद्युत उपकेंद्रों को 600 से 635 मिलियन यूनिट के बीच आपूर्ति की जाती थी। मई में गर्मी बढ़ने से इसमें काफी ज्यादा उछाल आया है। वर्तमान समय में 24.16 मिलियन यूनिट बिजली की खपत प्रतिदिन हो रही है। जबकि पिछले वर्ष यही आंकड़ा प्रतिदिन के हिसाब से 22 मिलियन यूनिट के करीब रहा था। इस बार मई माह में पिछले साल से अधिक तापमान चढ़ा है, जिससे गर्मी भी अधिक पड़नी शुरू हुई और खपत बढ़ी है।
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कटौती से व्यापार पर असर, 10 दिन में फुंके 60 ट्रांसफार्मर
जिले में बिजली संकट और कटौती के साथ फुंक रहे ट्रांसफार्मर लोगों की परेशानी का सबब बने हैं। ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद बदलने में एक से दो दिन लग रहे है। कुछ जगहों पर तो फोन करने के बाद भी कई दिन बीत जाने पर ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। जिससे कुटीर उद्योग, कृषि पर असर पड़ रहा है। बिजली कटौती और ट्रांसफार्मर फुंकने पर सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है। उधर, बिधूना स्थित वर्कशाप के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले अप्रैल माह में 109 ट्रांसफार्मर फुंक कर बनने को आए हैं। मई माह में इनकी संख्या 167 रही। वहीं एक जून से 11 जून तक यह संख्या 60 पहुंच गई है। जेई अखिलेश कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सात से आठ ट्रांसफार्मर फुंक कर पहुंच रही है, जिन्हें मरम्मत कर 24 घंटे में वापस किया जा रहा है। इसके लिए दो शिफ्ट में कर्मचारी लगाए गए हैं।
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वर्जन....
लोड बढ़ने से फाल्ट की समस्या बढ़ी है। जहां पर शिकायतें मिल रही है, वहां टीम भेज कर तत्काल फाल्ट दूर कर आपूर्ति की जा रही है। शहर में रिवैंप योजना के तहत केबिल बदली जानी है, इस पर काम चल रहा है। जल्द ही केबिलें बदलने के साथ बिजली समस्या से निजात दिलाया जाएगा।- महेंद्र कुमार, एसडीओ सदर, नोडल अधिकारी रिवैंप योजना।
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शहरी क्षेत्र में 24 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे आपूर्ति के दावे हवाहवाई साबित हो रहे है। इसके पीछे जिम्मेदारों की अनदेखी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक रिवैंप योजना के तहत बिजली सुधार की करीब साल भर से योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों ने दावा किया था इस साल गर्मी से पहले काफी हद तक बिजली में सुधार होगा। मगर यह दावे कागजी साबित हुई। हालात यह है कि शहर में बंच केबिल सभी इलाकों में न पड़ने से जर्जर तार ओवर लोड होकर पिघलने के साथ टूट रहे है।
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लोड बढ़ा तो ट्रांसफार्मर भी दगा देने लगे हैं। 24 घंटे में शहरी क्षेत्र में 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही उसमें ट्रिपिंग ने रुला रखा है। बिधूना, ऐरवाकटरा, कंचौसी, केशमपुर, रुरुगंज इलाके के कई गांवों में रात-रात भर बिजली गुल रह रही है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कटौती और गर्मी से हाहाकार मचा है।
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शहर के जालौन चौराहे पर रखा ट्रांसफार्मर शनिवार रात फुंक गया। इससे कई इलाकों की बिजली रात भर गुल रही। सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को पीने के पानी के लिए उठानी पड़ी। जेई सुभाष ने बताया कि शहर में कई जगहों पर जर्जर तार टूटने से फाल्ट की समस्या हो रही है। इस कारण से ठीक करने व शटडाउन लेने के लिए कटौती की जा रही है। जालौन चौराहे पर फुंका ट्रांसफार्मर बदलवा दिया गया है।
जिले में 132 करोड़ की लागत से स्वीकृत रिवैंप योजना से बिजली व्यवस्था बेहतर की जानी है। इसमें जर्जर तार, खंभे, ट्रांसफार्मर बदलने के साथ कई कार्य शामिल है। इसके लिए आगरा की कार्यदायी संस्था ल्यूमिनो को टेंडर मिला है। कंपनी ने फरवरी माह में जिले के साथ-साथ शहर की जर्जर केबिल, ओवरलोड ट्रासंफार्मर समेत अन्य बिजली समस्याओं को लेकर सर्वे का काम पूरा किया था। मगर अभी तक केबिल नहीं पड़ी। इधर गर्मी बढ़ने और लोड अधिक होने के कारण जर्जर तार टूट रहे हैं।
मई माह से बढ़ी बिजली की खपत
जून माह में झुलसा देने वाली गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। वर्तमान समय में तेज धूप के साथ गर्म हवा के थपेड़े जन-जीवन को अस्त-व्यस्त किए हुए हैं। गर्मी से राहत के लिए लोगों ने पंखा, कूलर, फ्रिज और एसी आदि को चलाना शुरू कर दिया। विद्युत चलित उपकरणों का प्रयोग बढ़ने से बिजली की खपत में उछाल आया है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च के अंत तक 27 विद्युत उपकेंद्रों को 600 से 635 मिलियन यूनिट के बीच आपूर्ति की जाती थी। मई में गर्मी बढ़ने से इसमें काफी ज्यादा उछाल आया है। वर्तमान समय में 24.16 मिलियन यूनिट बिजली की खपत प्रतिदिन हो रही है। जबकि पिछले वर्ष यही आंकड़ा प्रतिदिन के हिसाब से 22 मिलियन यूनिट के करीब रहा था। इस बार मई माह में पिछले साल से अधिक तापमान चढ़ा है, जिससे गर्मी भी अधिक पड़नी शुरू हुई और खपत बढ़ी है।
कटौती से व्यापार पर असर, 10 दिन में फुंके 60 ट्रांसफार्मर
जिले में बिजली संकट और कटौती के साथ फुंक रहे ट्रांसफार्मर लोगों की परेशानी का सबब बने हैं। ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद बदलने में एक से दो दिन लग रहे है। कुछ जगहों पर तो फोन करने के बाद भी कई दिन बीत जाने पर ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। जिससे कुटीर उद्योग, कृषि पर असर पड़ रहा है। बिजली कटौती और ट्रांसफार्मर फुंकने पर सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है। उधर, बिधूना स्थित वर्कशाप के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले अप्रैल माह में 109 ट्रांसफार्मर फुंक कर बनने को आए हैं। मई माह में इनकी संख्या 167 रही। वहीं एक जून से 11 जून तक यह संख्या 60 पहुंच गई है। जेई अखिलेश कुमार ने बताया कि प्रतिदिन सात से आठ ट्रांसफार्मर फुंक कर पहुंच रही है, जिन्हें मरम्मत कर 24 घंटे में वापस किया जा रहा है। इसके लिए दो शिफ्ट में कर्मचारी लगाए गए हैं।
वर्जन....
लोड बढ़ने से फाल्ट की समस्या बढ़ी है। जहां पर शिकायतें मिल रही है, वहां टीम भेज कर तत्काल फाल्ट दूर कर आपूर्ति की जा रही है। शहर में रिवैंप योजना के तहत केबिल बदली जानी है, इस पर काम चल रहा है। जल्द ही केबिलें बदलने के साथ बिजली समस्या से निजात दिलाया जाएगा।- महेंद्र कुमार, एसडीओ सदर, नोडल अधिकारी रिवैंप योजना।