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Auraiya News: शिकंजा कसा तो जन औषधि केंद्र पर बिकीं नौ हजार की दवाएं
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औरैया। चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में बाहर की दवा लिखने पर शिकंजा कसा तो जन औषधि केंद्र के दिन बदल गए। परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र पर दवाओं की बिक्री छह गुनी हो गई।
उपचार के लिए दो हजार से अधिक मरीज प्रतिदिन चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में आते हैं। इन मरीजों को सरकारी पर्चे पर ही डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे थे। पड़ताल में इसकी पुष्टि होने के बाद अमर उजाला ने 19 नवंबर के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गई थी। सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा और प्राचार्य डॉ. मुकेशवीर सिंह ने डॉक्टरों को बाहर की दवा न लिखने की चेतावनी दी थी।
साथ ही दवा काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों को भी सख्त निर्देश दिए थे कि अगर कोई दवा स्टॉक में न हो तो मरीज को जन औषधि केंद्र पर भेजें। इसके चलते परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र की बिक्री छह गुनी हो गई। बीते कई महीनों से जहां औसतन 1500 रुपये प्रतिदिन की दवाएं बिकती थीं, वहीं बुधवार और बृहस्पतिवार दोनों दिन करीब 9-9 हजार रुपये की दवाएं बिकीं। इससे साफ है कि ये सभी दवाएं अब तक मरीज बाहर से खरीद रहे थे।
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जन औषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाओं की कीमतें आधे से भी कम हैं। ऐसे में जब नौ हजार रुपये की दवाएं जन औषधि केंद्र पर बिकीं तो बाहर इनकी कीमत करीब 20 हजार रुपये होती।
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उपचार के लिए दो हजार से अधिक मरीज प्रतिदिन चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में आते हैं। इन मरीजों को सरकारी पर्चे पर ही डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे थे। पड़ताल में इसकी पुष्टि होने के बाद अमर उजाला ने 19 नवंबर के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गई थी। सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा और प्राचार्य डॉ. मुकेशवीर सिंह ने डॉक्टरों को बाहर की दवा न लिखने की चेतावनी दी थी।
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साथ ही दवा काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों को भी सख्त निर्देश दिए थे कि अगर कोई दवा स्टॉक में न हो तो मरीज को जन औषधि केंद्र पर भेजें। इसके चलते परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र की बिक्री छह गुनी हो गई। बीते कई महीनों से जहां औसतन 1500 रुपये प्रतिदिन की दवाएं बिकती थीं, वहीं बुधवार और बृहस्पतिवार दोनों दिन करीब 9-9 हजार रुपये की दवाएं बिकीं। इससे साफ है कि ये सभी दवाएं अब तक मरीज बाहर से खरीद रहे थे।
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जन औषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाओं की कीमतें आधे से भी कम हैं। ऐसे में जब नौ हजार रुपये की दवाएं जन औषधि केंद्र पर बिकीं तो बाहर इनकी कीमत करीब 20 हजार रुपये होती।