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Auraiya News: मौसम की फसलों पर मार, आलू की फसल में झुलसा रोग की आशंका

Mon, 29 Dec 2025 10:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Dec 2025 10:54 PM IST
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Weather damages crops, fear of blight disease in potato crop
फोटो 28: टिलियापुर गांव में तैयार आलू की फसल। संवाद
हरदोई। शीतलहर के साथ ही कोहरा और पाला का असर फसलों पर पड़ने की आशंका है। पाला और कोहरा की बूंदे बरसने से सब्जियों की फसलों में झुलसा रोग लगने की आशंका है। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। पाला और कोहरा का असर सब्जियों की फसलों के साथ ही आम के बागान को भी प्रभावित करेंगे। कोहरा और पाला की मार को देखते हुए किसानों ने आलू की तैयार हो रही फसल की खोदाई भी शुरू करा दी है।
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सर्दियों के साथ ही कोहरा और पाला भी तेजी से गिरना शुरू हो गया है। पाला और कोहरा के बरसने से फसलों की पत्तियों के खराब होने से उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है। आम के बागान में कोहरा और पाला से कोपल और जनवरी से निकलने वाले बौर भी प्रभावित होने की आशंका है।
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वहीं, कोहरा और पाला दलहनी, तिलहनी, टमाटर, मिर्च, बैंगन की फसलों के लिए घातक है। जिला उद्यान अधिकारी सुभाष चंद्रा ने बताया कि आलू की फसल करीब 14,300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोयी गई है जबकि शाक-भाजी की खेती भी करीब 12,000-13,000 हेक्टेयर में है। ऐसे ही 7,000 हेक्टेयर में आम के बागान हैं।
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अगैती आलू के बाजार में आने से भाव गिरे, 40 रुपये के पांच किलो बिक रहे
मौसम की मार और लागत को देखते हुए बाजार में अगैती आलू बड़ी मात्रा में आने लगा है। आलू की खोदाई होने और बड़ी मात्रा में आलू बाजार में आने से भाव भी गिरे हैं। फुटकर बाजार में नया आलू 40 रुपये का पांच किलोग्राम बिक रहा है जबकि थोक भाव काफी कम है। फुटकर बाजार में एक किलोग्राम आलू भी आठ रुपये के भाव पर ही है। फुटकर और थोक सब्जी विक्रेता गुड्डू, रोशनलाल, दीपू, कमल और रईस आदि ने बताया कि नए आलू की आवक तेजी से बढ़ी है जिससे थाेक और फुटकर बाजार में भाव कम हुए हैं।

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फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों में नमी और दवाओं का छिड़काव करें : डॉ. एके तिवारी

कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि कोहरा और पाला दलहनी, तिलहनी, सब्जियों की टमाटर, मिर्च, बैंगन आदि के लिए नुकसानदेय है। उन्होंने किसानों को सुझाव दिए कि कोहरा और पाला से फसलों को बचाव के लिए खेत में नमी बनाए रखें। राख को छानकर सब्जियों की फसलों पर शाम के समय छिड़काव करें। सावधानी के तौर पर आलू, मिर्च और टमाटर की फसलों पर मैनकोजेब-75 डब्ल्यूपी का दो किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर अच्छी प्रकार से छिड़काव करें जिससे झुलसा रोग न लगने पाए। आम के बाग में किसान एमिडाक्लोपिड कीटनाशी-17.8 प्रतिशत की आधा से एक मिलीलीटर की मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाएं। साथ ही घोल में घुलनशील गंधक भी तीन ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से मिलाकर छिड़काव करें।

फोटो 28: टिलियापुर गांव में तैयार आलू की फसल। संवाद

फोटो 28: टिलियापुर गांव में तैयार आलू की फसल। संवाद

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