{"_id":"63028553d07ac950607a6a82","slug":"waterlogging-in-vacant-plots-and-streets-auraiya-news-knp7139196169","type":"story","status":"publish","title_hn":"औरैयाः खाली प्लाटों व गलियों में जलभराव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औरैयाः खाली प्लाटों व गलियों में जलभराव
विज्ञापन
मकानों के बीच खाली प्लाटों में भरे पानी में फैली हरे रंग की काई
- फोटो : AURAIYA
दिबियापुर (औरैया)। नगर से सटी ककराही ग्राम पंचायत की आवासीय बस्तियों में खाली प्लाटों में भरा पानी संक्रामक रोगों को दावत दे रहा है। गलियों में भरे पानी के कारण राहगीरों का निकलना दूभर हो रहा है। महंगे सरकारी सर्किल रेट देकर प्लाट का बैनामा कराने वाले लोग यहां विकास न होने से परेशान हैं। क्षेत्रीय लोगों ने खाली प्लाटों एवं गलियों में जलभराव से निजात की मांग की है।
नगर से सटी ग्राम पंचायत ककराही में लोगों ने जल्द विकास की उम्मीद संजोकर महंगे सर्किल रेट पर प्लाट खरीदकर मकान बनवाए। लगभग दो दशकों से यहां पर आलीशान मकानों का निर्माण बदस्तूर जारी है। विकास कुंज कालोनी, उपाध्याय नगर, केके पुरम समेत कई कालोनियां यहां बस भी गईं। सैकड़ों की संख्या में बने मकानों में लोग रहने भी लगे हैं, लेकिन गलियों का निर्माण सिर्फ वहीं पर हुआ, जहां रहने वालों की अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पकड़ है। इसके अलावा अधिकतर गलियां अभी भी ऊबड़-खाबड़ हैं।
इक्का-दुक्का गलियां ब्लाक भाग्यनगर, विधायक निधि, जिला पंचायत, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा आदि से बन चुकीं हैं, लेकिन अधिकतर गलियां अभी बनने की बाट जोह रहीं हैं। जलनिकासी के इंतजाम न होने के कारण गलियों और खाली प्लाटों में पानी भरा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदा पानी प्लाटों में भरा होने के कारण प्रत्येक वर्ष लोग संक्रामक रोगों से जूझते हैं।
विज्ञापन
इस बार भी संक्रामक रोगों के पैर पसारने की संभावना से लोग परेशान हैं। बता दें कि जलभराव के कारण डेंगू, मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना रहती है। ब्लाक भाग्यनगर के बीडीओ विश्वनाथ पाल ने कहा कि ग्राम पंचायत ककराही के प्रधान और सेक्रेटरी को निर्देशित किया गया है कि वह जलभराव की समस्या से निजात के लिए नाले-नालियों को साफ कराएं। जलभराव किसी भी सूरत में न होने दें।
विज्ञापन
नगर से सटी ग्राम पंचायत ककराही में लोगों ने जल्द विकास की उम्मीद संजोकर महंगे सर्किल रेट पर प्लाट खरीदकर मकान बनवाए। लगभग दो दशकों से यहां पर आलीशान मकानों का निर्माण बदस्तूर जारी है। विकास कुंज कालोनी, उपाध्याय नगर, केके पुरम समेत कई कालोनियां यहां बस भी गईं। सैकड़ों की संख्या में बने मकानों में लोग रहने भी लगे हैं, लेकिन गलियों का निर्माण सिर्फ वहीं पर हुआ, जहां रहने वालों की अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पकड़ है। इसके अलावा अधिकतर गलियां अभी भी ऊबड़-खाबड़ हैं।
विज्ञापन
इक्का-दुक्का गलियां ब्लाक भाग्यनगर, विधायक निधि, जिला पंचायत, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा आदि से बन चुकीं हैं, लेकिन अधिकतर गलियां अभी बनने की बाट जोह रहीं हैं। जलनिकासी के इंतजाम न होने के कारण गलियों और खाली प्लाटों में पानी भरा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदा पानी प्लाटों में भरा होने के कारण प्रत्येक वर्ष लोग संक्रामक रोगों से जूझते हैं।
विज्ञापन
इस बार भी संक्रामक रोगों के पैर पसारने की संभावना से लोग परेशान हैं। बता दें कि जलभराव के कारण डेंगू, मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना रहती है। ब्लाक भाग्यनगर के बीडीओ विश्वनाथ पाल ने कहा कि ग्राम पंचायत ककराही के प्रधान और सेक्रेटरी को निर्देशित किया गया है कि वह जलभराव की समस्या से निजात के लिए नाले-नालियों को साफ कराएं। जलभराव किसी भी सूरत में न होने दें।

जलनिकासी न होने के कारण गलियों के चौराहे पर खाली जगह में भरा पानी- फोटो : AURAIYA