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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   Veterinary hospital closed for a year and a half; livestock owners from 60 villages are facing difficulties.

Auraiya News: डेढ़ साल से बंद पशु अस्पताल, 60 गांवों के पशुपालक परेशान

Sat, 27 Jun 2026 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 27 Jun 2026 12:23 AM IST
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Veterinary hospital closed for a year and a half; livestock owners from 60 villages are facing difficulties.
फोटो-10- बलराज सिंह।
कुदरकोट। कस्बे के मठिन मोहल्ला स्थित पशु अस्पताल डेढ़ वर्ष से बंद पड़ा है। इससे क्षेत्र के करीब 60 गांवों के पशुपालकों को पशुओं के इलाज के लिए प्राइवेट डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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पशु पालकों ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व यहां तैनात पशु डॉ. नीलेश का स्थानांतरण एरवाकटरा पशु अस्पताल में हो गया था। उनके तबादले के बाद से अब तक यहां किसी नए डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। इससे यह अस्पताल बंद पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस अस्पताल में करीब 60 गांव संबद्ध हैं। इनमें कुदरकोट, बीबीपुर, नगला राजा, रामपुर खास, नूराबाद खास, मानीकोठी, नगला चंदन, गपकापुर, गोपियापुर, राजपुर, नगला जादो, नगला लालजू, सारी व शीश ग्राम सहित अन्य गांव शामिल हैंं।
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इन गांवों में हजारों पशु अक्सर हर साल बीमार होते हैं। मुंहपका, खुरपका, बुखार और अन्य बीमारियों से ग्रसित पशुओं के इलाज के लिए लोगों को क्षेत्र के झोलाछाप व प्राइवेट पशु डॉक्टरों को बुलाना पड़ता है। इससे वह इलाज के अलावा आने जाने की मनमानी फीस वसूलते हैं।
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पशु पालक, रामवीर, दीनानाथ, सुमेर सिंह, रज्जनलाल, सुरेंदर, रामपाल और रामसनेही ने बताया कि ज्यादा गंभीर पशु अक्सर डॉक्टर के देरी से आने पर दम भी तोड़ देते हैं। उन्होंने डीएम से जल्द पशु डॉक्टर की तैनाती कर अस्पताल चालू कराने की मांग की है।
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परिसर में गांव वाले जमाए कब्जा
डेढ़ साल से बंद पशु अस्पताल के चालू न होने से ग्रामीणों ने इसके परिसर का उपयोग अपने निजी कार्यों के लिए करना शुरू कर दिया है। कुछ ग्रामीण यहां अपने पशु बांध रहे हैं और गृहस्थी का सामान भी रखे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कोई देखरेख न होने से परिसर भी बदहाल हो रहा है।

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बोले लोग-पशुओं का इलाज कराना मुश्किल

सरकारी पशु अस्पताल बंद होने से प्राइवेट डॉक्टर से पशुओं का इलाज कराना पड़ता है। इसके अलावा प्राइवेट डॉक्टर के आने का काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ता है।

-बलराज सिंह, कुदरकोट
अगर पशु अस्पताल नियमित रूप से चालू हो जाए तो समस्याएं कम हो जाएंगी। पशु पालकों को अस्पताल बंद रहने से पशुओं को इलाज के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ता है। -रामजी, बीबीपुर

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स्टाफ की कमी के कारण कुदरकोट पशु अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। क्षेत्र में किसी पशु को चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता हो तो पशुपालक 1962 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। -डॉ. दिलीप कुमार, पशु चिकित्सा अधिकारी, एरवाकटरा

फोटो-10- बलराज सिंह।

फोटो-10- बलराज सिंह।

फोटो-10- बलराज सिंह।

फोटो-10- बलराज सिंह।

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