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बेमौसम बारिश में बह गए हजारों अंडे
ब्यूरो/ अमर उजाला, औरैया
Updated Mon, 06 Apr 2015 11:43 PM IST
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बेमौसम बारिश और दूसरे प्रांतों के बैराजों से पानी
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छोड़े जाने से राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के
रेत में बने घोंसले प्रभावित हो रहे हैं। पानी की अधिकता के कारण बड़े
पैमाने पर कछुओं को नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में इनके अंडे खराब हो
गए हैं।
पंचनद क्षेत्र में पिछले दिनों हुई बेमौसम की बारिश और राजस्थान के बैराजों से बेहिसाब पानी छोडे़ जाने से दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के घोंसले बहकर नष्ट हो गए हैं। चंबल नदी में एकाएक जल स्तर बढ़ने से कछुओं के प्रजनन पर वज्रपात हो गया है। रेत के टीलों में बने कछुओं के घोंसले पानी के बहाव में समाप्त हो गए हैं।
सोसायटी फार कंजरवेशन आफ नेचर के राजीव चौहान का कहना है कि पानी के तेज बहाव में बड़ी संख्या में कछुओं के घोंसले नष्ट हो गए हैं। इन दिनों रेत में कछुओं का प्रजनन बड़ी तादाद में होता है। चंबल में लगभग 12 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं, जो मौजूदा समय में प्रजनन करते हैं।
बांधों और बैराजों से बिना सूचना दिए बेहिसाब पानी छोड़ना गलत है। इससे दुर्लभ प्रजाति के जलचरों को नुकसान हो रहा है। -डा. अनिल कुमार पटेल (डीएफओ,)
पंचनद क्षेत्र में पिछले दिनों हुई बेमौसम की बारिश और राजस्थान के बैराजों से बेहिसाब पानी छोडे़ जाने से दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के घोंसले बहकर नष्ट हो गए हैं। चंबल नदी में एकाएक जल स्तर बढ़ने से कछुओं के प्रजनन पर वज्रपात हो गया है। रेत के टीलों में बने कछुओं के घोंसले पानी के बहाव में समाप्त हो गए हैं।
सोसायटी फार कंजरवेशन आफ नेचर के राजीव चौहान का कहना है कि पानी के तेज बहाव में बड़ी संख्या में कछुओं के घोंसले नष्ट हो गए हैं। इन दिनों रेत में कछुओं का प्रजनन बड़ी तादाद में होता है। चंबल में लगभग 12 प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं, जो मौजूदा समय में प्रजनन करते हैं।
बांधों और बैराजों से बिना सूचना दिए बेहिसाब पानी छोड़ना गलत है। इससे दुर्लभ प्रजाति के जलचरों को नुकसान हो रहा है। -डा. अनिल कुमार पटेल (डीएफओ,)