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Auraiya News: किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म में तीन दोषमुक्त
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औरैया। विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) के पीठासीन अधिकारी अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने पांच साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म मामले में फैसला सुनाया। न्यायालय ने मुख्य आरोपी अखिलेश उर्फ रत्नेश, मोहित और रोहित को दोषमुक्त किया। अदालत ने बयानों से पलटने पर वादिनी के खिलाफ प्रकीर्ण दर्ज करने के आदेश दिए।
थाना अछल्दा क्षेत्र की एक महिला ने 28 जून 2021 को तहरीर दी थी। आरोप था कि 27 जून 2021 की रात उसकी 17 वर्षीय बेटी लापता हो गई। बेटी घर से आधार कार्ड, कागजात और 20 हजार रुपये नकद लेकर गई थी। तहरीर में बलवीर सिंह, मोहित, रोहित और अखिलेश पर बेटी को ले जाने का आरोप था। पुलिस ने अखिलेश उर्फ रत्नेश के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का आरोप-पत्र प्रेषित किया। मोहित और रोहित पर अपहरण का आरोप-पत्र न्यायालय में दिया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। मुकदमे की मुख्य तथ्य साक्षी यानी वादिनी (मां) और खुद पीड़िता ने न्यायालय में अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया। अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर दोनों को पक्षद्रोही घोषित किया गया। पीड़िता ने अपने बयानों में कहा कि वह घर वालों से नाराज होकर मौसी के यहां चली गई थी। उसने बताया कि आरोपियों ने उसके साथ कोई गलत कृत्य नहीं किया था। साक्ष्यों के अभाव और विरोधाभासों के चलते अदालत ने अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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थाना अछल्दा क्षेत्र की एक महिला ने 28 जून 2021 को तहरीर दी थी। आरोप था कि 27 जून 2021 की रात उसकी 17 वर्षीय बेटी लापता हो गई। बेटी घर से आधार कार्ड, कागजात और 20 हजार रुपये नकद लेकर गई थी। तहरीर में बलवीर सिंह, मोहित, रोहित और अखिलेश पर बेटी को ले जाने का आरोप था। पुलिस ने अखिलेश उर्फ रत्नेश के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का आरोप-पत्र प्रेषित किया। मोहित और रोहित पर अपहरण का आरोप-पत्र न्यायालय में दिया।
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विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। मुकदमे की मुख्य तथ्य साक्षी यानी वादिनी (मां) और खुद पीड़िता ने न्यायालय में अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया। अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर दोनों को पक्षद्रोही घोषित किया गया। पीड़िता ने अपने बयानों में कहा कि वह घर वालों से नाराज होकर मौसी के यहां चली गई थी। उसने बताया कि आरोपियों ने उसके साथ कोई गलत कृत्य नहीं किया था। साक्ष्यों के अभाव और विरोधाभासों के चलते अदालत ने अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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