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Auraiya News: सिर्फ मुट्ठी भर फसल का मुआवजा

Fri, 16 Oct 2026 01:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 01:36 AM IST
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Compensation amounting to just a handful of crops
चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद
औरैया। चक्रवाती बारिश और बाढ़ की चपेट में आई फसलों में हुए नुकसान को लेकर सरकारी सिस्टम की ओर से दिया गया मुआवजा कई किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। यह हम नहीं स्वयं किसान कह रहे हैं। उनका कहना है कि क्षति बड़ी हुई है और राहत राशि न के बराबर दी गई है। किसी किसान के हिस्से में एक हजार तो किसी के हिस्से में 1015 रुपये आए हैं। हालांकि ऐसे किसानों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन छोटे जोत वाले इन किसानों को सरकारी सिस्टम का मरहम दर्द को दूर नहीं कर सका है। किसानों की कसक अभी बाकी है।
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दो दिन पहले सोमवार को कलक्ट्रेट में कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रभावित (बाढ़ और चक्रवात) किसानों को राहत राशि सांकेतिक चेक के माध्यम से बांटी गई। हालांकि डीबीटी के माध्यम से जनपद के 2008 किसानों के खाते में 1.16 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। इसमें 254 किसान बाढ़ और 1754 किसान चक्रवात से प्रभावित वाले रहे। बरसात में चौपट हुई फसलों के अवशेष अभी खेतों में नजर आ रहे हैं।
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फसल उत्पादन तो छोड़िए मवेशियों के लिए चारे तक की फसल नहीं निकल पाई है। कृषि मानकों के अनुसार 33 प्रतिशत फसल नुकसान का ही प्रावधान है। इस नुकसान के आकलन के लिए लेखपालों को क्षेत्र में भेजा गया था। लेकिन कुछ किसानों के अनुसार लेखपालों ने उनकी बर्बाद फसलें ही नहीं देखी। जहां लेखपाल पहुंचे भी, उन्हें मुआवजा ही नहीं मिला है। ऐसे में किसान खुद को उपेक्षित समझ रहे हैं। मुआवजे के पात्र कुछ किसान तो सरकारी मदद को औपचारिकता बता रहे हैं। चूंकि किसी किसान को एक हजार तो किसी को 1015 रुपये खाते में डीबीटी से मिले हैं।
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केस-1-1000 रुपये मुआवजा नहीं चाहिए
अजीतमल के भदसान गांव निवासी किसान नाथूराम दोहरे ने बताया कि खेत में डेढ़ बीघा बाजरा व आधा बीघा उड़द की फसल की थी। दोनों ही फसलें बरसात में बर्बाद हो गई। बर्बादी देखने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल मौके पर नहीं आए और न ही संपर्क किया। बाजरा की फसल में तीन बार बोआई कराई। 1000 रुपये मुआवजा नहीं चाहिए। एक हजार रुपये तो बस निराई में चले जाते हैं। किसानों का मजाक बना लिया है।
केस-2-एक हजार रुपये देकर मजाक बनाया
अजीतमल के भदसान गांव निवासी निवासी रामौतार ने बताया कि पिता चेतराम के नाम जमीन है। खेती से परिवार का गुजारा होता है। पांच बीघा खेत में बाजरे की फसल की थी। लेकिन चक्रवाती बारिश में पूरी फसल बर्बाद हो गई। क्षेत्रीय लेखपाल अभिषेक मौके पर आए थे और आकलन करके चले गए। महज एक हजार रुपये मुआवजा देकर गरीब का मजाक बनाना गया है। करीब से 40 हजार का नुकसान हुआ है।
केस-3-1015 रुपये में नुकसान की भरपाई कैसे होगी
अजीतमल के चिटकापुर गांव निवासी मंगली ने बताया कि तीन बीघा में बाजरे की फसल की थी। एक बीघा फसल पूरी तरह से खराब हो गई। क्षेत्रीय लेखपाल जांच कर गए थे। करीब पांच हजार रुपये एक बीघा की लागत आई थी। जानकारी मिली है कि खाते में मुआवजे के 1015 रुपये आए हैं। इतने में नुकसान की भरपाई कैसे हो पाएगी।
केस-4-मुआवजा ही नहीं आया
बिधूना के गांव रायपुर कैथावा गांव निवासी संजय सिंह ने बताया कि पांडु नदी की बाढ़ में 40 बीघा के करीब धान की फसल डूब गई थी। काफी नुकसान हुआ। लेखपाल ने नुकसान का सर्वे भी किया था। लेकिन मुआवजा ही नहीं आया है।
केस-5-सर्वे के बाद भी मुआवजा नहीं
बिधूना के गांव रायपुर निवासी दुर्गेश सिंह ने बताया कि करीब 20 से 25 बीघा धान की फसल पांडु नदी की बाढ़ में डूबी थी। फसल पूरी तरह से चौपट हो गई थी। लेखपाल ने नुकसान का सर्वे भी किया था। लेकिन मुआवजा नहीं आया है।
फसल नुकसान की रूपरेखा राहत पोर्टल से होती तैयार
जिला प्रशासन की ओर से आपदा राहत के लिए सर्वे के आदेश होने पर लेखपाल गांव-गांव दस्तक देते हैं। यहां फसलों में 30 प्रतिशत से ज्यादा के नुकसान और रकबे समेत किसान की जानकारी राहत पोर्टल पर दर्ज करते हैं। यह जानकारी पहले तहसीलदार फिर एसडीएम के पटल पहुंचती है। संस्तुति के बाद जिला स्तर पर पहुंचती है। कंपाइल रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाती है।
वर्जन
लेखपाल के न पहुंचने और गलत मुआवजे को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। शासन के निर्देश पर 33 प्रतिशत के नुकसान पर मुआवजा दिया जाता है। किसी को कम मुआवजा मिला हो तो एसडीएम से जानकारी से सकता है। अभी इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। -अविनाश मौर्य, एडीएम, वित्त एवं राजस्व

वर्जन
किसानों को उनके रकबा के हिसाब से मुआवजा वितरण किया गया है अगर किसी को एक हजार मिला है तो किसी किसान को पंद्रह हजार भी तो मिला है। ऑटो फीडिंग होती है उसी के हिसाब से मुआवजा बनकर निकलता है। -अविनाश कुमार, तहसीलदार, अजीतमल

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

चिटकापुर निवासी मंगली के खेत में गिरी पड़ी बाजरे की फसल। संवाद

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