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Auraiya News: पीटने व एससी-एसटी के मामले में तीन आरोपी दोषमुक्त
Wed, 22 Jul 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 22 Jul 2026 12:14 AM IST
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औरैया। दिबियापुर थाना क्षेत्र के चपौली गांव में नौ साल पहले पीटने व एससी-एसटी के मामले में विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने फैसला सुनाया।
न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव और बयानों में विरोधाभास के चलते आरोपी अहमद अली, इश्त्याक अली और ईशाक अली को दोषमुक्त कर दिया है।
गांव चपौली निवासी निवासी रमेशचन्द्र का आरोप था कि सात जून 2017 को जब वह अपने घर के अंदर खाना खा रहा था। उसके 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता रामस्वरूप चबूतरे पर बैठे थे, तभी गांव के ही अहमद अली, इश्त्याक अली और ईशाक अली वहां पहुंचे।
परिवादी का आरोप था कि आरोपियों ने उसके पिता को जातिसूचक गालियां दीं और विरोध करने पर घर के अंदर घुसकर लात-घूंसों से उसकी पिटाई की। साथ ही, पिछले साल प्रधानी चुनाव में हरवाने की रंजिश मानते हुए धमकी दी।
शोरगुल सुनकर मामा राजकुमार, सर्वेश कुमार व अन्य लोगों के आने पर आरोपी मौके से भाग निकले थे। मंगलवार को मामले की सुनवाई की गई। अदालत ने माना कि दोनों पक्षों के बीच पहले से रंजिश चली आ रही थी, क्योंकि पूर्व में अभियुक्त पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए एक अज्ञात मुकदमे में परिवादी के चचेरे भाई सुनील का नाम प्रकाश में आया था।
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अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। विशेष न्यायाधीश ने उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। साथ ही, धारा 437 (क) के तहत 25 हजार रुपये व्यक्तिगत बंधपत्र व समान राशि के दो जमानतगीर पेश करने के आदेश दिया है।
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प्लॉट विवाद में गोलीकांड के तीनों आरोपी बरी
औरैया। प्लॉट पर अवैध कब्जे के विवाद को लेकर हुए जानलेवा हमले और धमकी के 11 साल पुराने मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास मिलने पर तीनों आरोपियों मोहम्मद आज़म उर्फ बड़े, रफीक और यूनुस को संदेह का लाभ देते हुए साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
वादी जेमी अहमद ने कोतवाली औरैया में मुकदमा दर्ज कराया था कि 14 मार्च 2012 को मोहल्ला तफकिया निवासी मोहम्मद आज़म उर्फ बड़े और रफीक ने उसके पिता मोहम्मद अशफाक उर्फ कल्लू के नाम पर बने एक प्लॉट पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया था। विरोध करने पर आरोपियों ने रंजिश मान ली।
आरोप था कि 15 मार्च 2012 को जब उसके पिता दुकान से घर लौट रहे थे, तभी लेखपाल एद्दीन के घर के पास पहले से घात लगाकर बैठे आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। आज़म ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर किया जिससे वे बाल-बाल बचे, जबकि रफीक द्वारा किए गए दूसरे फायर से वे गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।
मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष घटना के समर्थन में कोई भी पुष्ट और स्वतंत्र चश्मदीद गवाह अदालत में पेश करने में असफल रहा। अभियोजन पक्ष की कहानी संदेह के घेरे में आ गई। बाद में कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। (संवाद)
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न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव और बयानों में विरोधाभास के चलते आरोपी अहमद अली, इश्त्याक अली और ईशाक अली को दोषमुक्त कर दिया है।
गांव चपौली निवासी निवासी रमेशचन्द्र का आरोप था कि सात जून 2017 को जब वह अपने घर के अंदर खाना खा रहा था। उसके 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता रामस्वरूप चबूतरे पर बैठे थे, तभी गांव के ही अहमद अली, इश्त्याक अली और ईशाक अली वहां पहुंचे।
परिवादी का आरोप था कि आरोपियों ने उसके पिता को जातिसूचक गालियां दीं और विरोध करने पर घर के अंदर घुसकर लात-घूंसों से उसकी पिटाई की। साथ ही, पिछले साल प्रधानी चुनाव में हरवाने की रंजिश मानते हुए धमकी दी।
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शोरगुल सुनकर मामा राजकुमार, सर्वेश कुमार व अन्य लोगों के आने पर आरोपी मौके से भाग निकले थे। मंगलवार को मामले की सुनवाई की गई। अदालत ने माना कि दोनों पक्षों के बीच पहले से रंजिश चली आ रही थी, क्योंकि पूर्व में अभियुक्त पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए एक अज्ञात मुकदमे में परिवादी के चचेरे भाई सुनील का नाम प्रकाश में आया था।
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अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। विशेष न्यायाधीश ने उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। साथ ही, धारा 437 (क) के तहत 25 हजार रुपये व्यक्तिगत बंधपत्र व समान राशि के दो जमानतगीर पेश करने के आदेश दिया है।
प्लॉट विवाद में गोलीकांड के तीनों आरोपी बरी
औरैया। प्लॉट पर अवैध कब्जे के विवाद को लेकर हुए जानलेवा हमले और धमकी के 11 साल पुराने मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास मिलने पर तीनों आरोपियों मोहम्मद आज़म उर्फ बड़े, रफीक और यूनुस को संदेह का लाभ देते हुए साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
वादी जेमी अहमद ने कोतवाली औरैया में मुकदमा दर्ज कराया था कि 14 मार्च 2012 को मोहल्ला तफकिया निवासी मोहम्मद आज़म उर्फ बड़े और रफीक ने उसके पिता मोहम्मद अशफाक उर्फ कल्लू के नाम पर बने एक प्लॉट पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया था। विरोध करने पर आरोपियों ने रंजिश मान ली।
आरोप था कि 15 मार्च 2012 को जब उसके पिता दुकान से घर लौट रहे थे, तभी लेखपाल एद्दीन के घर के पास पहले से घात लगाकर बैठे आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। आज़म ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से फायर किया जिससे वे बाल-बाल बचे, जबकि रफीक द्वारा किए गए दूसरे फायर से वे गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।
मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष घटना के समर्थन में कोई भी पुष्ट और स्वतंत्र चश्मदीद गवाह अदालत में पेश करने में असफल रहा। अभियोजन पक्ष की कहानी संदेह के घेरे में आ गई। बाद में कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। (संवाद)