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पूरी रात चकरोड पर झूलते तार में दौड़ती रही ‘मौत’
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The whole night running in swinging wire Ckrod 'death'
- फोटो : AURAIYA
दिबियापुर (औरैया)। बलरामपुर जिले में हाईटेंशन लाइन तार टूटकर गिरने से बच्चों के घायल होने के मामले में शासन-प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं पर दिबियापुर के ग्राम खजुवैया में तो हद ही हो गई। यहां पर ग्रामीणों की सूचना के बावजूद पूरी रात तार खंभे से उतरकर झूलता रहा और बिजली आपूर्ति होती रही।
ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार रात लगभग साढ़े नौ बजे तेज चिंगारियों के साथ हाईटेंशन बिजली का तार खंभे से टूटकर लटकने लगा। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने तुरंत बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी। ग्रामीणों ने बताया कि एक कर्मचारी ने तो फोन पर यह तक कह दिया कि इतनी रात को हम क्या करें। इसके बाद पूरी रात इस तार से बिजली आपूर्ति होती रही और सेवानिवृत्त शिक्षक इसकी चपेट में आ गए। बलरामपुर में 15 जुलाई को हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से स्कूली बच्चों के घायल होने के मामले में सहायक अभियंता परीक्षण धीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया था। अधिशाषी अभियंता परीक्षण राजेश कुमार एवं उपखंड अधिकारी वितरण प्रशांत शेखर को चार्जशीट देकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले में भी दो संविदा कर्मियों को भी हटा दिया गया है। दुर्घटना के दिन ही प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर अवर अभियंता प्रियदर्शी तिवारी व लाइन स्टाफ इबता हुसैन को निलंबित कर दिया गया था।
ग्रामीण और स्कूली बच्चे दिबियापुर जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों ने अनुसार दिबियापुर में ट्यूशन आदि पढ़ने के लिए छात्र-छात्राएं निकलते तो वे भी इसकी चपेट में आ सकते थे। हाईटेंशन से चकरोड के दूसरी ओर किसानों द्वारा बांधे गए लोहे के तारों में भी करंट दौड़ गया। सूखे पौधों ने भी आग पकड़ ली। ग्रामीणों के अनुसार इसके चलते काफी देर तक वे शव के पास जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके।
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दिबियापुर (औरैया)। ग्रामीणों ने बताया कि रामसनेही शर्मा का सुबह के समय सभी से राम-राम करते हुए गुजरना एवं ग्रामीणों से विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए रुकना आदत में शामिल था। वह अक्सर पुरानी दिबियापुर एवं खजुवैया को जाने वाले पक्के मार्ग का इस्तेमाल करते थे। इस चकरोड का इस्तेमाल कम ही करते थे। पता नहीं आज ऐसा क्या हुआ कि वह इस मार्ग से गांव जा रहे थे। ग्रामीणों ने मुंह से सिर्फ इतना ही निकला कि शायद ईश्वर को यही मंजूर था। वह सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। बताया कि पिछले वर्ष श्रीबांके बिहारी रामलीला महोत्सव में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। जिसने भी हादसे की खबर सुनी मौके पर पहुंच गया। उनके निधन पर प्रधानाचार्य परिषद के राजेश अग्निहोत्री, चेयरमैन अरविंद पोरवाल, सरस्वती विद्या मंदिर के प्रबंधक राघव मिश्रा, शिवनारायण दीक्षित, जितेंद्र सिंह, आसू पाल, डॉ. अरविंद शुक्ला, राहुल दीक्षित, अतुल शर्मा, कृष्ण कुमार, हरीशंकर पोरवाल, मुकेश पोरवाल आदि पहुंचे और पुत्र अनिल को ढांढस बंधाया। इस दौरान राजस्व कर्मियों ने भी मौका मुआयना किया।
पौत्रों को पढ़ाने के लिए रामसनेही शर्मा वर्ष 2006 में दिबियापुर में बस गए थे। बड़े बेटे सुनील शर्मा कोटा में एक कोचिंग में फिजिक्स के टीचर हैं। पौत्र शशांक आईआईटी की तैयारी के लिए कोटा चला गया तो उसके साथ अनिल की पत्नी अनामिका भी कोटा चली गईं। इसके बाद रामसनेही अनिल एवं छोटे नाती कुशल के साथ दिबियापुर में रहते थे। गुरुवार को तड़के जब हादसे की खबर घर पहुंची तो अनिल अपने बेटे कुशल को स्कूल भेजने के लिए तैयार कर रहे थे। बदहवास अनिल घटनास्थल पर चले गए। जबकि कुशल को पास में रहने वाले अनिल के रिश्तेदारों ने संभाला। अनिल के अनुसार काफी देर तक बाबा के घर न लौटने पर कुशल काफी परेशान हो गया था। कुशल संजोस एकेडमी में कक्षा चार का छात्र है।
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ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार रात लगभग साढ़े नौ बजे तेज चिंगारियों के साथ हाईटेंशन बिजली का तार खंभे से टूटकर लटकने लगा। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने तुरंत बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी। ग्रामीणों ने बताया कि एक कर्मचारी ने तो फोन पर यह तक कह दिया कि इतनी रात को हम क्या करें। इसके बाद पूरी रात इस तार से बिजली आपूर्ति होती रही और सेवानिवृत्त शिक्षक इसकी चपेट में आ गए। बलरामपुर में 15 जुलाई को हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से स्कूली बच्चों के घायल होने के मामले में सहायक अभियंता परीक्षण धीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया था। अधिशाषी अभियंता परीक्षण राजेश कुमार एवं उपखंड अधिकारी वितरण प्रशांत शेखर को चार्जशीट देकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले में भी दो संविदा कर्मियों को भी हटा दिया गया है। दुर्घटना के दिन ही प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर अवर अभियंता प्रियदर्शी तिवारी व लाइन स्टाफ इबता हुसैन को निलंबित कर दिया गया था।
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ग्रामीण और स्कूली बच्चे दिबियापुर जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों ने अनुसार दिबियापुर में ट्यूशन आदि पढ़ने के लिए छात्र-छात्राएं निकलते तो वे भी इसकी चपेट में आ सकते थे। हाईटेंशन से चकरोड के दूसरी ओर किसानों द्वारा बांधे गए लोहे के तारों में भी करंट दौड़ गया। सूखे पौधों ने भी आग पकड़ ली। ग्रामीणों के अनुसार इसके चलते काफी देर तक वे शव के पास जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके।
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दिबियापुर (औरैया)। ग्रामीणों ने बताया कि रामसनेही शर्मा का सुबह के समय सभी से राम-राम करते हुए गुजरना एवं ग्रामीणों से विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए रुकना आदत में शामिल था। वह अक्सर पुरानी दिबियापुर एवं खजुवैया को जाने वाले पक्के मार्ग का इस्तेमाल करते थे। इस चकरोड का इस्तेमाल कम ही करते थे। पता नहीं आज ऐसा क्या हुआ कि वह इस मार्ग से गांव जा रहे थे। ग्रामीणों ने मुंह से सिर्फ इतना ही निकला कि शायद ईश्वर को यही मंजूर था। वह सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। बताया कि पिछले वर्ष श्रीबांके बिहारी रामलीला महोत्सव में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। जिसने भी हादसे की खबर सुनी मौके पर पहुंच गया। उनके निधन पर प्रधानाचार्य परिषद के राजेश अग्निहोत्री, चेयरमैन अरविंद पोरवाल, सरस्वती विद्या मंदिर के प्रबंधक राघव मिश्रा, शिवनारायण दीक्षित, जितेंद्र सिंह, आसू पाल, डॉ. अरविंद शुक्ला, राहुल दीक्षित, अतुल शर्मा, कृष्ण कुमार, हरीशंकर पोरवाल, मुकेश पोरवाल आदि पहुंचे और पुत्र अनिल को ढांढस बंधाया। इस दौरान राजस्व कर्मियों ने भी मौका मुआयना किया।
पौत्रों को पढ़ाने के लिए रामसनेही शर्मा वर्ष 2006 में दिबियापुर में बस गए थे। बड़े बेटे सुनील शर्मा कोटा में एक कोचिंग में फिजिक्स के टीचर हैं। पौत्र शशांक आईआईटी की तैयारी के लिए कोटा चला गया तो उसके साथ अनिल की पत्नी अनामिका भी कोटा चली गईं। इसके बाद रामसनेही अनिल एवं छोटे नाती कुशल के साथ दिबियापुर में रहते थे। गुरुवार को तड़के जब हादसे की खबर घर पहुंची तो अनिल अपने बेटे कुशल को स्कूल भेजने के लिए तैयार कर रहे थे। बदहवास अनिल घटनास्थल पर चले गए। जबकि कुशल को पास में रहने वाले अनिल के रिश्तेदारों ने संभाला। अनिल के अनुसार काफी देर तक बाबा के घर न लौटने पर कुशल काफी परेशान हो गया था। कुशल संजोस एकेडमी में कक्षा चार का छात्र है।

The whole night running in swinging wire Ckrod 'death'- फोटो : AURAIYA

The whole night running in swinging wire Ckrod 'death'- फोटो : AURAIYA